
सुपौल : उम्मीदवारों को भरोसा जीतने के साथ ही जातीय गोलबंदी की भी चुनौती
कुनौली में निर्मली विधानसभा चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चुनाव की चर्चा हो रही है। यहां के मतदाता अभी किसी भी उम्मीदवार के समर्थन में खुलकर नहीं बोल रहे हैं। सामाजिक समीकरण चुनाव में निर्णायक साबित होंगे। परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे।
कुनौली, सुनील कुमार। भारत-नेपाल सीमा से सटे निर्मली विधानसभा में चुनाव की सरगर्मी चरम पर पहंच गई है। इसकी धमक सीमावर्ती नेपाल में भी सुनी जा रही है। सीमावर्ती राजबिराज, हनुमाननगर व लहान तक चुनाव की गूंज सुनाई दे रही है। नेपाल के लोग भी चुनाव में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। नेपाल के दोनों ओर हार-जीत को लेकर लोग अपना- अपना गणित जोड़ रहे हैं। यहां आमने-सामने की टक्कर में बागी उमीदवार चुनाव को त्रिकोणीय बना रहे हैं। हालांकि मतदाता अभी किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में खुलकर नही बोल रहे हैं। इससे उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ गई हैं। खैर जीत का ताज किसके सिर पर सजेगा वह 14 नवम्बर को मतगणना के बाद पता चल ही जाएगा।

मंगलवार सुबह आईबी चौक की चाय दुकान पर बैठे स्थानीय सतीश कुमार सिंह कहते हैं कि अभी बस सभी उमीदवारों की जीत - हार का आकलन चल रहा हैं। लोग वोट किसको देंगे यह कोई नहीं कह रहा हैं। अमित कुमार सोनी कहते हैं कि हर उमीदवार को वोट आपको ही देंगे बोलकर आश्वाशन दे रहे हैं। रूपेश कुमार सिंह कहते हैं कि दिन - रात उमीदवारों का आना जाना लगा हुआ हैं। सभी तरह-तरह के वादे कर रहे हैं। प्रचार वाहन भी गांव में आ रहे हैं। इसी बीच दुर्गा सिंह कहते हैं कि बीते 15 वर्षो में क्षेत्र की तस्वीर व तकदीर दोनों बदल चुकी हैं। गली-गली तक सड़क , हर घर तक बिजली ,पानी का व्यवस्था,पेंशन ,गैस योजना और प्रधानमंत्री जैसी योजनाओं ने लोगों का जीवन आसान किया हैं। तभी ललित कुमार मिश्र कहते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र में डिग्री कॉलेज की स्थापना होनी चाहिए । ताकि छात्र -छात्रओं को स्नातक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए कहीं और नही जाना पड़ें । वहीं चर्चाओं के बीच मे ही सत्य नारयण गुप्ता ने कहा कि नेपाल की नदियों से कुनौली, कमलपुर और डगमारा पंचायत के लोगों की हर साल बाढ़ से करोड़ों की क्षति होती हैं। जान माल का नुकसान भी होता हैं । लेकिन इस तीन पंचायतों को बाढ़ से बचाने के लिए अभी तक सीमा बांध का जीर्णोद्धार का कार्य होना चाहिए । जिससे यहां के लोगों को बाढ़ से राहत मिल सकें । चर्चा के अंत मे सामाजिक समीकरण का मुद्दा भी आ गया। निर्मली विधानसभा के हर चुनाव में सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यहां जीत का ताज उन्ही का होगा , जो मतदाताओं का भरोसा जीतने के साथ सामाजिक गोलबंदी अपने पक्ष में करेगा । यहां दो जाति की मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक हैं। जो किसी भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करने से इंकार नहीं किया जा सकता । हालांकि अतिपिछड़ा मतदाताओं की भूमिका भी यहां अहम हैं।एससी व एसटी मतदाता भी हैं। संदीप कुमार ने कहा कि किसी भी उमीदवार को चुनाव जीतने के लिए सामाजिक समीकरण को साधना पड़ेगा । तब ही किला फतेह करने की संभावना बन सकती हैं।

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