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17 फरवरी, 2020|7:39|IST

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डॉक्टरों की व्यथा: सीमित संसाधनों में कैसे मिलेगा बेहतर इलाज

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डॉक्टरों की चुनौतियां लगातार बढ़ रही है। खासकर संसाधनों की कमी डॉक्टरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इसको लेकर सदर अस्पताल में डॉक्टरों की एक बैठक डॉ. जितेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में हुई। इसमें डॉक्टरों ने अपने-अपने कार्यानुभव साझा किया। कहा कि संशाधनों की कमी से बेहतर इलाज करना मुश्किल हो रहा है। डॉक्टरों ने सीएस को एक पत्र लिखकर हो रही कठिनाई से अवगत कराया है।

डॉक्टरों का कहना है कि ओपीडी में रोजाना सौ से अधिक मरीजों के इलाज दबाव झेलने वाले डॉक्टर भी अब बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। वे मधुमेह और ब्लड प्रेशर आदि के शिकार हो रहे हैं। इसपर चिंता जताते हुए डॉक्टरों ने कहा कि स्टाफ की कमी से पहले से ही डॉक्टरों पर दबाव है ऊपर शासन-प्रशासन द्वारा डॉक्टरों पर दबाव दिया जा रहा है। इससे डॉक्टरों को कार्य निष्पादन में कठिनाइयाँ हो रही है। लेकिन डॉक्टरों की कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास नहीं किया जा रहा है। इससे डॉक्टर और मरीज के बीच समन्वय भी तेजी से घट रहा है। इससे इलाज भी प्रभावित हो रहा है। साथ ही डॉक्टरों ने यह भी कहा कि साल 2018 में नो महीने का वेतन नहीं मिला है। लेकिन कार्यालय द्वारा ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। कहा कि कार्यालय द्वारा अपमानजनक स्थिति पैदा कर आंदोलन के लिए बाध्य किया जाता है।मौके पर सदर अस्पताल के कई डॉक्टर मौजूद थे।

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