इंडो-नेपाल बॉर्डर नो मेंस लैंड से हनुमान मंदिर हटाने का विरोध
कुनौली में गृह मंत्रालय ने नो मेंस लैंड से अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। हनुमान मंदिर को हटाने पर स्थानीय ग्रामीणों ने विरोध किया। नेपाल और भारत के प्रशासन ने मंदिर के निरीक्षण के बाद ग्रामीणों से चर्चा की, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी। 14 अप्रैल को दोनों देशों के गृह सचिवों की बैठक से पहले मंदिर हटाने का प्रयास जारी है।

कुनौली, निज प्रतिनिधि। गृह मंत्रालय की ओर से इंडो-नेपाल सीमा स्थित नो मेंस लैंड से अतिक्रमण हटाने को लेकर जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है। इस क्रम में इंडो-नेपाल बॉर्डर स्थित नो मेंस लैंड स्थित हनुमान मंदिर को हटाने को लेकर प्रशासनिक अधिकारी जब स्थानीय ग्रामीणों के साथ विचार-विमर्श को पहुंचे तो ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। इस विरोध पर नेपाल के सप्तरी जिले के सीडीओ और एसपी ने बुधवार को स्थापित मंदिर का निरीक्षण किया। साथ ही स्थानीय प्रशासन व सुरक्षा एजेंसी के साथ विचार-विमर्श किया। इस क्रम में नेपाल के सप्तरी जिले के सीडीओ सुवा लाल पोखरैल और एसपी रौशन बूढ़ा थोकी ने कुनौली बॉर्डर स्थित विवादित स्थल पर पहुंचकर मंदिर का निरीक्षण किया।
स्थानीय ग्रामीणों से इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के क्रम में उन्हें कोई संतोषजनक जबाब नहीं मिला। जबकि निर्मली प्रखंड प्रमुख राम प्रवेश यादव इस विवादित मामले को सुलझाने में लगे थे। गौरतलब है कि कुनौली बॉर्डर पर बहुत पुराना एक हनुमान मंदिर स्थापित है। यह नो मेंस लैंड पर बना हुआ है। इसे हटाने के लिए तीन महीने से नेपाल प्रशासन और भारतीय प्रभाग का प्रशासन मशक्कत कर रहा है। लेकिन मंदिर को हटाने पर विवाद उत्पन्न हो रहा है। इस बाबत बीते मंगलवार को बी एसडीएम, राजस्व अधिकारी, बीडीओ तथा कुनौली थानाध्यक्ष ने स्थानीय ग्रामीणों से इस विषय पर चर्चा की, लेकिन ग्रामीणों की सहमति नहीं बनी। इसके बाद दोबारा बुधवार को नेपाल रे सप्तरी जिले के सीडीओ सुवा लाल पोखरैल, एसपी रौशन बूढ़ा थोकी, एसएसबी इंस्पेक्टर दिनेश सिंह, निर्मली प्रखंड प्रमुख राम प्रवेश यादव व कुनौली थानाध्यक्ष सत्य प्रकाश सहित अन्य अधिकारियों ने ग्रामीणों से इस मुद्दे पर बातचीत का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बनी। नेपाल के सप्तरी जिला प्रशासन का कहना है कि नो मेंस लैंड पर से मंदिर हटाकर यह मंदिर या तो भारतीय प्रभाग में या फिर नेपाल प्रभाग में मंदिर स्थापित कर लिया जाए, जबकि ग्रामीणों की मंशा है कि मंदिर निर्माण में जो खर्च होगा, उसकी भरपाई दोनों देशों का प्रशासन करे। इस कारण यह मुद्दा सुलझने की बजाय और उलझता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 14 अप्रैल को दोनों देशों के गृह सचिव स्तरीय बैठक होगी। इसी वजह से जिला प्रशासन बैठक से पहले नो मेंस लैंड पर से मंदिर हटाना चाह रहा है। इस बाबत नेपाल के सप्तरी जिले के एसपी रौशन बूढा थोकी ने कहा कि नो मेंस लैंड पर से दोनों देशों की सहमति से ही अतिक्रमण हटाया जा रहा है। वहीं सप्तरी जिले के सीडीओ सुवा लाल पोखरैल ने बताया कि अंतराष्ट्रीय सीमा समझौता के अनुकूल नों मेंस लैंड पर से अतिक्रमण हटाना आवश्यक है।
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