
सुपौल : 11 बजे के बाद कोहरे की चादर हटी, धूप ने दी ठंड से राहत
सुपौल में रविवार सुबह घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता कम हो गई। लगभग 11 बजे कोहरा छंटने लगा और धूप निकली, जिससे तापमान में वृद्धि हुई। लोग धूप का आनंद लेने बाहर आए। मौसम विभाग ने 15 जनवरी तक शुष्क मौसम की संभावना जताई है, जबकि कोहरे के कारण सतर्क रहने की सलाह दी है।
सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। रविवार की सुबह जिले में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई थी। करीब 11 बजे के बाद धीरे-धीरे कोहरा छंटने लगा और सूर्यदेव के दर्शन हुए। धूप निकलते ही ठंड से परेशान जिलेवासियों ने राहत की सांस ली। मौसम साफ होते ही अधिकतम तापमान में तीन डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि न्यूनतम तापमान भी एक डिग्री बढ़ा। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार को अधिकतम तापमान 20 डिग्री और न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। रविवार को छुट्टी का दिन होने के कारण लोग बड़ी संख्या में घरों की छतों, आंगन और गली-मोहल्लों में धूप सेंकते नजर आए।
बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे धूप का आनंद लेते दिखे। दिन में सर्द पछुआ हवा के तेवर भी नरम पड़े, जिससे गलन कम महसूस हुई और लोग देर तक बाहर बैठे रहे। सुबह के समय कोहरे की वजह से सड़कों पर वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर वाहनों की रफ्तार धीमी रही। जैसे ही धूप निकली, बाजारों और चौक-चौराहों पर रौनक लौट आई। मौसम विभाग ने बताया कि जिले का मौसम 15 जनवरी तक शुष्क बना रहेगा। हालांकि सुबह और शाम के समय कोहरे का असर बना रहेगा। विभाग ने लोगों को कोहरे के दौरान सतर्क रहने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है। उधर, मौसम में बदलाव के कारण मौसमी बीमारों की संख्या बढ़ गई है। सदर अस्पताल से लेकर निजी क्लीनिकों में सभी उम्र के लोग वायरल से पीड़ित होकर आ रहे हैं। बीते 15 दिनों से तापमान में गिरावट से गेहूं, मक्का, राई और सरसों की फसल को फायदा होगा। कृषि वैज्ञानिक मिथिलेश राय ने बताया कि गेहूं की देर बुआई करने और 21 से 25 दिन की फसल होने पर सिंचाई कर प्रति हेक्टेयर 30 किलो यूरिया छिड़काव की सलाह दी है। वहीं मक्के की 50 से 60 दिन की फसल में प्रति हेक्टेयर 50 किलो यूरिया के उपयोग की सलाह दी है। उधर, ठंड में सबसे अधिक परेशानी बूढ़े व बच्चों को उठानी पड़ रही है। ठंड के कारण दैनिक मजदूरों को भी खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है।

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