DA Image
21 फरवरी, 2021|7:28|IST

अगली स्टोरी

पुरानी तकनीक से चल रहे ईंट भट्ठे

पुरानी तकनीक से चल रहे ईंट भट्ठे

सुपौल | हिन्दुस्तान संवाददाता

सरकार के निर्देश के बावजूद जिले में स्वच्छता तकनीक के बगैर पुरानी पद्धति से कई ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं। नियम बनने के बाद संबंधित विभाग और प्रशासन को भी इसकी फिक्र नहीं है। विभाग ने यह भी देखना उचित नहीं समझा कि ईंट भट्ठे कैसे चलाए जा रहे हैं। नतीजा प्रदूषण कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है।

माइनिंग विभाग के आंक ड़े के मुताबिक जिले में 73 ईंट भट्ठे हैं। इनमें से 69 ईंट भट्ठे वर्तमान में चल रहे हैं। करीब 30 से 40 फीसदी ईंट-भट्ठे पुरानी पद्धति से चलाए जा रहे हैं। प्रदूषण विभाग कार्रवाई के नाम पर बस औपचारिकता निभा रहा है। इस कारण रोज प्रदूषण में इजाफा हो रहा है। उधर, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा राज्य के करीब छह हजार ईंट भट्ठों को हाईकोर्ट के आदेश पर पुरानी पद्धति से भट्ठा चलाने पर रोक लगा दी गई थी। मालूम हो कि 4 दिसंबर 2018 को पटना हाईकोर्ट ने ईंट भट्ठा चलाने की पुरानी पद्धति पर रोक लगाने को लेकर आदेश पारित किया था। इसमें नई पद्धति और स्वच्छता तकनीक अपानते हुए ईंट भट्ठों को चलाने का आदेश दिया था। हालांकि जिले में करीब 43 ईंट भट्ठों के संचालकों ने नई पद्धति को अपना लिया है।

दो नई तकनीक है अधिक प्रसिद्ध: नई तकनीक से ईंट भट्ठों के संचालन के लिए दो तकनीक अधिक प्रसिद्ध है। इनमें पहला नेचुरल जिगजैक तकनीक है। इस पद्धति से जिले में ढाई दर्जन से अधिक ईंट भट्ठे चल रहे हैं। इसमें गर्म हवा से ईंट को पकाया जाता है।

वहीं डेढ़ दर्जन से अधिक भट्ठे हाई ड्राफ्ट तकनीक से संचालित किए जा रहे हैं। इसमें चिमनी 90 से 120 फीट ऊंची होती है। इससे निकलने वाला धुआं सफेद और कम मात्रा में निकलता है। साथ ही आसानी से ईंट पकता है। पुरानी पद्धति के भट्ठे से काला धुआं निकलता है जो वातावरण को काफी नुकसान पहुंचाता है। ईंट पकाने का काम नवंबर से शुरू हो जाता है। दिसंबर में ठंड के मौसम में चिमनी से निकलने वाला धुआं कोहरे में मिल जाता है। इससे लोगों को ठंड में सांस संबंधित परेशानी होने लगती है। लेकिन कार्रवाई नहीं होने से संचालक भी उदासीन बने हुए हैं।

जिले के पिपरा रोड स्थित चिमनी ईंट भट्ठा जो नई तकनीक से चल रही।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Brick kilns running on old technology