
सुपौल : एक फरवरी से एचएम-विशिस करेंगे एमडीएम संचालन
सुपौल समेत पूरे बिहार में मध्याह्न भोजन योजना के तहत चल रहा पायलट प्रोजेक्ट एक फरवरी से बंद हो जाएगा। प्रारंभिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक अभी भी मध्याह्न भोजन के कार्यों में शामिल हैं, जिससे योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में पूर्व की तरह मध्याह्न भोजन संचालन का निर्देश दिया है।
सुपौल, वरीय संवाददाता। सुपौल समेत पूरे बिहार में मध्याह्न भोजन योजना के तहत चल रहे पायलट प्रोजेक्ट के तहत बच्चों को मध्याह्न भोजन का संचालन एक फरवरी को बंद हो जाएगा। यह इसलिए बंद किया जा रहा है, क्योंकि इसके बाद भी प्रारंभिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक मध्याह्न भोजन के कार्यों से मुक्त नहीं हो पाये थे। इसलिए अब एक फरवरी से पूर्व की तरह प्रधानाध्यापकों एवं प्रारंभिक विद्यालयों की शिक्षा समिति के माध्यम से मध्याह्न भोजन योजना का संचालन किया जाएगा। इस बाबत मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक विनायक मिश्र की ओर से सुपौल समेत पूरे प्रदेश के जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (एमडीएम) को निर्देश दिया गया है।
गौरतलब है कि जिले में मरौना और निर्मली प्रखंड में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एमडीएम संचालन शुरू किया गया था, लेकिन अब यह व्यवस्था एक फरवरी से समाप्त हो जाएगी, क्योंकि संचालन के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं हैं। इधर, एमडीएम निदेशक विनायक मिश्र ने जारी निर्देश में कहा है कि शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के निर्देश के आलोक में मध्याह्न भोजन योजना से आच्छादित सभी जिलों के चयनित एक प्रखंड में विद्यालय के प्रधानाध्यापक-प्रधान शिक्षक के स्थान पर किसी अन्य नामित शिक्षक के माध्यम से मध्याह्न भोजन का संचालन कराते हुए पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य प्रधानाध्यापक को मध्याह्न भोजन के संचालन से मुक्त कराते हुए उनका अधिकांश समय शैक्षणिक गतिविधियों में उपयोग के लिए किया जाना था। जब पायलट प्रोजेक्ट का मूल्यांकन प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन से कराया गया, तो पता चला कि पायलट प्रोजेक्ट लागू होने के बाद भी करीब 70 फीसदी प्रधानाध्यापक किसी न किसी रूप से मध्याह्न भोजन के संचालन के कार्य में शामिल हैं। सहायक शिक्षकों का विद्यालय प्रशासन पर नियंत्रण अपेक्षाकृत कमजोर होने के कारण प्रधानाध्यापकों का मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित कार्य से मुक्त होने के बाद भी इस योजना में उनका हस्तक्षेप है। इससे प्रधानाध्यापक मध्याह्न भोजन के कार्य से मुक्त नहीं हो पाये। जिला शिक्षा पदाधिकारियों एवं जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (मध्याह्न भोजन योजना) को दिये गये निर्देश में कहा गया है कि पायलट प्रोजेक्ट का अग्रतर विस्तार नहीं करते हुए इससे संबंधित सभी विद्यालयों में पूर्व की भांति प्रधानध्यापक एवं विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से मध्याह्न भोजन का संचालन किया जाएगा। यह एक फरवरी से प्रभावी होगा। इस बाबत जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने बताया कि एमडीएम निदेशालय से स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत हो रहे एमडीएम संचालन को बंद करने का पत्र आया है। एक फरवरी से एमडीएम संचालित स्कूलों में पूर्व की तरह ही एमडीएम संचालन संबंधित प्रधानाध्यापकों तथा विद्यालय शिक्षा समिति के माध्यम से होगा। उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से प्रथम संस्था की ओर से कराए गए सर्वे में यह सामने आया कि स्कूलों के प्रधानाध्यापक किसी न किसी परिस्थितिवश एमडीएम संचालन से जुड़े थे, इसके बाद विभाग ने यह निर्णय लिया है। जबकि पायलट प्रोजेक्ट के तहत विद्यालय के एचएम को शैक्षणिक कार्य के लिए ज्यादा से ज्यादा समय उपलब्ध कराने को लेकर पहल की गई थी।

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