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15 जुलाई, 2020|1:26|IST

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आयुष डॉक्टर लिखते हैं मरीजों को अंग्रेजी दवा

पीएचसी में डॉक्टर, कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को इलाज कराने में परेशानी होती है। पीएचसी में एमबीबीएस डॉक्टरों के अभाव के कारण आयुष डॉक्टर ओपीडी का संचालन करते हैं और अंग्रेजी दवा लिखते हैं।

मालूम हो कि प्रखंड क्षेत्र के 13 पंचायतों में 4 एपीएचसी और 16 एचएससी हैं। इसमें पीएचसी प्रभारी सहित 3 डॉक्टर और 13 एएनएम हैं। लेडी डॉक्टर, कम्पाउंडर, ड्रेसर, क्लर्क के पद सालों से रिक्त हैं। कम्पाउंडर और ड्रेसर का काम स्वीपर और चतुर्थवर्गीय कर्मचारी करते हैं।

लैब तकनीशियन जांच करने के बदले स्थापना के कामकाज को निबटाते हैं। पीएचसी के प्रसव कक्ष में लगे वार्मर मशीन सालों से खराब हैं। नवजात बच्चे के बीमार पड़ने पर डॉक्टर दरभंगा रेफर कर देते हैं।

पीएचसी में नहीं है कई दवा: शुक्रवार को ओपीडी में डॉ. नूर आलम मरीजों की जांच कर दवा लिख रहे थे। सिराजपुर की एक महिला दो साल के छोटे बच्चे के पेट खराब की इलाज कराने पहुंची । डॉक्टर ने बच्चे को देखकर पीएचसी से एक ओआरएस लिख दिया और पेट खराब की दवा नहीं होने की बात कही। बच्चे को सिरप नहीं मिलने पर महिला झल्लाने लगी।

अधिकांश एपीएचसी और एचएससी हैं बंद

कर्मचारी और डॉक्टर की कमी के कारण अधिकांश एपीएचसी और एचएससी बंद हैं। 4 एपीएचसी में मनोहरपट्टी कई सालों से बंद है। कभी कभार एक चतुर्थ वर्गीय कर्मी द्वारा संचालन किया जाता है। 16 एचएससी में 6 का संचालन कभी कभार एएनएम द्वारा किया जाता है। इसके कारण लोगों को इलाज कराने में परेशानी होती है।

कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर बंद है टीकाकरण

प्रखंड क्षेत्र में 117 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इसमें हर महीना टीकाकरण करना अनिवार्य है। लेकिन एएनएम की कमी के कारण आधा से अधिक केंद्रो पर साल भर से नियमित टीकाकरण बंद है। सरकार के नियमानुसार तो हर महीने केंद्रो पर टीकाकरण होना अनिवार्य है। बच्चे को समय पर नियमित टीका नहीं लगने पर टीका लगने से कोई फायदा नहीं होगा।

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  • Web Title:AYUSH doctor writes English medicine to patients