सुपौल : कर्मियों की कमी से विकास कार्यों पर पड़ रहा असर
वीरपुर, एक संवाददाता। बसंतपुर प्रखंड में कर्मियों की भारी कमी के कारण प्रशासनिक एवं विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। गृह मंत्रालय की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत 27 राजस्व गांवों का चयन किया गया है, लेकिन कर्मियों की अनुपलब्धता से योजनाओं में बाधाएं आ रही हैं। स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

वीरपुर, एक संवाददाता। सीमावर्ती नेपाल सीमा से सटे बसंतपुर प्रखंड में कर्मियों की भारी कमी के कारण प्रशासनिक एवं विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कभी राज्य के अग्रणी प्रखंडों में गिने जाने वाला बसंतपुर आज आवश्यक पदों के खाली रहने से कई योजनाओं के क्रियान्वयन में पिछड़ता नजर आ रहा है। यह स्थिति स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।
कर्मियों की अनुपलब्धता
गृह मंत्रालय की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत बसंतपुर प्रखंड के 27 राजस्व गांवों का चयन किया गया है, जहां आधुनिक ग्रामीण मॉडल के आधार पर समग्र विकास होना है। बावजूद इसके, पर्याप्त कर्मियों की अनुपलब्धता के कारण योजनाओं के संचालन में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। वर्तमान समय में पंचायत चुनाव की तैयारी, मकान गणना और आगामी जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य अपने चरम पर हैं। इसके अतिरिक्त सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए लगाए जाने वाले सहयोग शिविर भी कर्मियों के अभाव में प्रभावित हो रहे हैं।
आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति
प्रखंड में आंगनबाड़ी केंद्रों की संख्या 184 है, लेकिन नियमित सीडीपीओ की नियुक्ति नहीं होने के कारण निर्मली सीडीपीओ को बसंतपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इससे आंगनबाड़ी संचालन एवं निगरानी कार्य प्रभावित हो रहा है। इसी प्रकार बीपीआरओ का प्रभार छातापुर के अधिकारी को सौंपा गया है, जबकि पीओ का मूल पदस्थापन पिपरा में है, जो बसंतपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। दूरी अधिक होने के कारण कार्य निष्पादन में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।
प्रशासनिक परेशानियां
प्रखंड कार्यालय में नाजिर का पद भी लंबे समय से खाली पड़ा है। बिना नाजिर के कार्यालय संचालन में कई प्रशासनिक परेशानियां सामने आ रही हैं। वहीं चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों के चार स्वीकृत पद होने के बावजूद एक भी नियमित कर्मचारी कार्यरत नहीं है। फिलहाल एक संविदा कर्मी के सहारे व्यवस्था चल रही है। 14 पंचायतों वाले इस प्रखंड में मात्र दो पंचायत सचिव कार्यरत हैं। दोनों पर सात-सात पंचायतों की जिम्मेदारी है। पंचायत विकास कार्यों के अलावा आवास, आय, जाति एवं अन्य प्रमाणपत्रों से जुड़े कार्य भी इन्हीं के जिम्मे हैं। नतीजतन छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लोगों को प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
बीडीओ का बयान
इस संबंध में बीडीओ सुजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि प्रखंड में कर्मियों की काफी कमी है, इसके बावजूद सभी कार्यों के निष्पादन का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को समझा-बुझाकर उनकी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।
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