Hindi NewsBihar NewsSugar scam like fodder scam 6 convicted after 36 years sentence be announced on December 18
चारा घोटाला की तर्ज पर चीनी घपला, 36 साल बाद 6 दोषी करार; 18 दिसम्बर को सजा का ऐलान

चारा घोटाला की तर्ज पर चीनी घपला, 36 साल बाद 6 दोषी करार; 18 दिसम्बर को सजा का ऐलान

संक्षेप:

सितंबर 1989 में फर्जीवाड़ा कर चीनी बेचने व राशि का गबन की बिहार स्टेट शुगर कॉरपोरेशन पटना और अन्य अधिकारियों से स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। इसकी जांच के बाद सभी को क्लीनचिट दे दी गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से शिकायत की।

Dec 11, 2025 09:56 am ISTSudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

बिहार में चारा घोटाले की तर्ज पर चीनी घोटाला मामले में 36 साल बाद फैसला आया है। कोर्ट ने 6 अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। 18 दिसम्बर को सजा का ऐलान होगा। फर्जी फर्म के नाम पर चीनी बिक्री की गई थी जिसमें बाईक, स्कूटर और सरकार ट्रक पर चीनी की ढुलाई दिखाई गयी है। विशेष निगरानी कोर्ट में मामला चल रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश पर मामले की निगरानी जांच कराई गयी थी।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इस 36 साल पुराने मामले में तत्कालीन प्रशासन प्रमुख नंद कुमार सिंह सहित छह को विशेष न्यायालय (निगरानी) ने दोषी करार दिया है। मामला पश्चिमी चंपारण के लौरिया चीनी मिल से फर्जीवाड़ा कर 997 बोरी चीनी बेचने का है। दोषी करार लोगों में बिहार स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड की लौरिया इकाई के तत्कालीन प्रशासन प्रमुख नंद कुमार, तत्कालीन उपप्रबंधक उमेश प्रसाद सिंह, लिपिक सुशील कुमार श्रीवास्तव, शुगर केन लिपिक लालबाबू प्रसाद, चीनी बिक्री प्रभारी धीरेंद्र झा व लेखा पदाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं।

डीआईजी की भी हुई गवाही

सेशन ट्रायल के बाद विशेष कोर्ट (निगरानी) के न्यायाधीश दशरथ मिश्र ने बुधवार को इन सबको दोषी करार दिया। सजा के बिंदू पर 18 दिसंबर को सुनवाई होगी। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक निगरानी कृष्णदेव साह ने कोर्ट के समक्ष छह गवाहों को पेश किया। गवाहों में निगरानी के तत्कालीन डीआईजी कुमार एकले भी थे।

मुख्यमंत्री के आदेश पर निगरानी ने की थी जांच

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि लौरिया चीनी मिल से सितंबर 1989 में फर्जीवाड़ा कर चीनी बेचने व राशि का गबन की बिहार स्टेट शुगर कॉरपोरेशन पटना और अन्य अधिकारियों से स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी। इसकी जांच के बाद सभी को क्लीनचिट दे दी गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से शिकायत की। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इसकी जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को करने का आदेश दिया।

इस बीच 1997 में लौरिया चीनी मिल बंद हो गई। निगरानी ने जांच में 21 सितंबर 1989 से 28 सितंबर 90 के बीच 8.88 लाख रुपये की चीनी बेचने व राशि गबन के मामले प्रथम दृष्टया सत्य पाने पर 28 फरवरी 2000 को 18 संबंधित अधिकारियों-कर्मियों पर एफआईआर दर्ज की। इसमें मिल के तत्कालीन जीएम हरिवंश नारायण सिंह सहित वे शामिल थे, जिनको पहले क्लीनचिट दी गई थी। मामले के अनुसंधान के बाद निगरानी ने 18 को आरोपित बनाया। इसमें तीन की पहले ही मौत हो गई। चार्जशीट के बाद 15 आरोपितों में से आठ विशेष कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। विशेष कोर्ट से इसके विरुद्ध स्थाई वारंट जारी है। वहीं, सात आरोपितों में से तत्कालीन जीएम हरिवंश नारायण सिंह की सेशन-ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar
टीवी मीडिया और डिजिटल जर्नलिज्म में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। क्राइम, पॉलिटिक्स, सामाजिक और प्रशासनिक मामलों की समझ रखते हैं। फिलहाल लाइव हिन्दु्स्तान में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर बिहार के लिए काम करते हैं। इससे पहले ईटीवी न्यूज/News18 में बिहार और झारखंड की पत्रकारिता कर चुके हैं। इंदिरा गांधी नेशनल ओेपन यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में पीजी किया है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bihar Shapath Grahan, Bihar Election Result 2025, Bihar Chunav Result, बिहार चुनाव 2025 , Bihar vidhan sabha seats , बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स और बिहार चुनाव 2025 की खबरें पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।