ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News बिहारसमर्थन है लेकिन 2024 का चुनावी जुमला ना बने महिला आरक्षण, जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने बीजेपी को खूब लपेटा

समर्थन है लेकिन 2024 का चुनावी जुमला ना बने महिला आरक्षण, जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने बीजेपी को खूब लपेटा

जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा कि यह 2024 का चुनावी जुमला है। ये (बीजेपी) महिलाओं को छलने का काम करना चाहते हैं। महिला आरक्षण बिल का जेडीयू समर्थन करती है।

समर्थन है लेकिन 2024 का चुनावी जुमला ना बने महिला आरक्षण, जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने बीजेपी को खूब लपेटा
Jayesh Jetawatलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 20 Sep 2023 01:33 PM
ऐप पर पढ़ें

Women Reservation Bill JDU BJP: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन विधेयक यानी महिला आरक्षण बिल को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने समर्थन दिया है। मगर जेडीयू अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने लोकसभा में बीजेपी को जमकर सुना दिया। उन्होंने कहा कि कहीं महिला आरक्षण 2024 का चुनावी जुमला बनकर न रह जाए। इसमें अति पिछड़ा एवं पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को बी अलग से आरक्षण मिलना चाहिए। 

नारी शक्ति वंदन विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान मुंगेर से सांसद ललन सिंह ने जेडीयू की ओर से सदन में बात रखी। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की वजह से हम बिल का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन सरकार जो बिल लाई है उसकी मंशा महिलाओं को लोकसभा और विधायकों को आरक्षण देना नहीं है। बल्कि 26 दलों का INDIA गठबंधन बना है उसका ये पैनिक रिएक्शन है। 

ललन सिंह ने कहा कि यह 2024 का चुनावी जुमला है। ये (बीजेपी) महिलाओं को छलने का काम करना चाहते हैं। 2014 में बेरोजगारों को छला, 2 करोड़ रोजगार का वादा करके। काला धन लाएंगे, 15 लाख पहुंचाएंगे, कहकर गरीबों को छला। अगर इनकी मंशा होती तो 2021 में इन्होंने जाति आधारित गणना करवा दी होती। यह देश की मांग है। जेडीयू अध्यक्ष ने कहा, "आपका गरीबों को अति पिछड़ों को पिछड़ों से न्याय करने में विश्वास नहीं है, इसलिए जाति जनगणना नहीं करवाई। अगर 2021 में जाति जनगणना शुरू करवाई होती तो अब तक खत्म हो गई होती। महिला आरक्षण भी लागू हो गया होता।" 

महिला आरक्षण पर नहीं मिल रहे जेडीयू-आरजेडी के सुर

ललन सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि महिलाएं और देश की जनता जान गई है कि आप जुमलेबाज हैं। उन्हें आपके किसी जुमले पर भरोसा नहीं है। बिहार पहला राज्य है, जहां 2005 में सरकार बनी तब 2006 में महिलाओं को आरक्षण दिया। 2015 में जब महागठबंधन की सरकार बनी, तब 2016 में राज्य सरकार की सभी सेवाओं में 33 फीसदी आरक्षण महिलाओं को दिया गया। एक साल के अंदर यह काम किया गया। आपकी तरह साढ़े चार साल इंतजार नहीं किया। 

उन्होंने कहा कि आंकड़े आपके पास 2019 से था, तब क्यों नहीं महिला आरक्षण बिल लेकर आए। विपक्षी दलों की जब पटना, बेंगलुरु और मुंबई में मीटिंग हुई तो घबराहट में मोदी सरकार ने यह फैसला लिया है। एक करोड़ 30 लाख ग्रामीण महिलाओं को बिहार सरकार ने जीविका के माध्यम से सशक्त करने का काम किया है। मगर केंद्र सरकार को महिला सशक्तिकरण से नहीं अपनी कुर्सी से मतलब है। 

स्वागत के साथ नीतीश ने रखी शर्त, महिला आरक्षण में विशेष प्रावधान हो

ललन सिंह के निशाने पर आरएसएस
अपने भाषण में जेडीयू अध्यक्ष ललन सिंह ने आरएसएस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख
मोहन भागवत कहते हैं आरक्षण पर पुनर्विचार होना चाहिए। हम उन्हें बता दें कि आरक्षण आपकी कृपा से नहीं है, संविधान के अनुसार है। अगर महिला आरक्षण बिल लाए हैं, तो पिछड़ों और अति पिछड़ों को इसमें भी आरक्षण दिया जाना चाहिए। पंचायती राज व्यवस्था, नगर निकाय में हमने बिहार में दिया है।

जाति गणना के विरोध में केंद्र
ललन सिंह ने कहा कि बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना कराने का फैसला लिया, तो केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में विरोध में खड़ी हो गई। ये इनका चेहरा है। नारी शक्ति वंदन की बात करते हैं। आप अपना वंदन कर रहे हैं। अपनी कुर्सी का वंदन कर रहे हैं। अपनी संस्था का वंदन कर रहे हैं। देश की जनता आपके चेहरे को पहचान गई है। आपके झांसे में नहीं आने वाली है। 2024 में सत्ता से जाने वाले हैं, इसलिए आपको डर सता रहा है। 

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें