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बिहार में महागठबंधन की हताशा दूर कर पाएगी राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की रैली?

बिहार में सरकार में रहते लोकसभा चुनाव लड़ने का महागठबंधन का मंसूबा जेडीयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तोड़ दिया है। विश्वास मत के दौरान आरजेडी के तीन विधायक भी टूटकर सरकार के साथ आ गए।

बिहार में महागठबंधन की हताशा दूर कर पाएगी राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की रैली?
Ritesh Vermaलाइव हिन्दुस्तान,पटनाFri, 16 Feb 2024 11:04 AM
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बिहार में कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दूसरे चरण के दूसरे दिन पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की आज कैमूर में रैली है जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव भी शामिल होंगे। कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन में बची रह गई सीपीआई-माले, सीपीआई और सीपीएम के नेताओं को भी बुलाया है। तकरीबन तीन सप्ताह पहले तक सरकार चला रहे महागठबंधन में शामिल छह पार्टियों की सत्ता में या सत्ता के साथ रहते लोकसभा चुनाव लड़ने के मंसूबे को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फेल कर दिया है। इससे इन पार्टियों के कार्यकर्ताओं और नेताओं में हताशा है। चुनाव सर्वेक्षण, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 400 पार और नीतीश कुमार का 40 की 40 के साथ 200 पार का दावा उनके सामने विकराल सवाल है।

सरकार से विपक्ष में पहुंचे महागठबंधन में लोकसभा चुनाव लड़ने और जीतने के लिए जिस जोश की जरूरत है वो नीतीश के पलटने से हवा है। राहुल और तेजस्वी पर सरकार से बाहर होने के बाद अपनी पहली रैली के जरिए पार्टी और गठबंधन में छाई निराशा को गुस्से में बदलने की चुनौती है जिससे दोनों पिछले तीन हफ्ते से बचते दिख रहे हैं। राहुल ने बिहार में यात्रा का पहला चरण सीमांचल में बिताया था और ठीक उसी समय यह सरकार बदलने का खेल हुआ लेकिन उन्होंने नीतीश पर हमले नहीं किए।

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उत्तराधिकारी से पूर्व उप-मुख्यमंत्री बन गए तेजस्वी तो चाचा नीतीश कुमार पर और भी संभल कर बोल रहे हैं। विधानसभा में विश्वास मत पर तेजस्वी के भाषण की खूब तारीफ हुई क्योंकि उसमें सरकार से बाहर होने की कोई खीज नहीं दिखी, गुस्सा नहीं था, प्रतिक्रिया नहीं थी और नीतीश को लेकर कोई भी ऐसी बात नहीं थी जो कान को अच्छी ना लगे। इतना मीठा रहकर आरजेडी और महागठबंधन के कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने और जीतने के लिए कैसे गर्माया जाए, ये एक चुनौती है। कैमूर की रैली में राहुल और तेजस्वी के तेवर से तय होगा कि महागठबंधन आगे भी सेफ गेम खेलेगा या हमले शुरू होंगे।

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अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद बीजेपी के पक्ष में बन रहे माहौल को बिहार में जिस सामाजिक और जातीय समीकरण से काटा जा सकता था वो नीतीश के निकल जाने से बिगड़ गया है। अब महागठबंधन के पास आरजेडी के कोर वोट यादव और मुसलमान के साथ कांग्रेस के पास बचे रह गए समर्थक और लेफ्ट दलों के वोटर ही हैं। इतने से बिहार की 40 में चार सीट निकालनी भी मुश्किल है क्योंकि हर सीट पर बीजेपी का इंद्रधनुषी गठबंधन वोट शेयर में भारी दिख रहा है। बीजेपी के पास सवर्ण और वैश्य पहले से हैं। उसमें चिराग पासवान, पशुपति पारस दलित तो जीतनराम मांझी महादलित वोट जोड़ रहे हैं। अति पिछड़ों के बीच काफी प्रभाव रखने वाले नीतीश की वापसी के बाद उपेंद्र कुशवाहा और सम्राट चौधरी के साथ लव-कुश भी सेट दिख रहा है।

दुर्गावती में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की सभा की तैयारी पूरी

भारत जोड़ो न्याय यात्रा के तहत प्रखंड के प्लस टू स्कूल धनेछा के प्रांगण में राहुल और तेजस्वी की सभा होगी, जिसको लेकर एक तरफ जिला प्रशासन चौकस है तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कार्यक्रम की तैयारी को फाइनल टच देने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य चल रहा है। डीएम सावन कुमार और एसपी ललित मोहन शर्मा ने गुरुवार को स्थल निरीक्षण भी किया। रामगढ़ के विधायक सुधाकर सिंह ने भी जायजा लिया। विधायक ने दावा किया कि सभा में 25000 से ऊपर लोग आएंगे। घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता गांव-गांव से लोगों की लाने की तैयारी में लगे हैं। राहुल का काफिला रोहतास से निकलेगा जो कैमूर में जीटी रोड होते हुए कुदरा, मोहनिया के रास्ते दुर्गावती के धनेछा स्कूल पहुंचेगा।

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