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Hindi News बिहारArrah Lok Sabha: आरा में इतिहास रचेंगे आरके सिंह या माले के सुदामा तोड़ेंगे बीजेपी का नया किला?

Arrah Lok Sabha: आरा में इतिहास रचेंगे आरके सिंह या माले के सुदामा तोड़ेंगे बीजेपी का नया किला?

Arrah Lok Sabha Election: आरा लोकसभा सीट पर 1 जून को मतदान है। बीजेपी ने लगातार दो चुनाव जीते केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह को लड़ाया है जिनका मुकाबला सीपीआई-माले के सुदामा प्रसाद से है।

Arrah Lok Sabha: आरा में इतिहास रचेंगे आरके सिंह या माले के सुदामा तोड़ेंगे बीजेपी का नया किला?
Ritesh Vermaहिन्दुस्तान टाइम्स,अरुण कुमार, पटनाThu, 30 May 2024 02:36 PM
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आरा में बालू लदे ट्रकों की कछुए की रफ्तार से बेइंतहा लंबी कतार, हजारों जेसीबी, खुदाई की मशीन, ट्रक, ट्रैक्टर, नाव और 24 घंटे सूखी सोन नदी को खोदते मजदूर देखकर लग सकता है कि यहां की अर्थव्यवस्था बहुत बढ़िया चल रही है। लेकिन ऐसा है नहीं। इनमें से ज्यादातर खनन अवैध है। माइनिंग अधिकारी मानते हैं कि बेलगाम खनन से सरकार को राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। पर्यावरणविद सोन की दुर्दशा पर रो रहे हैं। बालू के फलते-फूलते व्यापार से हालांकि गरीबों की किस्मत नहीं बदली है।

आरा शहर से 25 किलोमीटर दूर संदेश में बालू कारोबार के सबसे निचले पायदान पर काम कर रहे मजदूर सुधीर बताते हैं- "बालू निकालने और लादने का ठेकेदार हमें 200-300 रुपए देता है। दिन-रात काम चलता रहता है। हम अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं और इसके आगे कुछ नहीं जानते।" स्थानीय लोग अवैध खनन को राजनेताओं और माफियाओं की मिलीभगत मानते हैं लेकिन आरा में चुनावी मुद्दा नहीं है। आरा में बीजेपी के कैंडिडेट और केंद्रीय मंत्री राज कुमार सिंह जीत की हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में हैं। अगर आरके सिंह ये कर पाते हैं तो आरा से लगातार तीन बार जीतने वाले पहले सांसद होंगे।

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आरके सिंह आरा सीट से लगातार दो बार जीतने वाले दूसरे एमपी भी हैं। उनसे पहले चंद्रदेव प्रसाद वर्मा को ही लगातार दूसरी जीत मिली। इन दोनों के अलावा इस सीट से कोई सांसद दोबारा नहीं जीत पाया है। सिंह के खिलाफ इंडिया गठबंधन की ओर से सीपीआई-माले के सुदामा प्रसाद लड़ रहे हैं जो इसी लोकसभा के अंदर तरारी सीट से विधायक भी हैं। लोकसभा के अंदर की सात विधानसभा सीटों में तीन पर आरजेडी और दो-दो सीट पर माले और भाजपा के विधायक हैं। भाजपा के नेता सुदामा प्रसाद को नक्सली बताते हैं और कहते हैं कि आरके सिंह को कोई चुनौती ही नहीं है।

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आरा में शहरी और ग्रामीण मतदाता स्पष्ट रूप से बंटे हैं इसलिए राजनीतिक बहस और चर्चा भी रंग-बिरंगी है। आरके सिंह नरेंद्र मोदी सरकार की योजनाओं के अलावा क्षेत्र में फ्लाईओवर, पुल, बिजली, रेल नेटवर्क जैसे विकास कार्यों के आधार पर वोट मांग रहे हैं तो सुदामा प्रसाद अमीर और गरीब की खाई को वोटरों के बीच उभार रहे हैं। मुद्दों की भरमार है लेकिन आरा में जातीय समीकरण हर बार की तरह सबसे अहम है। चुनाव प्रचार से लगता है कि इस बार लड़ाई कांटे की है। सीपीआई-माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य आरा के साथ-साथ पार्टी को मिली काराकाट और नालंदा में जमकर प्रचार कर रहे हैं। माले की तीनों सीट आखिरी चरण में ही है।

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1977 में शाहाबाद लोकसभा से निकलकर बने आरा लोकसभा क्षेत्र में सीपीआई-माले का मजबूत आधार है। 1989 में इस सीट से इंडियन पीपुल्स फ्रंट के रामेश्वर प्रसाद जीते थे जो फ्रंट आगे चलकर सीपीआई-माले के तौर पर सामने आई। रामेश्वर प्रसाद आगे के चुनाव में हारते रहे लेकिन हर बार लाख से ऊपर वोट के साथ तीसरे नंबर पर टिके रहे। 2014 में आरके सिंह ने लगभग डेढ़ लाख वोट के अंतर से आरजेडी के भगवान सिंह कुशवाहा को हराया था। 2019 में सिंह सीपीआई-एमएल के राजू यादव को लगभग डेढ़ लाख वोट से हराकर जीते थे।

राजद ने 2019 में राजू यादव को समर्थन के बदले पाटलिपुत्र में मीसा भारती के लिए सपोर्ट लिया था। अब दोनों दल साथ हैं और एक-दूसरे के लिए वोट मांग रहे हैं। सुदामा के लिए तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी के अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी वोट मांगने आरा के जगदीशपुर पहुंचे थे। जेडीयू को छोड़कर इंडिया गठबंधन के साथ आए पूर्व विधायक बिजेंद्र यादव कहते हैं- "इस बार माले को यादव और मुसलमान के 4 लाख वोट के ऊपर अपने पारंपरिक वोटर दलित और अति पिछड़ों का वोट मिलने की उम्मीद है। बीजेपी और जेडीयू के लोगों में झगड़ा अलग चल रहा है।"

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हालांकि बीजेपी मान रही है कि उसे आरा में विकास के काम और नरेंद्र मोदी सरकार के प्रदर्शन के आधार पर धर्म और जाति से ऊपर उठकर आरके सिंह ही लोगों की पहली पसंद बनेंगे। रिटायर्ड शिक्षक सदानंद सिंह कहते हैं- "आरके सिंह लगातार तीसरी बार जीतकर इतिहास रजेंगे। वो ऐसे राजनेता हैं जिन्होंने हर मोर्चे पर काम किया है और लंबे समय बाद आरा में वो सब दिख रहा है। मेडिकल और इंजीनियरिंग का कॉलेज भी खुल रहा है। लोगों को मुफ्त राशन, घर, आयुष्मान कार्ड, गैस सिलेंडर, किसान सम्मान निधि मिल रहा है। मैं उनको 10 में 7 नंबर दूंगा। उन्होंने जो कहा था वो करके दिखाया है।" आरके सिंह के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह भी आरा में सभा करने आए थे।

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1 जून को आरा तय करेगा कि आरके सिंह इतिहास रचेंगे या सुदामा प्रसाद दूसरी बार माले के लिए जीतकर बीजेपी का नया किला तोड़ेंगे। 1977 में आरा सीट बनने से पहले शाहाबाद सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा था। बलिराम भगत लगातार पांच जीत के बाद 1977 में पहली बार हारे थे जब परिसीमन के बाद सीट आरा बन गई। बलिराम भगत ने 1984 में एक और बार जीत हासिल की जो इस सीट पर कांग्रेस की आखिरी जीत रही। उसके बाद जनता दल, समता पार्टी, आरजेडी, जेडीयू का कब्जा रहा। 2014 में पहली बार भाजपा के लिए आरके सिंह ने आरा को जीता और तब से वो टिके हुए हैं।