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नीतीश सरकार को केके पाठक से कैसा मोह? RJD के बाद JDU एमएलसी ने पूछा, CM की क्यों नहीं सुन रहे ACS

आखिर सरकार को केके पाठक से सरकार को क्या मोह हो गया है कि गलत से गलत आदेश पास हो रहा है और सरकार कुछ नहीं कर रही है। दोनों सदनों का आधा समय भी केके पाठक के विवाद के मुद्दे पर बर्बाद हो रहा है।

नीतीश सरकार को केके पाठक से कैसा मोह? RJD के बाद JDU एमएलसी ने पूछा, CM की क्यों नहीं सुन रहे ACS
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,पटनाFri, 23 Feb 2024 02:38 PM
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बिहार के शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के के पाठक की गतिविधियों को लेकर बिहार विधान मंडल में शुक्रवार को भी काफी बहस हुई। राजद के बाद अब जदयू के विधायक भी केके पाठक का विरोध करने लगे हैं। शुक्रवार को जेडीयू एमएलसी महेश्वर सिंह ने सवाल उठाया कि केके पाठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश को भी क्यों अनसुना कर रहे हैं। वे कितने ताकतवर हो गए। इससे पहले जदयू के ही गुलाम गौस और पूर्व  सीएम राबड़ी देवी ने भी गुरुवार को विधान परिषद में केके पाठक के रवैया पर चिंता जताई थी। 

विधान परिषद में जेडीयू के एमएलसी महेश्वर सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार के आदेश और शिक्षा मंत्री द्वारा दोबारा स्थिति को स्पष्ट करने के बाद भी आरा में शिक्षकों पर कार्रवाई हुई। यह बहुत गलत बात है। उन्होंने सदन में बताया कि जिस दिन से यह सदन चल रहा है, एक व्यक्ति के लिए एक व्यक्ति केके पाठक के लिए सदन का समय बर्बाद हो रहा है। अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग कभी छुट्टी कैंसिल करते हैं तो कभी स्कूलों का समय बदल देते हैं। हम लोगों ने तो अपने स्कूलों में 10:00 बजे से 4:00 तक पढ़ाई की।  आखिर सरकार को केके पाठक से सरकार को क्या मोह हो गया है कि गलत से गलत आदेश पास हो रहा है और सरकार कुछ नहीं कर रही है।  सदन का आधा समय भी इसी मुद्दे पर बीत रहा है।  सबसे आश्चर्य की बात यह है कि यह ऑफिसर कितना ताकतवर है कि मुख्यमंत्री की बात भी नहीं सुन रहा।

महेश्वर सिंह सत्तारूढ़ दल के पहले विधायक नहीं हैं, जिन्होंने विभाग की एक के बाद एक कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की और सरकार को दुविधा में डाल दिया।  भाजपा विधायकों के साथ-साथ विपक्ष के विधायक भी पाठक के खिलाफ मुखर हैं। सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सीएम नीतीश कुमार को हस्तक्षेप करना पड़ा है। यह मामला सिर्फ सरकार का नहीं है। कुलपतियों की नियुक्ति, विश्वविद्यालय के मामलों में कथित हस्तक्षेप या कुलाधिपति द्वारा नामित कुलपतियों और विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारियों को विभाग की बैठकों में बुलाने की प्रवृत्ति को लेकर भी राजभवन का पाठक के साथ लगातार टकराव होता रहा है। कुलाधिपति सचिवालय ने भी शिक्षा विभाग को दुरुस्त करने के लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने खुद पटना यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में सीएम के सामने पाठक की कार्यशैली पर सवाल उठाया था।  

इससे पहले, शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनका बिहार लोक सेवा अध्यक्ष (बीपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के साथ भी विवाद चल रहा था, जिन्होंने एक महीने से अधिक समय के लिए उनके कार्यालय में जाना बंद कर दिया था। दोनों ही मामलों में सीएम को हस्तक्षेप करना पड़ा.

पिछले तीन दिनों से विपक्ष के लगातार विरोध के बीच सदन में सीएम के आदेश पर ताजा विवाद है कि स्कूल का समय सुबह 10 बजे से सुबह 4 बजे तक रहेगा, क्योंकि उन्होंने पिछले दिन सदन को आश्वासन दिया था, लेकिन शिक्षक नहीं रहेंगे। सामान्य प्रथा के अनुसार, 15 मिनट पहले आना और 15 मिनट बाद जाना आवश्यक है।

इस मामले में सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सीएम ने जो कहा है, वह अंतिम आदेश है और उसका अक्षरश: पालन किया जायेगा। अगर इसका पालन नहीं किया गया, तो कार्रवाई की जाएगी। सदस्यों ने दुहराया कि इसके बाद भी केके पाठक पाठक शिक्षकों के लिए सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक के समय पर अड़े हुए हैं और अपने विभाग के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, जबकि छात्रों के लिए कक्षाएं सुबह 10 बजे से सुबह 4 बजे तक चलेंगी।

जानकारी के मुताबिक केके पाठक के आदेश पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने सुबह 9 बजे तक ड्यूटी पर नहीं आने वाले कुछ शिक्षकों के खिलाफ गुरुवार को भी कार्रवाई की क्योंकि सुबह 9.05 बजे तक स्कूलों का निरीक्षण किया गया, जबकि सीएम ने घोषणा की थी कि यह 9.45 बजे होना चाहिए। उन्होंने वेतन में कटौती का आदेश दिया। 

इधर जदयू प्रवक्ता नीरज ने कहा है कि जब सीएम ने सदन में कहा है कि शिक्षक 15 मिनट पहले आएंगे और 15 मिनट बाद जाएंगे, तो इससे बड़ा कोई आदेश नहीं है।  सीएम के आदेश को लागू करना होगा और अगर ऐसा नहीं हुआ तो कार्रवाई होगी  चाहे वह एसीएस हों या कोई अन्य अधिकारी। सीएम के आदेश के बाद, अन्य आदेशों का कोई महत्व नहीं है।

बताते चलें कि केके पाठक बिहार के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं  जिन्होंने लगभग एक साल पहले शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाला था। पिछले 10 वर्षों में उन्होंने जिस भी विभाग में काम किया,  उनकी कार्यशैली के लिए उनकी चर्चा होती रही। हर विभाग में उनके समर्थक से ज्यादा विरोधी हो गए। अधिकांश विभागों में केके पाठक अपना कार्यकाल पूरा नहीं सके।

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