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Hindi News बिहारफिल्म के बाद राजनीति के हीरो; मोदी सरकार में चिराग पासवान का राजतिलक, पहली बार मंत्री

फिल्म के बाद राजनीति के हीरो; मोदी सरकार में चिराग पासवान का राजतिलक, पहली बार मंत्री

लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान मोदी सरकार 3.0 का केंद्रीय हिस्सा बन गए हैं। अपनी पुश्तैनी सीट से चुनाव जीतकर विरासत को संभाला है। साथ ही मोदी कैबिनेट का हिस्सा बनकर पिता का कद और बढ़ाया है।

फिल्म के बाद राजनीति के हीरो; मोदी सरकार में चिराग पासवान का राजतिलक, पहली बार मंत्री
Ratanलाइव हिंदुस्तान,बिहारSun, 09 Jun 2024 08:42 PM
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अभिनेता से नेता बने चिराग पासवान लोकजनशक्ति पार्टी के नेता हैं। उन्होंने लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की है। उनकी पार्टी ने पांच सीटों से चुनाव लड़ा था, जिसमें सभी पर जीत दर्ज की है। चिराग पासवान को मोदी सरकार का पक्का समर्थक माना जाता है।  चिराग के पिता रामविलास पासवान बिहार और देश की राजनीति में बड़ा कद रखने वाले नेता थे। नरेंद्र मोदी सरकार 3.0 में बिहार की लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान भी केंद्रीय मंत्री बनने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इनके राजनीतिक करियर को। 

हाजीपुर की पुश्तैनी सीट को किया अपने नाम
चिराग ने इस बार बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता है। उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के शिव चंद्र राम को 170105 वोटों से हराया है। इस सीट को चिराग की पुश्तैनी सीट कह सकते हैं, क्योंकि यहां से उनके पिता रामविलास पासवान 1977 से लेकर साल 2014 तक आठ बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। 

जमुई सीट से पहुंचे दो बार संसद
चिराग पासवान ने साल 2014 और 2019 में बिहार की जमुई सीट से जीत दर्ज की थी। साल 2019 में भूदेव चौधरी और साल 2014 में आरजेडी के शुधांशु शेखर भास्कर को चुनावी मैदान में पटखनी दी थी। इस बार उन्होंने अपनी पुश्तैनी सीट से चुनाव लड़ने का मन बनाया था, क्योंकि हाजीपुर से उनके पिता आठ बार सांसदी जीत चुके हैं।  

अभिनेता से नेता बने चिराग
चिराग का जन्म 1982 में दिल्ली में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई दिल्ली में ही हुई है। इन्जीनियरिंग पढ़ने के बाद उन्होंने फिल्मी करियर में हाथ आजमाया लेकिन असफलता मिलने पर उन्होंने सियासी पारी में प्रवेश किया। साल 2010 से लेकर 2011 के बीच चिराग ने हिंदी सिनेमा में बतौर अभिनेता काम भी किया है। उन्होंने उस दौरान मिले न मिले हम, वन एंड ओनली जैसी फिल्मों में अभिनय किया था। हालांकि माना जाता है कि उन्हें फिल्मी करियर में वो मुकाम और पहचान न मिल सका जो वो पाना चाहते थे। इस कारण उन्होंने अपने पुश्तैनी पेशे में वापसी करना ही ठीक समझा और वो राजनीति में प्रवेश कर गए। 

पिता के जाने के बाद चाचा के साथ हुआ विवाद
साल 2020 में पिता रामविलास का निधन हो गया। चाचा पशुपति कुमार पारस के साथ चल रहे मतभेद घर की चौहद्दी से निकलकर बाहर आ गए। यह विवाद तब उग्र हो गया जब पशुपति ने चिराग पासवान की जगह खुद को लोकसभा नेता के रूप में घोषित कर दिया।  
 

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