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जब इंदिरा गांधी हार गईं तब भी जीते थे ‘बाबूजी’

जब वर्ष 1977 में आपातकाल के बाद जगजीवन बाबू ने इंदिरा गांधी से नाता तोड़ा था, तब भी सासाराम संसदीय क्षेत्र के लोग ‘बाबूजी’ के पक्ष में मजबूती से खड़े थे। उस चुनाव में इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी चुनाव हार गए थे। लेकिन, जगजीवन बाबू ने जीत दर्ज करायी। तब यह चर्चा थी कि बाबूजी पीएम पद के दावेदार थे, किंतु उनपर मोरारजी देसाई भारी पड़ गए थे। इस सीट पर 1952-1984 तक के लोस चुनाव में जगजीवन बाबू का कब्जा रहा। सर्वाधिक वोट पाने का रिकार्ड भी इन्हीं का है। वर्ष 1977 में 78.5%वोट के बूते कांग्रेस के मुंगेरी लाल को 58.4 % मतों के अंतर से हराया।

जब दिल्लीवालों की उम्मीद पर फिरा था पानी
अभी सासाराम को भाजपा के छेदी पासवान प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सासाराम में एक किवंदती प्रचलित है कि मीरा को छेदी ही जोरदार टक्कर दे सकते हैं। जगजीवन बाबू के निधन के बाद जब 1989 में कांग्रेस ने मीरा को टिकट दिया था तब दिल्ली वालों ने उम्मीद जतायी थी सासाराम में जगजीवन युग बरकरार रहेगा। लेकिन, छेदी ने मीरा को हराकर उनकी उम्मीद पर पानी फेर दिया था। 

दो जिलों को जोड़ता है सासाराम संसदीय क्षेत्र
सासाराम संसदीय क्षेत्र में मोहनियां, भभुआ, चैनपुर सीट पर भाजपा और चेनारी में रालोसपा, सासाराम में राजद व करगहर विधानसभा सीट पर जदयू का कब्जा है। इससे चुनाव में किस प्रत्याशी को कितना लाभ मिलेगा यह तो तब पता चलेगा जब प्रत्याशी चुनाव मैदान में होंगे। 

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  • Web Title:When Indira Gandhi was defeated Babu Jagjivan Ram had won in Bihar