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बिहार

आप भी जानें संसद में बजट पेश किए जाने के बाद क्या होता है?

पटना हिन्दुस्तान टीमPublished By: Malay
Fri, 05 Jul 2019 09:10 AM
आप भी जानें संसद में बजट पेश किए जाने के बाद क्या होता है?

बजट भाषण के पढ़े जाने के बाद बजट उपायों पर एक आम चर्चा होती है। बहस में हिस्सा लेने वाले सदस्य बजट के प्रस्तावों और नीतियों पर चर्चा करते हैं। इस आम चर्चा के बाद संसद आमतौर पर करीब तीन हफ्तों की छुट्टी पर चली जाती है। इस दौरान विभागों की स्थायी समितियां मंत्रालयों के अनुमानित खर्चों का विस्तार से अध्ययन करती हैं, इन्हें डिमांड्स फॉर ग्रांट्स (अनुदान मांग) कहा जाता है। समितियां इसके बाद हरेक मंत्रालय की डिमांड्स फॉर ग्रांट्स पर अपनी रिपोर्ट जमा करती हैं। समितियों के रिपोर्ट जमा कर देने के बाद इन अलग—अलग मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर लोकसभा में चर्चा और वोटिंग होती है। बजट पास होने की अंतिम तारीख तक जिन डिमांड्स पर वोटिंग नहीं हो पाती है उन सभी पर एकसाथ वोटिंग हो जाती है।

काफी समय तक बजट की छपाई होती रही राष्ट्रपति भवन में, 1950 में लीक हुए थे पेपर
भारत में बजट की शुरुआत अंग्रेजों ने की थी। जेम्स विल्सन को भारत में बजट का जनक माना जाता है। जेम्स विल्सन ने 18 फरवरी 1860 को पहला बजट पेश किया था। आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत का पहला केंद्रीय बजट 26 नवंबर 1947 को भूतपूर्व वित्त मंत्री आरके शणमुखम चेट्टी की तरफ से पेश किया गया था।

संविधान लागू होने के बाद 28 फरवरी 1950 को पहला बजट जॉन मथाई ने पेश किया था। लंबे वक्त तक बजट की छपाई राष्ट्रपति भवन में होती थी. लेकिन 1950 में इसके पेपर लीक हो गए थे, जिसके बाद दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में बजट के पेपर छापे जाने लगे थे। 1980 में इसे मिंटो रोड से शिफ्ट करके नॉर्थ ब्लॉक ले जाया गया। हर साल बजट पेश करने से पहले हलवा सेरेमनी की रस्म मनाई जाती है। इसके पीछे मान्यता रही है कि हर शुभ काम को करने से पहले कुछ मीठा खाना चाहिए, साथ ही भारतीय परंपरा में हलवे को काफी शुभ भी माना जाता है। 

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