ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News बिहारटनल से बाहर निकलते ही भाई से लिपटा सोनू, बिहार में इंतजार कर रही मां की भी आंखें भर आईं

टनल से बाहर निकलते ही भाई से लिपटा सोनू, बिहार में इंतजार कर रही मां की भी आंखें भर आईं

उत्तराखंड की टनल में फंसे सोनू 17 दिनों बाद जब बाहर निकले तो अपने भाई से लिपट गए। सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार के छपरा में बैठी मां ने जब बेटे के सुरक्षित लौटने की खबर सुनी तो वो भी भावुक हो गईं।

टनल से बाहर निकलते ही भाई से लिपटा सोनू, बिहार में इंतजार कर रही मां की भी आंखें भर आईं
Jayesh Jetawatहिन्दुस्तान,छपराTue, 28 Nov 2023 10:54 PM
ऐप पर पढ़ें

उत्तराखंड की उत्तरकाशी टनल में फंसे 41 मजदूर मंगलवार रात जैसे ही बाहर आए देशभर में भी खुशी का माहौल छा गया। इस टनल में बिहार के सारण जिले का रहना वाला सोनू भी 17 दिनों तक फंसा रहा। रसूलपुर थाना क्षेत्र की देवपुरा पंचायत के खजुहान गांव का सोनू साह मंगलवार की देर शाम जब सुरंग से बाहर निकला तो वहां 16 दिनों से इंतजार कर रहे अपने छोटे भाई को देख गले मिला और भावुक हो गया। उसके बाहर निकलने की खबर गांव पहुंची तो परिजनों की आंखें खुशी से भर आईं और जान में जान आई। चार-चार बार बात होने के बावजूद सोनू की आंगनबाड़ी सेविका मां शिवमुखी देवी ने कहा कि बेटे को जब तक आंखों से देख नहीं लेती तब तक चैन नहीं आएगा।
 
दिवाली के दिन घटना की सूचना मिलते ही घटना स्थल पर गुड़गांव दिल्ली से पहुंचा पेशे से क्वालिटी इंजीनियर सोनू का छोटा भाई सुधांशु साह पल-पल की खबर देकर परिवार को ढाढ़स बंधा रहा था। घटना स्थल से ही भाई को बाहर निकलने का इंतजार कर रहे सुधांशु ने बताया कि उतराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व उनके एक कैबिनेट मंत्री बीके सिंह पीड़ितों से मिले और हर संभव मदद की बात कही।

सुरंग में जीत गई जिंदगी, 400 घंटे बाद मौत के मुंह से निकले 41 मजदूर

छठ में घर आने वाला था सोनू 
सुधांशु ने बताया कि उसका बड़ा भाई नवयुग कंस्ट्रक्शन कंपनी में पिछले करीब 10 सालों से इलेक्ट्रीशियन का काम करता है। उत्तरकाशी में बन रही साढ़े चार किमी लंबी सुरंग निर्माण में वह चार साल से काम कर रहा है। घटना के दिन नाइट ड्यूटी कर सुबह पांच बजे अपने साथियों के साथ वह कैंप में लौट रहा था कि सुरंग धंस गई। सुधांशु के अनुसार दूसरे-तीसरे दिन से ही सरकार, प्रशासन और कंपनी ने वायरलेस से पीड़ितों से बात करानी शुरू की। सुधांशु ने बताया कि सोनू भैया और वे दोनों छठ में जाने की योजना बनाए थे पर हादसे की वजह से नहीं पहुंच सके। छठ मैया की कृपा से भाई सुरक्षित है। 

गांव पर प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने नहीं ली खोज-खबर 
घटना से दुखित पीड़ित परिजनों ने कहा कि घटना के दिन से  ठीक से भोजन तक वे सब नहीं कर पा रहे थे। पूरा मुहल्ला मर्माहत था पर प्रशासन अथवा किसी जनप्रतिनिधि ने उनके परिवार की सुधि तक नहीं ली। दंपती सवलिया साह व शिवमुखी देवी कहते हैं कि मर्माहत सोनू की पत्नी, उसकी सात वर्षीय बेटी और सारे परिवार को लेकर 17 दिन कैसे कटा, यह वे सब ही जानते हैं।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें