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उपेंद्र कुशवाहा बोले- विरोधी आग में घी डालने के लिए बैठा है, बीजेपी और जेडीयू को दी ये सलाह

आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को बीजेपी, जेडीयू के नेताओं को सलाह दी है कि वे लोकसभा चुनाव में हार की समीक्षा करें, लेकिन उसकी बातें सार्वजनिक मंचों पर न आने दें।

उपेंद्र कुशवाहा बोले- विरोधी आग में घी डालने के लिए बैठा है, बीजेपी और जेडीयू को दी ये सलाह
Jayesh Jetawatलाइव हिन्दुस्तान,पटनाThu, 13 Jun 2024 03:17 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 में बिहार की काराकाट सीट से हार का सामना करने वाले राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा ने बीजेपी, जेडीयू और एनडीए की अन्य सहयोगी पार्टियों को सलाह दी है। कुशवाहा ने कहा कि विरोधी आग में घी डालने के लिए बैठा है। चुनाव परिणाम की समीक्षा जरूरी है लेकिन उसकी बातें सार्वजनिक मंचों पर न आए तो बेहतर है। क्योंकि इससे आपस में कटुता बन या बढ़ सकती है। 

उपेंद्र कुशवाहा ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए कहा एनडीए की सभी पार्टियों से ऐसी बातें सार्वजनिक मंचों पर न लाने की अपील की। कुशवाहा ने कहा कि ऐसी खबरें एनडीए के दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति को जन्म दे सकती है। चुनाव परिणाम की समीक्षा जरूरी है। मगर यह एनडीए का आंतरिक मामला है। इसका मकसद हमारी कमिया ढूंढकर मिलजुल कुर उसको दूर करना है। ताकि आगामी विधानसभा चुनाव की फुलप्रूफ रणनीति बनाई जा सके।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच पर चर्चा हमारे मूल मकसद को ध्वस्त कर सकती है। इसलिए हम सबको गंभीर होकर अर्जुन की तरह बिहार को फिर से 2005 के पहले वाली स्थिति में ले जाने से रोकने के लिए पुनः एनडीए सरकार की स्थापना के अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

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बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए को 40 में से 30 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इनमें अधिकतर सीटें मगध और शाहाबाद क्षेत्र की है। इसमें काराकाट सीट भी शामिल है जहां से उपेंद्र कुशवाहा लड़े थे। काराकाट में बीजेपी के बागी पवन सिंह के आने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था और कुशवाहा को हार का सामना करना पड़़ा। यहां सीपीआई माले के राजाराम सिंह कुशवाहा जीते। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक एनडीए की समीक्षा में यह बात सामने आई है कि काराकाट में पवन सिंह के आने से जनता के बीच गलत धारणा बनी। इससे कुशवाहा समाज एकजुट होकर एनडीए के खिलाफ हो गया और महागठबंधन को इसका फायदा मिला। इस वजह से काराकाट ही नहीं बल्कि आसपास की अन्य सीटों पर भी एनडीए को हार का सामना करना पड़ा।