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धमाका हुआ और टनल ब्लॉक, 12 दिनों बाद मां से बात हुई तो...; सिलक्यारा के श्रमवीर दीपक ने सुनाई आपबीती

12 नवंबर को सुबह 8 बजे हमारा शिफ्ट खत्म होता और हम बाहर निकलते। लेकिन उसके पहले हीं अहले सुबह करीब 4 बजे अचानक से टनल में जोरदार आवाज हुआ और टनल ब्लॉक हो गया। वर्कर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

धमाका हुआ और टनल ब्लॉक, 12 दिनों बाद मां से बात हुई तो...; सिलक्यारा के श्रमवीर दीपक ने सुनाई आपबीती
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,मुजफ्फरपुरSat, 02 Dec 2023 12:45 AM
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित सिलक्यारा टनल हादसे में फंसे सरैया प्रखंड के गिजास निवासी दीपक कुमार शुक्रवार को अपने घर पहुंचे। गांव में दीपक का फूलमाला पहना कर और पटाखे फोड़ कर शानदार तरीके से स्वागत किया गया। दीपक की अगवानी के लिए विधायक अशोक कुमार सिंह, जिला पार्षद पति शंकर चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि तैयार थे। दीपक के आते हीं सभी ने माला पहना कर दीपक को बधाई दिया। घर पहुंचते हीं मां उषा देवी व पिता शत्रुघ्न पटेल ने दीपक को गले से लगा लिया। दोनों की आंखों से खुशी के आंसू निकल गए। उसके बाद दीपक ने अपने माता, पिता को और पिता ने दीपक को मिठाई खिलाकर खुशियां बांटी।

बाबा बौखनाग की कृपा से सभी मजदूर सकुशल बाहर निकले

दीपक ने टनल में फंसे होने की पूरी आपबीती सुनाई। दीपक ने बताया कि 11 नवंबर की रात नाइट शिफ्ट में काम के लिए हमलोग टनल के अंदर गए थे। 12 को दीपावली की छुट्टी थी। 12 नवंबर को सुबह 8 बजे हमारा शिफ्ट खत्म होता और हम बाहर निकलते। लेकिन उसके पहले हीं अहले सुबह करीब 4 बजे अचानक से टनल में जोरदार आवाज हुआ और टनल ब्लॉक हो गया। सारे वर्कर को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। दो दिनों तक हमलोग भूख के साथ बाहर निकलने की चिंता से परेशान थे। दो दिन बाद जब पाइप के सहारे बाहर के लोगों से हमारी बात हुई तब जाकर उम्मीद की एक किरण नजर आयी। 10 दिन तक सिर्फ मुढ़ी खाने के लिए पाइप से भेजा जाता रहा। उसके बाद 6 इंच के पाइप से फल, ड्राई फ्रूट्स व खाना मिलने लगा था। और बाहर के लोगों से बात होने लगी।

हमने हिम्मत नहीं हारी

समय काटने के लिए अंदर में हीं हमलोग चोर सिपाही खेल लिया करते थे। अंदर में अंडरग्राउंड बिछाई गई केबल के कारण बिजली थी, जिसके कारण अंधेरा कभी नहीं हुआ। कुछ साथियों के पास मोबाइल था, लेकिन नेटवर्क गायब हो गया था और मोबाइल सिर्फ समय और डेट देखने के काम आता था। रेस्क्यू टीम के प्रयास से 12 दिन बाद माँ, पिताजी से बात हुई थी। उम्मीद जगी थी कि अब जल्द बाहर निकल जाएंगे। लेकिन जैसे जैसे मशीन ने काम करना बंद किया हमारी चिंताएं बढ़ते जा रही थी। हालांकि जिस तत्परता के साथ काम हो रहा था, उसे देख के हमने हिम्मत नहीं हारी और अंततोगत्वा पूरे देश के लोगों की दुआएं व बाबा बोखनाग की कृपा से हमसभी वर्कर सकुशल बाहर लौट गए। बाहर निकलने के बाद सभी वर्करों ने बाबा बौखनाग का जयकारा लगाया उसके बाद अस्पताल चले गए।

काम पर जाते व आते समय सभी वर्कर करते हैं पूजा

दीपक ने बताया कि टनल निर्माण शुरू होने के बाद कई प्रोजेक्ट मैनेजर आये और गए, लेकिन किसी ने बाबा बौखनाग का मंदिर तोड़वाने की हिम्मत नहीं जुताई। एक प्रोजेक्ट मैनेजर ने काम में रुकावट आते देख मंदिर को तोड़वा दिया था और टनल के बाहर एक छोटा मंदिर बनवा दिया था। उसके बाद से तीन बार और टनल के पास हादसा हुआ था, लेकिन बाबा बौखनाग की कृपा से कभी भी किसी मजदूर को खरोच तक नहीं आया था और सभी सकुशल रहे थे। जिसके कारण मजदूरों में भी बाबा के प्रति आस्था बढ़ते चला गया। सभी वर्कर काम पर जाने से पहले और काम से लौटने के बाद बाबा बोखनाग का आशीर्वाद लेते थे। बाबा बौखनाग की कृपा से हीं हमलोग सकुशल बाहर निकल पाए। मजदूरों के बाहर निकलने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बाबा बौखनाग मंदिर का भव्य निर्माण कराए जाने की घोषणा किया था।

दीपक के पिता ने पीएम व सीएम को दिया धन्यवाद

दीपक के पिता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व सीएम पुष्कर सिंह धामी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि बेटा को बाहर निकालने के लिए पीएम व सीएम ने जो काम किया उसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूं।

दीपक ने नहीं हारा हिम्मत, फिर जाएगा काम पर

दीपक से जब विधायक अशोक कुमार सिंह ने पूछा कि सभी बंदे सकुशल बाहर निकल गए। आपलोग घर भी आ गए, अब फिर से काम पर जाना चाहेंगे। तब दीपक ने बिना घबराए मुस्कुराते हुए कहा कि जरूर जाएंगे। काम करने के दौरान ऐसी घटनाएं होते रहती है। इससे हमलोग हिम्मत नहीं हारेंगे और काम पर फिर से लौटेंगे।

बिहार सरकार ने मजदूरों को अपने खर्च पर घर लाया

ऑब्जर्वेशन पूरा होने के बाद मजदूरों को दिल्ली लाया गया। वहां से दीपक सहित उनके चाचा व मामा के फ्लाइट का टिकट बिहार सरकार के द्वारा कराया गया था। जिसके माध्यम से दीपक, उसके चाचा व मामा सहित बिहार के सभी 5 मजदूर व उनके परिजन दिल्ली से पटना लाये गए। पटना एयरपोर्ट पर सभी मजदूरों का स्वागत किया गया। उसके बाद 5 अलग अलग गाड़ियों से सभी को घर भेजा गया। दीपक को पटना से लेकर आने वाले श्रम विभाग के अधिकारी ने गाड़ी में दीपक के साथ उसके घर तक आये। उसके बाद वापस लौट गए।

दीपक के स्वागत के लिए तैयार थे ग्रामीण

जैसे हीं लोगों को सूचना मिली कि दीपक पटना से घर के लिए चल पड़ा है, दीपक के घर पर लोगों का जमावड़ा होने लगा। जैसे हीं दीपक की गाड़ी मुहल्ले में पहुंची, लोगों ने गाड़ी को घेर लिया। गाड़ी से निकलते हीं दीपक का स्वागत किया गया और सभी दीपक को लेकर घर तक पहुंचे। मौके पर विधायक अशोक कुमार सिंह, जिला पार्षद पति शंकर चौधरी, मुखिया राकेश मालाकार, सरपंच दिनेश, पूर्व मुखिया शिवजी राय, किशोर कुणाल, स्थानीय वार्ड सदस्य मो. हन्नान, राजेश मालाकार, राकेश यादव, विनय यादव, अभय कुमार सहित दर्जनों लोगों ने दीपक को फूलमाला पहना कर स्वागत किया।

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