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टोक्यो ओलंपिक में बिहार के विवेक भी दिखा रहे हॉकी में अपना जौहर,बधाई देने वालों का लगा तांता

सीवान फिरोज हैदरPublished By: Malay Ojha
Tue, 03 Aug 2021 03:56 PM
टोक्यो ओलंपिक में बिहार के विवेक भी दिखा रहे हॉकी में अपना जौहर,बधाई देने वालों का लगा तांता

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के 49 साल बाद टोक्यो ओलंपिक में सेमीफाइनल मैच खेलने को लेकर सभी उत्साहित हैं। लेकिन बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि इस टीम में सीवान जिले का भी एक खिलाड़ी शामिल है। जी हां, मिड फिल्डर विवेक सागर जिले के रघुनाथपुर प्रखंड के कन्हौली निवासी रोहित प्रसाद के पुत्र हैं। हालांकि, विवेक सागर का परिवार मध्यप्रदेश के इटारसी के हुसैनाबाद में रहता है और वह उसी राज्य की ओर से खेलते भी हैं। भले ही विवेक दूसरे राज्य से खेलते हैं लेकिन अपने पैतृक गांव से उनका गहरा नाता है। 

पड़ोसी धनंजय बताते हैं कि करीब सात-आठ साल पहले विवेक अपने पैतृक गांव आए थे। उस समय उनपर खेल का दबाव ज्यादा नहीं था लेकिन जब से अंडर 19 में सेलेक्शन हुआ तब से वे गांव नहीं आ सके हैं। समयाभाव में भले ही विवेक का गांव आना जाना कम हो गया है लेकिन उनके माता-पिता का जुड़़ाव आज भी गांव से उतना ही है जितना पहले था।  हॉकी  इधर विवेक सागर को भी बधाई देने वालों का तांता लगा है। 

पिता रोहित प्रसाद मध्य प्रदेश में शिक्षक

विवेक के पिता रोहित प्रसाद पहली बार अपने भाई के पास मध्यप्रदेश गए थे। उनके बड़े भाई श्रीराम प्रसाद मध्य प्रदेश में ही नौकरी करते थे। बाद में रोहित ने भी मध्य प्रदेश में सरकारी शिक्षक की नौकरी ले ली। समय बीतने के साथ रोहित का परिवार भी मध्य प्रदेश में रहने लगा। बच्चों की पढ़ाई को लेकर सभी का स्कूलों में दाखिला करा दिया गया।  

पारिवारिक पृष्ठभूमि खेल से नहीं है जुड़ी

विवेक सागर की पारिवारिक पृष्ठभूमि खेल से जुड़ी नहीं है। स्कूली खेलों व अपने मेहनत की बदौलत विवेक ने यह मुकाम हासिल किया है। शिक्षक पिता को कभी खेल के प्रति इतनी रुचि नहीं थी कि अपने बच्चों को खेल अकादमी में भेजें। तमाम बाधाओं के बावजूद भी विवेक ने हिम्मत नहीं हारी और स्कूली गेम में एक के बाद एक बेहतर प्रदर्शन करते गए।

विवेक की प्रारंभिक पढ़ाई मध्यप्रदेश में ही हुई

ग्रामीण बताते हैं कि रोहित प्रसाद की कुल चार संतानें हैं। जिनमें विवेक सागर सबसे छोटा है। 25 फरवरी सन 2000 में विवेक सागर का रघुनाथपुर के कन्हौली गांव में ही जन्म हुआ था। हालांकि जन्म के कुछ वर्ष बाद उनका परिवार मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो गया। यहीं कारण है कि विवेक की प्रारंभिक पढ़ाई व खेलों के लिए बेहतर परिवेश मध्यप्रदेश में ही मिला है।

 

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