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हिंदी न्यूज़ बिहारVIDEO- पटना में हजारों साल पुरानी शास्त्रार्थ की परंपरा हुई साकार

VIDEO- पटना में हजारों साल पुरानी शास्त्रार्थ की परंपरा हुई साकार

पटना हिन्दुस्तान टीमMalay
Sun, 07 Jul 2019 08:26 PM
VIDEO- पटना में हजारों साल पुरानी शास्त्रार्थ की परंपरा हुई साकार

भारत की हजारों साल पुरानी शास्त्रार्थ की परंपरा रविवार को एक बार फिर से साकार हुई। यहां राजभवन के राजेन्द्र मंडप के मंच पर दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों ने शास्त्रार्थ की महता और उसका पौराणिक स्वरूप देख। ऐसा लगा मानो वे अपनी विरासत और संस्कृति से जुड़ी ज्ञान और तर्क के सहारे एक-दूसरे के विचारों को काटने की इस अदुभुत शैली को अपने अंतस में उतारते रहे। 

राज्यपाल लालजी टंडन के दीप प्रज्ज्वल के साथ ही संस्कृत के गूढ़ श्लोकों के सहारे मिथिला, काशी और दक्षिण भारत से विद्वानों की एक-एक जोड़ी ने अपने यहां की शास्त्रार्थ की परंपरा को मंचस्थ किया। विषय प्रवेश हिन्दी में कराया गया ताकि हर क्षेत्र के शास्त्रार्थ का आशय मौजूद जनसमूह तक साफ हो जाए। 

राज्यपाल ने कहा कि भारत के पास इतनी अमूल्य संपदाएं हैं कि हमें उसका भान भी नहीं। आज हम न संस्कृति का अर्थ जानते हैं न संस्कृत का। हमारा सांस्कृतिक वटवृक्ष कटता, छंटता जा रहा है। अब उसकी जड़ें भी नष्ट होने वाली हैं। 

राज्यपाल ने कहा, पुराने भारत से सीखे बगैर कोई नवनिर्माण हो सकता। हम उस संस्कृति के वारिस हैं जिसमें ‘मुंडे-मुंडे मतिर भिन्ना’ रहा है। विचारों में मतभेद ही हमारी खूबी है। दुनिया को मर्यादा, अध्यात्म, विचार और सहिष्णुता भारत की देन है। 

उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि भारत में शास्त्रार्थ की हजारों साल पुरानी परंपरा है। इस देश में नास्तिक भी हैं, आस्तिक भी। सभी तरह के विचार, परंपरा को फलने-फूलने का मौका मिला है। हमारा देश, हमारी संस्कृति इसलिए जीवंत हैं कि हमने विचारों को परिस्कृत किया है, आधुनिक तत्वों का उसमें समावेश किया है। कहा कि शंकराचार्य जब मंडल मिश्र का घर खोजने आए तो महिलाओं ने उन्हें बताया कि जिस दरवाजे तोता भी शास्त्रार्थ करते हों, वहीं मंडन मिश्र का घर है। 

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम के विचारधारा में कभी तर्क, प्रमाण, युक्ति की गुंजाइश नहीं रही। गैलिलियो ने प्रतिपादित किया कि सूर्य केन्द्र में है और पृथ्वी उसका चक्कर लगाती है। यह स्थापित परंपरा के उलट थी। फलत: गैलियो को फांसी पर लटका दिया गया। 

अतिथियों का स्वागत करते हुए कामेश्वर सिंह संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. सर्वनारायण झा ने कहा कि याज्ञवल्क और गार्गी तथा शंकराचार्य - मंडन मिश्र तथा शंकराचार्य - भारती के बीच का शास्त्रार्थ इस विधा का उत्कर्ष है। विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुण रसीद, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक कुमार सिंह, एमएलसी दिलीप चौधरी समेत कई विवि के वीसी, प्रोवीसी व राज्यभर के संस्कृत के विद्वान मौजूद रहे।

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