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जातीय गणना रिपोर्ट का यह आंकड़ा चौका देगा, बिहार में 95.5 फीसदी जनता के पास नहीं है कोई सवारी

बिहार में आज भी 95.49 फीसदी लोगों के पास कोई गाड़ी नहीं है। ऐसे लोग कहीं आने जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या लोगों की मदद पर आधारित रहते हैं। अक्सर इन्हें पैदल ही यात्रा करनी पड़ती है।

जातीय गणना रिपोर्ट का यह आंकड़ा चौका देगा, बिहार में 95.5 फीसदी जनता के पास नहीं  है कोई सवारी
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,पटनाTue, 07 Nov 2023 03:14 PM
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बिहार में जाति आधारित सर्वे में संकलित आर्थिक शैक्षणिक रिपोर्ट नीतीश तेजस्वी सरकार ने जारी कर दिया है। मंगलवार को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में इसे बहस के लिए पेश किया गया। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधानसभा में इसे पेश किया और इसकी प्रतियां सदस्यों के बीच बांट दी गई। जनता को पता चल गया है कि राज्य में किस जाति के कितने लोग रहते हैं और उनकी माली हालत कैसी है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि किस जाति के लोग कितान पढ़े लिखे है. पूरे माहभर में उनकी कितनी कमाई होती है और अपने जीवन को आसान और सुखी बनाने के लिए किन किन साधनों का उपयोग करते हैं।

मनोरंजन के साधन और मोबाइल के मामले में स्थिति सामान्य है पर, आर्थिक सर्वे का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा वाहनों को लेकर है। बिहार में आज भी 95.49 फीसदी लोगों के पास कोई गाड़ी नहीं है। ऐसे लोग कहीं आने जाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट या लोगों की मदद पर आधारित रहते हैं। कई बार इन्हें पैदल ही यात्रा करनी पड़ती है। मंगलवार को सरकार द्वारा पेश आंकड़ों के मुताबिक बिहार में गाड़ी रखने का ब्योरा इस प्रकार है। 

दो पहिया वाहन 3.80 फीसदी लोगो के पास ही है।

तीन पहिया वाहन 0.11 लोगो के पास है।

ट्रैक्टर 0.13 फीसदी लोगो के पास जिनसे प्रमुख रूप से खेती होती है।

छह पहिया या  उसे अधिक वाहन भारी गाड़ियां  सिर्फ 0.03 फीसदी लोगो के पास हैं।

95.49 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनके पास कोई गाड़ी नहीं।

इसका कारण है गरीबी। सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक आज  बिहार की एक तिहाई से ज्यादा आबादी गरीब है। लगभग 34 प्रतिशत परिवार ऐसे  हैं जिनकी मासिक आमदनी मात्र छह हजार रुपए हैं। इसमें एससी एसटी से लेकर सवर्ण समाज के परिवार भी शामिल हैं। 6 हजार से 10 हजार के बीच कमाने वालों की संख्या भी बहुत कम है।

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