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देश भर में छाया बिहार के भागलपुरी शॉल का क्रेज, कीमत और खासियत दिल में उतर जाएगी

नाथनगर के बुनकर रागीब अंसारी का कहना है कि दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद आदि महानगरों में भागलपुरी शॉल की मांग खूब है। वहां से ऑडर मिला है। शॉल एक सप्ताह में भेजना है।

देश भर में छाया बिहार के भागलपुरी शॉल का क्रेज, कीमत और खासियत दिल में उतर जाएगी
Sudhir Kumarहिंदुस्तान,भागलपुरSun, 10 Dec 2023 12:25 PM
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बिहार के भागलपुरी शॉल और स्टॉल की खूबसूरती से देश के कई राज्यों के परिधान निखर रहे हैं। सर्दी बढ़ते ही दक्षिण और पश्चिम राज्यों से शॉल, दुपट्टा और  स्टॉल के बड़े पैमाने पर ऑडर आए हैं। इस कारण यहां के एक हजार से अधिक बुनकरों को जनवरी माह तक काम मिल गया है। मधुबनी पेंटिंग इनमें चार चांद लगा रहा है।

नाथनगर के बुनकर रागीब अंसारी का कहना है कि दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई, अहमदाबाद आदि महानगरों में भागलपुरी शॉल की मांग खूब है। वहां से ऑडर मिला है। शॉल तैयार कर एक सप्ताह के अंदर भेजना है। उन्होंने बताया कि यहां का शॉल काफी मुलायम होता है और शरीर में चिपक जाता है। इस कारण ओढ़ने के बाद इसकी खूबसूरती काफी बढ़ जाती है। जबकि दूसरे शॉल शरीर में चिपकता नहीं है।

कारोबारी बताते हैं कि अभी जनवरी माह तक शॉल बिकेगा। शॉल की कीमत एक हजार रुपये से दो हजार रुपये है। अगर उनमें मंजूषा उकेरी जाती है तो इसकी कीमत बढ़ जाती है। ऐसे में एक शॉल की  कीमत 1800 से 3000 रुपये हो जाती है। लोग इसे पसंद करते हैं और खरीदते हैं।

तसर में तैयार हो रहा स्टॉल और दुपट्टा 

सिल्क व्यवसायी अलीम अंसारी ने बताया कि भागलपुर में स्टॉल व दुपट्टा तसर में तैयार हो रहा है। इसमें मंजूषा प्रिंट उकेरी जा रही है। इस कारण दुपट्टा देश-विदेश में रह रहे लोगों को काफी आकर्षित कर रहा है। महानगरों से बड़े पैमाने पर ऑडर मिला है। दुपट्टा व चादर सिल्क में तैयार हो रहा है। इसमें मंजूषा कलाकारों की मदद ली जा रही है। स्टॅाल की कीमत 300 से 700 तो दुपट्टा की कीमत 400 से एक हजार रुपये है।

मधुबनी पेंटिंग वाली दुपट्टे की मांग बढ़ी

लोदीपुर के बुनकर भोला प्रसाद ने बताया कि हाल में मधुबनी पेंटिंग वाली दुपट्टे की मांग खूब बढ़ी है। यह खूबसरत दिखने के साथ आरामदायक होता है। इसीलिए दुपट्टे के साथ यहां चादर में भी मधुबनी पेंटिंग तैयार कराई जा रही है। चादर 1800 से 2000 तो दुपट्टा 1500 से 2000 तक बिक रहा है। उन्होंने बताया कि भागलपुरी शॉल व दुपट्टा में जो मधुबनी पेंटिंग उकेरी जा रही है।

उचित ट्रेनिंग मिले तो घट जायेगी कीमत

अलीम अंसारी ने बताया कि भागलपुर में मधुबनी पेंटिंग के कलाकारों की संख्या कम है। मधुबनी के कलाकारों पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है। यहां के कुछ बुनकर मधुबनी पेंटिंग की अलग से ट्रेनिंग लिये हैं। ये बुनकर स्थानीय तौर पर इसे तैयार करते हैं। यहां के व्यापारी साल में कम-से-कम दस करोड़ रुपये कलाकारों पर खर्च करते हैं। इस कारण कपड़ों की कीमत अधिक हो जाती है। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भागलपुर के कलाकारों को मधुबनी पेंटिंग की उचित ट्रेनिंग देने की मांग की है। अगर कपड़ा यहां तैयार होने लगे तो इसकी कीमत में 25 से 40 प्रतिशत तक कमी आयेगी।
 

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