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Hindi News बिहारचार सदनों के सदस्य बने चुनिंदा नेता थे सुशील मोदी; बस सीएम और केंद्र में मंत्री नहीं बन पाए 

चार सदनों के सदस्य बने चुनिंदा नेता थे सुशील मोदी; बस सीएम और केंद्र में मंत्री नहीं बन पाए 

बिहार की मौजूदा राजनीति, शासन-प्रशासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाने वाले सुशील मोदी के दो सपने अधूरे रह गए। नीतीश सरकार में सुशील मोदी तीन बार डिप्टी सीएम, लोकसभा सांसद भी रहे।

चार सदनों के सदस्य बने चुनिंदा नेता थे सुशील मोदी; बस सीएम और केंद्र में मंत्री नहीं बन पाए 
Dinesh Rathourलाइव हिन्दुस्तान,पटनाTue, 14 May 2024 12:54 AM
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बिहार की मौजूदा राजनीति, शासन-प्रशासन और अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाने वाले सुशील मोदी के दो सपने अधूरे रह गए। नीतीश सरकार में सुशील मोदी तीन बार डिप्टी सीएम, लोकसभा सांसद और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भी जिम्मेदारी संभाली। उनका राज्यसभा का टर्म अभी कुछ दिन पहले ही खत्म हुआ था लेकिन उनका मुख्यमंत्री बनने का सपना अधूर रह गया। वह कभी केंद्र सरकार में भी किसी पद नहीं पहुंच सके। सुशील मोदी ने 1990 में पटना केन्‍द्रीय विधान सभा क्षेत्र से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और 31,021 वोट प्राप्‍त कर 3,113 मतों के अंतर से जीते। वर्ष 1995 में इसी क्षेत्र से 64,134 मत प्राप्‍त कर 32,099 मतों के अंतर से जीते। वर्ष 2000 में इसी क्षेत्र से 85,832 मत प्राप्‍त कर 66,069 मतों के अंतर से जीते।

वे वर्ष 1996 से 2004 तक बिहार विधान सभा में प्रतिपेक्ष के नेता रहे। मोदी ने वर्ष 2004 में भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और तीन लाख 45 हजार मत प्राप्‍त किया और अपने प्रतद्विंदी को एक लाख 17 हजार मतों के अंतर से पराजित किया था। उन्होंने वर्ष 2005 में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनाने के लिए लोकसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दिया और बिहार विधान परिषद् का सदस्‍य निर्वाचित हुए। वे वर्ष 2012 में दूसरी बार बिहार विधान परिषद् का सदस्‍य चुने गए। वर्ष 1990 में उन्हें भाजपा बिहार विधानमंडल दल का मुख्य सचेतक बनाया गया। वर्ष 1996 से 2004 तक वह राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। 2000 में नीतीश कुमार सरकार में संसदीय कार्य मंत्री थे। उन्होंने झारखंड राज्य के गठन का समर्थन किया था। वर्ष 2005 में नीतीश कुमार की फिर से बनी सरकार में उन्हें उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। बिहार में 2010 के विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद वह फिर बिहार के उपमुख्यमंत्री बने। लेकिन बिहार का मुख्यमंत्री बनने का सपना उनका सपना ही रह गया। वह भी केंद्र में मंत्री भी नहीं बन सके। सुशील मोदी बिहार की राजनीति तक ही सीमित रह गए। 

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जदयू-राजूद की महागठबंधन सरकार के पतन में मोदी की थी अहम भूमिका

2017 में बिहार में जदयू-राजद की महागठबंधन सरकार के पतन में मोदी की अहम भूमिका मानी जाती है। उन्होंने कथित बेनामी संपत्तियों और अनियमित वित्तीय लेनदेन को लेकर चार महीने तक राजद प्रमुख लालू प्रसाद और उनके परिवार के खिलाफ लगातार हमला बोला था। वे लगभग 11 वर्षों तक नीतीश सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे और इस जोड़ी को बिहार के राजनीतिक हलकों में 'राम-लक्ष्मण' की जोड़ी के रूप में जाना जाता रहा। रामविलास पासवान के 08 दिसंबर 2020 को निधन के बाद खाली हुई सीट को भरने के लिए सुशील मोदी को बिहार से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया। वह देश के उन नेताओं में से एक थे जो राज्यसभा, लोकसभा, विधान परिषद, विधान सभा के सदस्य रहे। मोदी भारत में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने के प्रयासों के विरोधी थे। उन्होंने इस विचार के समर्थकों को वामपंथी-उदारवादी बताया, जो पश्चिम की नकल करना और भारतीय जनता पर ऐसे कानून थोपना चाहते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि भारत में समलैंगिक विवाह को वैध बनाने से देश में व्यक्तिगत कानूनों का नाजुक संतुलन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।