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Hindi News बिहारजाति गणना पर अमित शाह के बयान से विपक्ष को मिर्ची लगी, सुशील मोदी का नीतीश सरकार पर निशाना

जाति गणना पर अमित शाह के बयान से विपक्ष को मिर्ची लगी, सुशील मोदी का नीतीश सरकार पर निशाना

बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने कहा कि INDIA गठबंधन के नेताओं ने सोचा नहीं होगा कि अमित शाह जाति गणना के समर्थन में बयान देंगे। बिहार में जाति सर्वे का फैसला लेने वाली एनडीए सरकार थी।

जाति गणना पर अमित शाह के बयान से विपक्ष को मिर्ची लगी, सुशील मोदी का नीतीश सरकार पर निशाना
Jayesh Jetawatलाइव हिन्दुस्तान,पटनाSat, 04 Nov 2023 07:24 PM
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बिहार में जाति गणना पर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि बीजेपी जाति गणना के खिलाफ नहीं है। शाह के मुजफ्फरपुर दौरे से पहले यह बयान जोर पकड़ रहा है। वहीं, अब बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम एवं बीजेपी सांसद सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अमित शाह के बयान से विपक्ष को मिर्ची लगी है। 

सुशील मोदी ने शनिवार को कहा कि जातीय गणना का श्रेय लूटने में लगी आरजेडी और जेडीयू को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सकारात्मक वक्तव्य से तीखी मिर्ची लग रही है। वे बीजेपी की छवि बिगाड़ने के लिए केंद्र की प्रतिकूल टिप्पणी की उम्मीद कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बिहार में जातीय सर्वे कराने का निर्णय उस एनडीए सरकार का था, जिसमें बीजेपी के 14 मंत्री थे। उस समय आरजेडी सरकार में नहीं थी।

पंचायतवार जाति गणना रिपोर्ट जारी करने की मांग
राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने जातिगत गणना की पंचायतवार रिपोर्ट जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में नीतीश सरकार को जातीय सर्वे की पंचायत-वार रिपोर्ट जारी करनी चाहिए। साथ ही इस सर्वे के आधार पर तैयार होने वाले विकास मॉडल का प्रारूप सदन के पटल पर रखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नगर निकाय चुनाव में आरक्षण देने के लिए पिछले साल बिहार सरकार ने डेडीकेटेड अतिपिछड़ा आयोग गठित किया था। उसकी रिपोर्ट जारी नहीं हुई। वह रिपोर्ट भी विधान मंडल में प्रस्तुत की जानी चाहिए।

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सुशील मोदी ने आगे कहा कि लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार आज उस कांग्रेस के साथ हैं, जिसने कई दशकों तक केंद्र और राज्यों की सत्ता में रहने के बाद भी न जातीय जनगणना कराई, न पिछड़ों को आरक्षण दिया। कर्नाटक की सिद्धरमैया सरकार ने 2015 में जातीय सर्वे कराया था। आठ साल से दबी उस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए नीतीश कुमार क्यों नहीं राहुल गांधी से बात कर रहे हैं? तेलंगाना में केसीआर की सरकार ने भी जातीय सर्वे की रिपोर्ट जारी नहीं की।