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केके पाठक पर सुशील मोदी ने नीतीश को घेरा, कहा- बेलगाम ACS के मुंह में कानून; भर्ती पर भी उठाए सवाल

बीजेपी राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बीपीएससी परीक्षा के पूरक परिणाम पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि बीपीएससी और शिक्षा विभाग को 4,700 की जगह 40,000 पूरक रिजल्ट जारी करना चाहिए।

केके पाठक पर सुशील मोदी ने नीतीश को घेरा, कहा- बेलगाम ACS के मुंह में कानून; भर्ती पर भी उठाए सवाल
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,पटनाSat, 02 Dec 2023 09:56 AM
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शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की गतिविधियों से नाराज सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरा है। भाजपा नेता ने कहा है कि बेलगाम ACS   ने अराजकता फैला रखी है। और सरकार उन्हें समर्थन दे रही है।  सुशील मोदी ने कहा है कि नीतीश कुमार अब चुप्पी तोड़े वरना स्थिति कंट्रोल से बाहर हो जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बीपीएससी परीक्षा के पूरक परिणाम पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि बीपीएससी और शिक्षा विभाग को मिलकर 4,700 की जगह 40,000 पूरक परिणाम जारी करना चाहिए। इससे एक तरफ सरकार के संसाधनों की बचत होगी तो दूसरी और बेरोजगार लोगों को नौकरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि बीएससी के अगले चरण की परीक्षा तक बहुत सारे अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त हो जाएगी  जिन्हें पहले चरण के पूरक परिणाम से रोजगार मिल सकता है।  इसलिए 40,000 पूरक परिणाम जारी कर ज्यादा से ज्यादा बेरोजगारों को मौका दिया जाना चाहिए। नीतीश कुमार खुद इसमें पहल करके समाधान निकालें। 

सुशील मोदी ने बिहार में 1 लाख 22,000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण पर भी सवाल उठाया।उन्होंने कहा कि असल में मात्र 88,000 शिक्षकों ने योगदान दिया है और इनमें बिहार से मात्र 40,000 हैं। इसके अलावा 28,800 नियोजित शिक्षकों ने बीएपीएससी क्वालीफाई किया है। ये किसी दूसरी जगह योगदान करते हैं या नहीं करते हैं तो भी उनके पद खाली रह जाएंगे।  सरकार की योजना के अनुसार 41,000 पद अभी भी खाली रह जाएंगे।  जिन्हें पूरक रिजल्ट निकालकर भरा जाना चाहिए।

केके पाठक पर सुशील मोदी ने कहा कि अपर मुख्य सचिव के मुंह से निकले शब्द ही कानून बन जा रहे हैं। उनके द्वारा शिक्षकों को प्रताड़ित करने वाले तरह-तरह के नियम बनाए जा रहे हैं। नोटिस देकर परेशान किया जा रहा है। शिक्षकों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है लेकिन मुख्यमंत्री कुछ नहीं बोल रहे हैं। उन्हें अब चुप्पी तोड़ना चाहिए।
 

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