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ठंड में आवारा कुत्ते हुए आक्रामक; मुजफ्फरपुर में एक महीने में 12 हजार लोगों को काटा

मुजफ्फरपुर जिले में दिन बा दिन कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। एक महीने में आवारा कुत्तों ने 12 हजार लोगों को अपना निशाना बनाया। जिसमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं। वहीं अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी

 ठंड में आवारा कुत्ते हुए आक्रामक; मुजफ्फरपुर में एक महीने में 12 हजार लोगों को काटा
Sandeepवरीय संवाददाता,मुजफ्फरपुरMon, 01 Jan 2024 09:21 AM
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सड़क पर घूम रहे आवारा कुत्ते आक्रामक हो रहे हैं। पूरे दिसंबर माह में मुजफ्फरपुर में 12 हजार लोग कुत्तों के शिकार हुए हैं। सदर अस्पताल में ही लगभग दो हजार लोगों को एंटी रैबीज की सूई लग चुकी है। जिला पशुपालन पदाधिकारी सह पशु चिकित्सक डॉ. कुमार कांता प्रसाद ने बताया कि ठंड में सक्रियता कम होने से कुत्तों में हार्मोनल बदलाव होता है, जिसका असर दिमाग पर पड़ता है। इससे कुत्ते ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। इसके अलावा ठंड में कुत्तों का प्रजननकाल होने से वे बेचैन रहते हैं। इस कारण भी कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। 

कुत्तों के काटने के शिकार लोगों की लंबी लाइन अस्पतालों की इमरजेंसी में लग रही है। सिर्फ सदर अस्पताल में हर दिन 50 से 100 लोग एंटी रैबीज की सूई लेने आ रहे हैं। बीते मंगलवार को सदर अस्पताल में 85 लोग कुत्ता काटने की सूई लेने पहुंचे थे। सुबह से लेकर दोपहर दो बजे तक इमरजेंसी में एंटी रैबीज के लिए लंबी कतार लगी हुई थी। पिछले महीने नवंबर में पूरे जिले में 5500 लोगों को कुत्तों ने काटा था।

शहर से गांव तक बच्चे आवारा कुत्तों का शिकार हो रहे हैं। सदर अस्पताल के कर्मियों ने बताया कि एंटी रैबीज सूई लेने में 50 से अधिक छोटे बच्चे होते हैं। डॉ. कुमार कांता प्रसाद ने बताया कि गर्मी में कुत्ते इधर-उधर घूमते रहते हैं, जिससे उनकी सक्रियता बनी रहती है और वह इतने आक्रामक नहीं होते हैं। ठंड के मौसम में पालतू कुत्ते भी घर में ही रहते हैं, जिससे वह भी आक्रामक हो जाते हैं।

पिछले साल 28 अगस्त 2022 को मिठनपुरा के शिवशंकर पथ निवासी तीन साल की मासूम एंजल को मां के सामने ही आवारा कुत्तों ने उस समय नोंच-नोंच कर मार डाला था, जब वह बिस्कुट लेने दुकान जा रही थी। कई बार कुत्तों के हमले या खदेड़ने के कारण रात में सड़क हादसे भी हो रहे हैं। कुत्तों की नसबंदी का नगर निगम ने 11 महीने पहले निर्णय लिया, पर अब तक कुछ नहीं हो सका।

31 जनवरी 2023 को निगम बोर्ड की बैठक में इसको लेकर प्रस्ताव भी पास हो गया। बावजूद अब तक यह मामला फाइलों में ही है। नसबंदी को लेकर पहली बार टेंडर निकाला गया तो कोई एजेंसी सामने नहीं आई। इसके बाद दोबारा राष्ट्रीय स्तर पर टेंडर निकाला गया है।

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