सृजन घोटाला: जेल में बंद इंडियन बैंक के दोनों अफसरों ने घोटालेबाजों की दिल खोलकर की थी मदद, इस तरह सरकारी रुपये में लगाई थी सेंध
सृजन घोटाले में जेल गए इंडियन बैंक के दोनों अफसरों ने घोटालेबाजों की दिल खोलकर मदद की थी। सीबीआई ने दोनों की कस्टडी के साथ कोर्ट में दाखिल पूरक आरोपपत्र में घोटाले में उनकी भूमिका बताई है। हटिया...

इस खबर को सुनें
सृजन घोटाले में जेल गए इंडियन बैंक के दोनों अफसरों ने घोटालेबाजों की दिल खोलकर मदद की थी। सीबीआई ने दोनों की कस्टडी के साथ कोर्ट में दाखिल पूरक आरोपपत्र में घोटाले में उनकी भूमिका बताई है। हटिया (रांची) स्थित पटेल नगर मोहल्ले के वसुंधरा अपार्टमेंट के समीप रहने वाले इंडियन बैंक के अधिकारी दिनकर तिग्गा घोटाले की अवधि में भागलपुर में पदस्थ थे। तिग्गा भागलपुर ब्रांच में एक जनवरी 2007 से सात नवंबर 2009 तक पोस्टेड थे।
तिग्गा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने डीडीसी के खाते में रिवर्ट बैक से 37 एंट्री कर 8 करोड़ सृजन में डाले थे। उन्होंने मनरेगा के बचत खाते 730305570 में ओवर ड्राफ्ट की अनुमति देकर 27.26 करोड़ डीडीसी के खाते के भी सृजन के खाते में ट्रांसफर किया था। तिग्गा ने चेक नंबर 741776, 741777, 741793, 741799 से विभिन्न तारीखों में डीडीसी के चेक को बाउंस करने के बजाय घोटालेबाजों की मदद के लिए अनुमति दी थी।
सीबीआई ने जांच में पाया कि ये सभी चेक उस सीरीज के हैं, जो डीडीसी को बैंक से दिया ही नहीं गया था। बैंक के चेक बुक रजिस्टर में इस सीरियल नंबर वाले चेक को किसने रिसीव किया था, यह पता नहीं चल पाया। रजिस्टर पर चेकबुक रिसीव करने वाले का दस्तखत डीडीसी से मिलान नहीं हो सका। सीबीआई ने जांच में पाया कि तिग्गा का इस घोटाले में महत्वपूर्ण रोल रहा है।
डीआरडीए खाते की सेंधमारी में बैंकर एचके अदक का अहम रोल
सीबीआई ने हरेकृष्ण अदक के भी घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका का जिक्र किया है। अदक वेस्ट बंगाल के दीघा पूर्व मेदिनीपुर जिले के जाटीमाटी निवासी हैं। वे 2008 से 2011 तक भागलपुर में सहायक ब्रांच मैनेजर के रूप में पदस्थ थे। अदक ने डीआरडीए के निदेशक निरंजन कुमार झा के हस्ताक्षरित उन सभी 17 चेकों को सही माना, जिसके दस्तखत सिस्टम में लोड नहीं थे।
झा के दस्तखत सिस्टम में लोड नहीं थे फिर भी अदक ने बगैर सिस्टम की जांच किए ही निरंजन झा के दस्तखत को सही बता 34 करोड़ सृजन खाते में ट्रांसफर किया। जांच में पाया गया कि अदक ने 71 बार इन खातों में रिवर्ट बैक से 36.33 करोड़ भी दिए। पूरे प्रकरण में अदक की भूमिका परदे के पीछे वाली रही। सीएसएफएल की रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई कि अदक ने ही डिपॉजिट स्लिप भरे थे और डीडीसी फंड में सेंधमारी के लिए चेक का दुरुपयोग किया। अदक अब सेवानिवृत हो चुके हैं। उनके खिलाफ सीबीआई ने करीब आधे दर्जन मुकदमे में चार्जशीट की है।
