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फरवरी में जून जैसे हालात! बिहार की 24 से ज्यादा नदियों में पानी नहीं, 12 नदी पूरी तरह सूखीं, भारी जल संकट

बिहार की नदियों पर संकट मंडरा रहा है। जो हालात जून में होते थे वैसे फरवरी में बन गए हैं। सूबे की 24 नदियों में पानी नहीं है। जबकि 12 से ज्यादा नदियां पूरी तरह सूख गई है। जिससे पानी की किल्लत तय है

फरवरी में जून जैसे हालात! बिहार की 24 से ज्यादा नदियों में पानी नहीं, 12 नदी पूरी तरह सूखीं, भारी जल संकट
Sandeepहिन्दुस्तान टीम,पटनाTue, 06 Feb 2024 06:00 AM
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बिहार में माघ में ही नदी- तालाब सूखने लगे हैं। दो दर्जन से अधिक नदियां तो सूख भी गई हैं। गंगा में भी पानी कम हो गया है। ऐसी स्थिति अमूमन मई-जून में होती है, लेकिन गर्मी से पहले ही नदी, तालाब का सूखना चिंता की बात है। 24 से अधिक नदियों में पानी नहीं है। 18 नदियों में पानी ठहर गया है। कुछ प्रमुख नदियां में जहां पानी है, वहां मात्रा कम हो गई है।

बेगूसराय सहित कई जिलों में तो चापाकल अभी से जवाब देने लगे हैं। अगर यही हाल रहा तो गर्मी शुरू होते ही पानी के लिए हाहाकार मचना तय है। कई जिलों में भू-जलस्तर में भी कमी आई है। गोपालगंज जिले की छोटी-छोटी नदियों में पानी कम होने लगा है। बरौली प्रखंड की धमई नदी सूख गई है। दाहा नदी में पानी का बहाव रुक गया है। पंचदेवरी प्रखंड की झरही नदी भी जगह-जगह सूखने के कगार पर है। कटेया की सोन सोता नदी में भी पानी नहीं है।

फिलहाल गंडक नदी का जलस्तर सामान्य से करीब एक फुट कम है। कई जगहों पर इसकी धारा क्षीण हो रही है। बाढ़ नियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता सचिन कुमार ने बताया कि पिछले मानसून में औसत से साठ फीसदी कम बारिश होने से जिले में बहने वाली नदियां सूख रही हैं। आने वाले दिनों में भूगर्भीय जलस्तर गिरने की आशंका है। रोहतास व कैमूर की अधिकतर पहाड़ी नदियों में पानी सूख गया है।

ये नदियां सूखीं
गोपालगंज: धमई, सासाराम: कोटा, अवसानी, कशिश, फूलवरिया, भूखी खोह,चोरपनिया, सोहगी, गोरिया, भिखारी, टीटीही, महादेव खोह, बेलवाईं

नवादा: सकरी, धनार्जय, तिलैया, ढाढर व खुरी, जहानाबाद: फल्गु, मोरहर, दरधा, यमुने

इनका जलस्तर गिरा
सीवान: दाहा नदी, झरही, धमई, सरयू, सोन नद

मवेशियों को भारी परेशानी
नदियों के जलस्तर में कमी आने के कारण इंसान के साथ पक्षी और मवेशी भी परेशानी का सामना कर रहे हैं। सोन तटीय क्षेत्र के दियारे में नीलगाय, घोड़परास, हिरण के साथ जलीय जीव-जंतुओं के लिए भी पानी का संकट गहरा गया

पिछले साल अप्रैल में सूखीं थीं
पिछले साल मार्च-अप्रैल से नदियों के सूखने का सिलसिला शुरू हुआ था। अप्रैल में 20 नदियां सूख गयी थी। जून में पहले 22, फिर 24 और जून के अंत तक 38 नदियां सूख चुकी थी। 18 नदियों में पानी मापने योग्य नहीं था। पिछले साल ही आशंका व्यक्त की गयी थी कि इस साल स्थिति और खराब हो सकती है। वह अब दिखने लगा है।

बड़े हिस्से से पानी गायब
मोहाने, नोनाई, पंचाने, धोबा, चिरैया, भूतही, लोकाईन, गोईठवा, पैमार, बरनार, अपर किउल, दरधा, कररुआ, सकरी, तिलैया, चंदन, चीरगेरुआ, नून, कारी कोसी, बटाने, किउल, खलखलिया, सोन फसलों की सिंचाई के लिए लाइफ लाइन माना जाता है, लेकिन इस वर्ष बारिश कम होने का असर नदी के जलस्तर पर स्पष्ट तौर पर दिखने लगा है। माघ महीने में ही सोन की स्थिति जेठ महीने की तरह हो गई है।

किसानों को चिंता है कि इस बार रबी फसल की सिंचाई हो सकेगी की नहीं। किसान ही नहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी भी चिंतित हैं। अधिकारियों का कहना है कि यूपी से मांग की गई है फरवरी में पर्याप्त मात्रा में रिहंद बांध से पानी छोड़ा जाए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके।

ज्येष्ठ के महीने में सोन का पाट (चौड़ाई) बहुत कम हो जाता था, लेकिन इस साल माघ के महीने में ही हालत ऐसी हो गई है। जहां तहां अभी से ही सूखने लगी है। नदी किनारे के गांव के बुजुर्गों का कहना है ऐसी स्थिति इसके पहले जब-जब हुई है तब या तो अकाल आया था या भयंकर बाढ़।

सिंचाई विभाग पटना प्रमंडल के अधीक्षक अभियंता का कहना है कि इस वर्ष बारिश कम होने से नदियों का जलस्तर पहले ही नीचे चला गया है। सोन सिंचाई का प्रमुख साधन है तथा बिहार मध्य प्रदेश व यूपी से अक्सर नदी में पानी छोड़ने का आग्रह करता है।

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