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बिहार में झुलसा देने वाली गर्मी, स्किन को काली कर रही सूरज की तपिश; फफोले तक पड़ रहे

सनबर्न ज्यादा खतरनाक होता है। लेकिन आए दिन सन टैनिंग होने से भी वक्त से पहले उम्र बढ़ने के संकेत और कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए रोजाना सनस्क्रीन (एसपीएफ-50) लगाना न भूलें।

बिहार में झुलसा देने वाली गर्मी, स्किन को काली कर रही सूरज की तपिश; फफोले तक पड़ रहे
Malay Ojhaहिन्दुस्तान,भागलपुरSun, 28 Apr 2024 10:30 PM
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बिहार के भागलपुर समेत पूरा मैदानी इलाका सूरज की तपिश में जल रहा है। लग रहा है जैसे कि आसमान से आग बरस रही हो। आलम ये है कि बीते पांच दिनों से दिन का तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार रह रहा है। ऐसे में घर से बाहर निकले लोगों की त्वचा व चेहरों को न केवल सूरज की किरणें काला बना रही हैं, बल्कि घातक किरणों से त्वचा पर फफोले तक पड़ रहे हैं और जलन होने से त्वचा लाल हो जा रही है। 

लगातार पड़ रही भीषण गर्मी और पसीने के कारण त्वचा के बीमारों की संख्या में वृद्धि हो चली है। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मायागंज अस्पताल) के त्वचा रोग के ओपीडी में धूप-गर्मी, पसीना से होने वाले त्वचा रोग, घमौरिया, इंफेक्शन आदि के मामलों में 30 प्रतिशत तक की वृद्धि हो चुकी है। इसमें से छह से सात मरीज तो सन टैनिंग व सन बर्न के ही मिल रहे हैं। अगर सन टैनिंग व सन बर्न की अलग-अलग बात करें तो रोजाना पांच से छह मामले सन टैनिंग के होते हैं तो छह से सात मरीज प्रति सप्ताह की दर से सन बर्न के। 

अब तो एसपीएफ 30 क्रीम तक नहीं कर रहा है काम
त्वचा एवं सौंदर्य रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या सिंह कहती हैं कि सन बर्न के मरीज जहां इक्का-दुक्का आ रहे हैं तो वहीं सन टैनिंग के मरीज ज्यादा मिल रहे हैं। इन दिनों सूरज की किरणें इस कदर घातक हो चली हैं कि एसपीएफ (सन प्रोटेक्शन फैक्टर)-30 सन स्क्रीन क्रीम तक असर नहीं कर रही हैं। ऐसे में अब मरीजों को एसपीएफ-50 सन स्क्रीन क्रीम लगाने की सलाह दे रही है, जो असरदार भी है। लेकिन कोई भी क्रीम लगाने या फिर दवा खाने से पहले त्वचा रोग के डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। 

सन टैनिंग से ज्यादा खतरनाक है सन बर्न
टैनिंग वह प्रक्रिया है जिसमें त्वचा जैसे ही सूरज की किरणों के संपर्क में आती है तो त्वचा का रंग (मेलेनिन) बढ़ जाता है, जिससे त्वचा में कालापन आ जाता है। यह हमारे शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रक्रिया है जो आपकी त्वचा को ढाल की तरह धूप से बचाती है। हालांकि, जिन लोगों की त्वचा का रंग हल्का होता है, उनकी स्किन में मेलेनिन की मात्रा कम होती है। यही वजह है कि मेलेनिन उनकी त्वचा को पूरी तरह से बचा नहीं पाता और टैनिंग की जगह वे सन बर्न से जूझते हैं। वहीं, सन बर्न एक तरह का इंफ्लामेशन है जिसमें छाले, सूजन, दाने और त्वचा के छिलने जैसे लक्षण होते हैं और यह यूवी किरणों से होने वाले नुकसान के कारण होता है, जो अक्सर सूरज के संपर्क में आने के कुछ घंटों के बाद होता है। यह ख़तरनाक होता है, जो त्वचा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। साथ ही इससे वक्त से पहले उम्र बढ़ने के संकेत और त्वचा कैंसर भी हो सकता है।

सनबर्न ज्यादा खतरनाक होता है। लेकिन आए दिन सन टैनिंग होने से भी वक्त से पहले उम्र बढ़ने के संकेत और कैंसर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए रोजाना सनस्क्रीन (एसपीएफ-50) लगाना न भूलें। इसके अलावा जब गर्मी ज्यादा (सुबह 11 बजे से शाम चार बजे के बीच) हो, उस वक्त घर से बाहर न निकलें, जितना हो सके छांव में रहें और ऐसे कपड़े पहनें जो आपकी देह को पूरी तरह से ढक लें।
    डॉ. दिव्या सिंह, त्वचा एवं सौंदर्य रोग विशेषज्ञ