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हिंदी न्यूज़ बिहारशराबबंदी का हुआ असर: शराब की लत को तौबा कहते ही संवर गई जिन्दगी, अब कर रहे शराबबंदी का प्रचार

शराबबंदी का हुआ असर: शराब की लत को तौबा कहते ही संवर गई जिन्दगी, अब कर रहे शराबबंदी का प्रचार

एक संवाददाता,छपराSudhir Kumar
Sat, 27 Nov 2021 01:52 PM
शराबबंदी का हुआ असर: शराब की लत को तौबा कहते ही संवर गई जिन्दगी, अब कर रहे शराबबंदी का प्रचार

बिहार में शराबबंदी के अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। शराबबंदी के बाद कई परिवारों की खुशहाली लौट आई है। जहरीली शराब पीने से मौत की खबरों के बीच यह सुकून देने वाली खबर है। हालांकि प्रशासन की कार्रवाई में अभी भी भारी मात्रा में शराब पकड़े जा रहे हैं। कहीं कहीं पुलिस की ज्यादती भी देखी जा रही है तो कहीं पुलिस शराब माफिया के हमले का शिकार बन रही है। लेकिन, पूर्ण शराबबंदी के मुख्यमंत्री के संकल्प के सकारात्मक परिणाम भी नजर आ रहे हैं।

छपरा जिले के गरखा प्रखंड के छोटा झौंवा निवासी संजय राय इसके उदाहरण हैं। कुछ वर्षों पहले उन्होंने शराब क्या छोड़ी, उनके घर की खुशहाली लौट आई और तरक्की का रास्ता भी खुल गया। संजय बताते हैं कि पहले नशे की गिरफ्त में थे।

संजय पहले काफी शराब पीते थे। अक्सर वे नशे में रहते ते। गांव वालों की सलाह पर पत्नी व अन्य परिजन उन्हें मथुरा ले गए। वहां जय गुरुदेव के मोटिवेशनल सत्संग ने उन्हें प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने शराब का सेवन छोड़ दिया। अब खुद इससे दूर होकर खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं। शराब छोड़ने के बाद जीविका चलाने पर ध्यान देने लगे।

शराबबंदी ने हरिशंकर और हरिद्वार की बदली किस्मत

संजय ही नहीं इसी गांव के हरिद्वार राय और जाफरपुर गवन्द्री गांव के हरिशंकर भी कुछ ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। इन दोनों को भी शराब की लत थी। हरिद्वार को तो शराब की लत के कारण अपनी जमीन तक गिरवी रखनी पड़ी थी। पूरा परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। परिवार के लोगों ने शराब छुड़ाने का काफी प्रयास किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। शराब की लत के कारण माली हालत खराब होती चली गई। शराब में ही सारे रुपये खर्च हो जाता था। थक हारकर परिवार वालों ने दोनो काउंसलिंग शुरू किया। समझाने बुझाने पर धीरे धीरे दोनो ने शराब पीनी छोड़ दिया। आज पूरा परिवार खुशहाल है।

शराबबंदी ने मढ़ौरा के सिकन्दर राय के घर में लौटायीं खुशियां

सरकार की शराबबंदी ने मढ़ौरा के तेजपुरवा निवासी सिकंदर राय के घर की खुशियां लौटा दीं। कई वर्षों से शराब की गिरफ्त में जकड़े सिकंदर राय ने जब से शराब की बुरी लत छोड़ी है तब से उनके घर में एक बार फिर से खुशियां वापस हो गई हैं।

उनके बीवी-बच्चे काफी सुकून की जिंदगी जीने लगे हैं। 45 वर्षीय सिकंदर राय ने बताया कि उन्हें पिछले 20 साल से शराब की आदत थी। वे पूरे पूरे दिन इसी चक्कर में रहते थे व बाकी दुनिया की उन्हें कोई परवाह नहीं रहती थी। इस कारण उनका परिवार फटेहाली की जिंदगी गुजार रहा था। इनके बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो गई थी। ऐसे में सरकार की शराब बंदी और पुलिसिया दबाव के कारण उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया तब से उनकी सेहत भी ठीक हो गयी और समय के साथ साथ पैसे की बचत भी होने लगी। इनका कहना कि जब से वे शराब पीना छोड़े हैं तब से उनकी बीवी -बच्चे काफी सुकून से रहते हैं और उनका छोटा सा परिवार अब खुशहाली में जीता है। पत्नी सीमा देवी ने कहा कि जब उनके पति को शराब की लत थी उस वक्त वह शराब के नशे में धुत होकर घर आते थे और बच्चों के अलावा मारपीट, गाली-गलौज और कलह करते थे । अब घर में एक बार फिर से खुशियां वापस आई हैं। पुत्र राहुल ,रोहन और बेटी डिम्पल ने भी शराबबंदी कानून का समर्थन करते हुए कहा कि पहले वे अपने पिता के व्यवहार से काफी दुखी रहते थे लेकिन जब से उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है तब से वे लोग काफी खुश रहते हैं ।

संकल्प से छूट जाती है शराब की लत

यदि आपको शराब की लत लग गई है और कोई लाख दावा करे कि फलां दवाई लेने से लत छूट जाएगी तो यकीन न करें। कोई भी दवाई आपकी शराब की लत को नहीं छुड़वा सकती।

यह तभी संभव है जब आप अपने आप से और अपने परिवार से प्यार करेंगे और स्वयं शराब छोड़ने का संकल्प लेंगे। कुछ दिन आपको परेशानी होगी, लेकिन इसके बाद लत पूरी तरह से छूट जाएगी और आप भी दूसरों को शराब छुड़ाने की प्रेरणा दे सकेंगे। यह कहना है शहर के योगिनियां कोठी निवासी कन्हैया प्रसाद का। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शराबबंदी अभियान से प्रेरणा लेकर उन्होंने नशा करना छोड़ दिया। वे बताते हैं कि किसी समय वे भी खूब शराब पीते थे। शराब पीने के कारण उनकी जिंदगी में भूचाल आ गया। पत्नी, बच्चे, रिश्तेदार कन्नी काटने लगे। पड़ोसियों ने भी दूरी बना ली। ऐसा लगने लगा था कि जीना बेकार है, ऐसे में मुख्यमंत्री के आह्वान को सुना और एक दिन नहीं पीने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे दो दिन, एक सप्ताह, 15 दिन तक नहीं पीने की ठानी। परिवार के लोग खुश रहने लगे। उनकी खुशी देखकर धीरे-धीरे आदत छूट गई ।

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