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हिंदी न्यूज़ बिहारसुरक्षित यात्रा के लिए पहल: खराब आंख वाले ड्राइवर अब नही चला पाएंगे गाड़ी, होगी आंखों की नियमित जांच

सुरक्षित यात्रा के लिए पहल: खराब आंख वाले ड्राइवर अब नही चला पाएंगे गाड़ी, होगी आंखों की नियमित जांच

हिन्दुस्तान ब्यूरो,पटनाSudhir Kumar
Sun, 17 Oct 2021 12:14 PM
सुरक्षित यात्रा के लिए पहल: खराब आंख वाले ड्राइवर अब नही चला पाएंगे गाड़ी, होगी आंखों की नियमित जांच

लोगों को  सुरक्षित यात्रा का अनुभव दिलाने के लिए परिवहन विभाग ने नई पहल की है। अब  व्यवसायिक वाहन चालकों की  नियमित रुप से आंख जांच होगी। जल्द इस बाबत परिवहन विभाग आदेश जारी करेगा। पिछले दिनों सड़क सुरक्षा सप्ताह में ट्रक ड्राइवरों की आंख जांच की गई थी। इसमें काफी संख्या में ड्राइवरों की आंख की रोशनी में गड़बड़ी पाई गई। इसे देखते हुए परिवहन विभाग ने जिला स्तर पर कैंप लगाकर ड्राइवरों की आंख जांच कराने का निर्णय लिया है।

डीटीओ कार्यालय लेगा निर्णय

जांच में जो ड्राइवर नेत्र दोष से परेशान होंगे, उनको गाड़ी चलाने से रोका जाएगा। ऐसे वाहन चालकों का नाम व ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी डीटीओ के पास  भेजी जाएगी, ताकि डीटीओ कार्यालय उस पर निर्णय ले सके। चिकित्सकों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को 40 साल के बाद हर महीने नियमित नेत्र जांच करानी चाहिए। इस उम्र के बाद लोगों में नजदीक व दूर, दोनों की समस्याएं आती है। ट्रक, बस व अन्य व्यावसायिक वाहन के ड्राइवर करीब 40 पार के होते हैं लेकिन इनके आंखों की नियमित जांच नहीं होती है। मोटर वाहन नियम के मुताबिक पहले व्यावसायिक वाहनों का रिन्यूवल के समय तीन साल पर नेत्र जांच अनिवार्य रूप से किया जाता था, लेकिन अब व्यावसायिक वाहनों का रिन्यूअल पांच वर्षों के बाद होता है। ऐसे में इनके आंखों की जांच भी पांच साल पर होती है।

59 फीसदी मौतें एनएच पर

व्यावसायिक वाहनों का परिचालन एनएच और एसएच पर अधिक होता है। वहीं बिहार में सड़क दुर्घटना से सबसे अधिक मौतें एनएच पर होती है। साल 2020 में 3285 मौत एनएच पर हुई जो कुल मौतों 6699 का 59 फीसदी है। इसमें भी एनएचएआई के अधीन वाली नेशनल हाईवे पर 2517 यानी 77 फीसदी तो पथ निर्माण विभाग के अधीन वाली एनएच सड़कों पर 768 मौतें हुईं जो 23 फीसदी है। वहीं स्टेट हाईवे पर 1409 मौतें हुई जो कुल मौतों का 21 फीसदी तो जिले की महत्वपूर्ण सड़कें (एमडीआर) व ग्रामीण सड़कों पर 2005 मौतें हुई जो कुल मौतों का मात्र 30 फीसदी है

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