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पटना के इस मंदिर में राष्ट्रपति ने पत्नी और बेटी संग की पूजा, बताया- दर्शन करने से पूर्ण होती है मनोकामना

पटना हिन्दुस्तान टीमMalay Ojha
Fri, 22 Oct 2021 07:10 PM
पटना के इस मंदिर में राष्ट्रपति ने पत्नी और बेटी संग की पूजा, बताया- दर्शन करने से पूर्ण होती है मनोकामना

राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार पटना के महावीर मंदिर पहुंचे रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को सपरिवार हनुमान जी की पूजा-अर्चना की। मंदिर के पूर्वी प्रवेश द्वार पर महावीर मन्दिर न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने राष्ट्रपति को गुलाब का फूल भेंटकर स्वागत किया। राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद और बेटी स्वाति का स्वागत महावीर मन्दिर न्यास की ट्रस्टी महाश्वेता महारथी ने किया। मंदिर में कदम रखते ही रामनाथ कोविंद ने आचार्य किशोर कुणाल से कहा-पहले से बहुत विकास हुआ है। बहुत अच्छा लग रहा है मन्दिर। 

अपनी धर्मपत्नी को दिखाते हुए उन्होंने कहा, सामने से महावीर मन्दिर लिखा हुआ कितना सुन्दर लग रहा है। गर्भगृह के सामने पहुंचकर रामनाथ कोविंद ने हनुमान जी के दोनों विग्रहों का दर्शन करते हुए पत्नी से कहा- यह मनोकामना मन्दिर है। यहां मनोकामना पूरी हो जाती है। यह देश का एकमात्र मन्दिर है जहां हनुमान के दो विग्रह हैं-एक मनोकामना पूरन और दूसरा संकटहरण। 

रामनाथ कोविंद ने अयोध्या में महावीर मन्दिर की राम-रसोई की चर्चा करते हुए कहा कि अयोध्या में ऐसा अब तक किसी संस्था ने नहीं किया। अयोध्या दौरे पर लोगों ने उन्हें राम-रसोई के बारे में बताया कि हजारों रामभक्त प्रतिदिन निःशुल्क स्वादिष्ट भोजन करते हैं। आचार्य किशोर कुणाल ने उन्हें बताया कि अयोध्या में महावीर मन्दिर की ओर से राघव आरोग्य मन्दिर अस्पताल बनाने की प्रक्रिया चल रही है। राष्ट्रपति ने प्रसन्नता जाहित करते हुए कहा अयोध्या में भगवान राम के नाम पर अस्पताल बने, यह बहुत अच्छा काम है। रामनाथ कोविंद ने महावीर मन्दिर न्यास द्वारा संचालित अस्पतालों के बारे में भी पूछा कि कैसा चल रहा है। बिहार के राज्यपाल के रूप में रामनाथ कोविंद महावीर मन्दिर और उससे जु़ड़े संस्थानों में कई बार आ चुके हैं। राष्ट्रपति की नजर भीतरी प्रवेश द्वार पर लगे खूबसूरत ग्लो साइन बोर्ड पर पड़ी। 

राष्ट्रपति ने सपरिवार हनुमान जी को पुष्प और नैवेद्यम् चढ़ाया और ध्यान किया। फिर उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन की इच्छा जाहिर की। आचार्य किशोर कुणाल ने पुरोहित के रूप में हनुमान जी की स्तुति वाले श्लोकों के सस्वर पाठ के साथ विधिवत पूजा कराई। राष्ट्रपति ने सपरिवार हनुमान जी की आरती की। महावीर मन्दिर के पुजारी आचार्य अवधेश दास ने राष्ट्रपति को टीका कर नैवेद्यम और शॉल भेंट किया। दूसरे पुजारी ब्रह्मदेव दास ने राष्ट्रपति की पत्नी और पुत्री को नैवेद्यम और शॉल के साथ हनुमान जी का सिन्दूर भेंट किया। इसके बाद रामनाथ कोविंद ने गर्भगृह की परिक्रमा की। परिक्रमा करते हुए आचार्य किशोर कुणाल से कहा इस मन्दिर में उनकी बहुत आस्था है। आप हनुमान जी के प्रतिनिधि हैं, इसलिए आपसे भी मिलकर बहुत प्रसन्नता हुई। 

परिक्रमा के बाद किशोर कुणाल ने उन्हें पूर्वी चंपारण के कथवलिया-बहुआरा में निर्माणाधीन विराट रामायण मंन्दिर की चेन्नई से मंगाई गई स्वर्ण जड़ित प्रतिकृति भेंट की। 270 फीट उंचाई वाला यह मन्दिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा है। रामनाथ कोविंद ने पूछा कि उसी स्थान पर इतना भव्य मन्दिर क्यों बन रहा है तो किशोर कुणाल ने बताया कि भगवान राम की बारात दूसरी रात को इसी स्थान पर रुकी थी। प्रस्तावित अयोध्या-जनकपुर मार्ग भी मन्दिर को स्पर्श करता हुआ गुजर रहा है। राष्ट्रपति को महावीर मन्दिर प्रकाशन की पुस्तक तुलसी-साहित्य पर संस्कृत के अनार्स प्रबन्धों की छाया भेंट की गई। प्रो. रामतवक्या शर्मा लिखित इस पुस्तक के साथ घनश्याम दास हंस की पुस्तक लोना चालीसा भी संलग्न थी। राष्ट्रपति के साथ चल रहे अधिकारियों को भी महावीर मन्दिर की ओर से नैवेद्यम भेंट किया गया। महामहिम लगभग बीस मिनट मन्दिर में रहे और साढ़े नौ बजे वहां से विदा हुए। 

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