ट्रेंडिंग न्यूज़

Hindi News बिहाररिटायरमेंट के बाद क्या करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू? खुद ही किया खुलासा

रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू? खुद ही किया खुलासा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वे आगे भी बिहार आती रहेंगी, बिहार उनका घर है। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि राष्ट्रपति के पद से रिटायर होने के बाद वे भी खेती करेंगी, किसान बनेंगी।

रिटायरमेंट के बाद क्या करेंगी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू? खुद ही किया खुलासा
Malay Ojhaहिन्दुस्तान,पटनाWed, 18 Oct 2023 05:53 PM
ऐप पर पढ़ें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक बार फिर अपनी सादगी की मिसाल पेश की। वह बुधवार को तीन दिवसीय बिहार दौरे पर पटना पहुंची। यहां ज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में उन्होंने बिहार के चौथे कृषि रोड मैप का लोकार्पण किया। इस अवसर पर आचार-व्यवहार से लेकर परिधान और अपने संबोधन से लेकर पूरे कार्यक्रम में अपनी सादगी से लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने बिना किसी लाग लपेट के कहा कि वह किसान की बेटी हैं और जब वह राष्ट्रपति पद से रिटायर होंगी, तो अपने गांव जाकर खेती करेंगी। एक किसान बनेंगी। उनकी इस बात ने जहां किसानों का मनोबल ऊंचा किया, वहीं खेती-किसानी को लेकर एक बड़ा संदेश भी गया। सभागार में मौजूद किसानों ने उनकी इस बात पर तालियां बजा कर खुशी का इजहार भी किया।

मूल रूप से ओड़िशा की निवासी द्रौपदी मुर्मु ने कार्यक्रम में हिन्दी में सादगीपूर्ण भाषण दिया। साथ ही संबोधन में आसान, सहज व सरल शब्दों का प्रयोग किया, ताकि सभागार में मौजूद किसानों तक सीधे अपनी बात पहुंचा सकें। दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के जीवन का बड़ा हिस्सा ओडिशा जिले के मयूरभंज जिले के एक छोटे से गांव बैदापोसी में बीता है। उन्होंने किसानों के संघर्षपूर्ण जीवन को नजदीक से महसूस किया है। उनके पिता विरंचि नारायण टुडू उपरखेड़ा के प्रधान रहे थे। एक शिक्षक से भारत के राष्ट्रपति बनने तक की यात्रा के दौरान द्रौपदी मुर्मु ने जिन संघर्षों को झेला, उससे उपजी सादगी और शालीनता कृषि रोड मैप के लोकार्पण समारोह में उनके भाषणों के दौरान भी दिखी। उन्होंने खेती-किसानी और गांव से अपने लगाव को दर्शाते हुए खुद को किसान की बेटी भी बताया।   

जब राष्ट्रपति के सामने ही नीतीश ने राज्यपाल से पूछा, मेरा बतवा मानिएगा ना?

हमारे पूर्वज बिहारी
पहली बार बिहार की यात्रा पर पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न केवल इस राज्य के गौरवशाली अतीत, समृद्ध संस्कृति और एक मजबूत अर्थव्यवस्था की संभावनाओं की चर्चा की, बल्कि यहां से अपने भावनात्मक लगाव को भी याद किया। ओड़िशा अतीत में बिहार का हिस्सा रहा है। द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि ओडिशा ऐतिहासिक रूप से बिहार से जुड़ा रहा है। इसीलिए खुद को बिहारी कह सकती हूं। हमारे पूर्वज बिहार के ही थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर इंगित करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने उन्हें यहां आने को कहा है। वे अवश्य आएंगी। उन्हें भी तो देखना है कि यहां कृषि सेक्टर में कैसे काम हो रहा है। इसके पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि अब तक के सभी कृषि रोड मैप का लोकार्पण राष्ट्रपति के हाथों होता रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से बिहार आते रहने का अनुरोध भी किया। राष्ट्रपति ने बिहारियों की मेहनत व कर्मठता को भी यह कहते हुए याद किया कि बिहार से सूरीनाम में गए लोगों ने जहां एक ओर अपनी संस्कृति और परंपरा को संजोए रखा, वहीं वे स्थानीयता में भी रच-बस गए हैं।  

सूरीनाम में देखा पुरातन बिहार की झलक
राष्ट्रपति ने कहा कि वे सूरीनाम यात्रा के क्रम में वहां प्राचीन बिहार की झलक देखी है। विशाल भौगोलिक दूरी और अलग-अलग टाइम जोन में होने के बावजूद बिहार से गए लोगों ने वहां न केवल अपनी संस्कृति व परंपरा को संजोए रखा है बल्कि स्थानीयता में भी रच-बस गए हैं। यही नहीं बटोहिया और बिदेशिया से लेकर कटनी और रोपणी के गीतों तक की बिहार की लोक संस्कृति और साहित्य की यात्रा ने पूरे विश्व में अपनी पहचान बनायी है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें