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Hindi News बिहारमोदी के लिए लोग वोट करेंगे खटाखट, 4 जून को विपक्ष का सफाचट; संजय झा ने राहुल गांधी की चुटकी ले ली

मोदी के लिए लोग वोट करेंगे खटाखट, 4 जून को विपक्ष का सफाचट; संजय झा ने राहुल गांधी की चुटकी ले ली

18 सालों में मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए जा काम किया है, उसका असर दिख रहा है। महिलाएं एकतरफा एनडीए के लिए वोट कर रही हैं। पिछली बार से भी बेहतर परिणाम इस बार बिहार में एनडीए के पक्ष में आएंगे।

मोदी के लिए लोग वोट करेंगे खटाखट, 4 जून को विपक्ष का सफाचट; संजय झा ने राहुल गांधी की चुटकी ले ली
Sudhir Kumarब्रजेश,पटनाSat, 18 May 2024 12:51 PM
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Lok Sabha Election 2024: जदयू के रणनीतिकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोर टीम में शामिल राज्यसभा सांसद और राज्य सरकार के पूर्व मंत्री संजय झा करीब दो साल से पार्टी के एक प्रमुख किरदार बनकर उभरे हैं। खासकर इंडिया गठबंधन से बाहर निकलने और एनडीए में वापसी के कठिन फैसले के बीच संक्रमण के दौर में संजय झा की भूमिका अहम मानी गयी। बिहार में लोकसभा चुनाव अभियान समिति में शामिल संजय झा से हमारे  विशेष संवाददाता ब्रजेश ने बातचीत की। पेश है बातचीत के मुख्य अंश-

● इसबार एनडीए सरकार के गठन में आपकी भूमिका अहम मानी गई। इंडिया गठबंधन के गठन के वक्त भी सभी बातचीत में आप सीएम के साथ थे। ऐसी क्या परिस्थिति बनी की एनडीए में आ गये?

देशभर की विपक्षी पार्टियों का गठबंधन बनाने में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बड़ी भूमिका थी। उनलोगों की एक-दूसरे के साथ बैठने की भी स्थिति नहीं थी। नीतीश कुमार ने एकसाथ सभी को बैठाया और पहली बैठक पटना में की। पर, गठबंधन की ना कोई गतिविधि थी ना कोई निर्णय था। मुंबई की बैठक में विपक्ष का मुद्दा तय हो रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जातीय जनगणना भी मुद्दा होना चाहिए। ममता बनर्जी ने मना कर दिया और कांग्रेस के नेता भी चुप रहे। आज कांग्रेस के नेता जातीय गणना की बात कर रहे हैं, जिन्होंने इसे मुद्दा ही नहीं बनने दिया। मुख्यमंत्री ने विपक्षी गठबंधन को ‘इंडिया’ नाम देने पर कड़ी आपत्ति जतायी थी, पर वे लोग नहीं माने। जहां तक बात बिहार में फिर एनडीए की सरकार बनने की है तो यह नेचुरल गठबंधन है। बिहार में अगर बदलाव हुआ तो यह एनडीए के द्वारा ही किया हुआ है।

● लोकसभा चुनाव में आप लगातार घूम रहे हैं, बिहार की जनता का क्या रुख है?

बिहार की जनता में पूरी स्पष्टता है। वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव में फर्क करती है। उसे पता है कि देश में किसकी सरकार बनानी है और किसको प्रधानमंत्री बनाना है। एक तरफ स्पष्टता है कि किसको बनना है। वहीं, विपक्ष के पास कोई नाम भी नहीं है। ना कोई मुद्दा है। चुनाव बाद विपक्ष पूरी तरह हो जाएगा सफाचट। एक-दूसरे पर ये हार का ठीकरा फोड़ेंगे। वहीं मतदाता मोदी को पीएम बनाने के लिए वोट करेंगे खटाखट-खटाखट।

● आपने पीएम के साथ भी मंच साझा किया है। पिछले लोकसभा चुनाव में एनडीए को 39 सीटें मिली थीं, इस बार क्या लग रहा है?

इस बार सबसे बड़ी चीज जो मैं देख रहा हूं कि महिलाएं स्वतंत्र मानसिकता से वोट कर रही हैं। 18 सालों में मुख्यमंत्री ने महिलाओं के लिए जा काम किया है, उसका असर दिख रहा है। महिलाएं एकतरफा जाकर एनडीए को वोट कर रही हैं। पिछली बार से भी बेहतर परिणाम इस बार बिहार में एनडीए के पक्ष में आएंगे।

● निवर्तमान सांसदों को लेकर स्थानीय स्तर पर जनता की नाराजगी की बात सामने आ रही है, झंझारपुर में भी आपने देखा। आपको क्या लगता है? अगर नाराजगी है तो पार्टी की इसपर क्या रणनीति है?

कही-कहीं उम्मीदवारों को लेकर नाराजगी है, पर जनता को पता है कि देश में किसकी सरकार जरूरी है। नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार के कार्यों को लोग पसंद कर रहे हैं। जनता को कोई काम ना होने की शिकायत नहीं है। सभी लोग यह मानते हैं कि राज्य में विकास हुआ है। क्षेत्र में लोगों से नहीं मिलने-जुलने की शिकायत स्थानीय प्रतिनिधि के प्रति कुछ है।

● बिहार में किन मुद्दों पर लोग वोट कर रहे हैं?

लोग चाहते हैं कि डबल इंजन की सरकार रहे। केंद्र और बिहार में। बहुत कठिन दौर से 2005 में बिहार बाहर निकला। इसे नहीं भूलना चाहिए। नीतीश कुमार ने एकदम नीचे से शुरुआत की है। सरकार को वेतन देने के पैसे नहीं थे। ऐसा मुश्किल राज्य नीतीश कुमार को 2005 में मिला था। उन्होंने अपने कार्यों और विजन से बिहार का एक आधार तैयार कर दिया है। चाहे सुशासन की बात हो, सड़क संपर्कता की बात हो या बिजली उपलब्धता की। चाहे सेवा सेक्टर की बात हो। हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज खुले। बिहार को एक छलांग और लगाना है। केंद्र में मोदी की सरकार बनती है तो बिहार के विकास को पांच सालों में एक लंबा उछाल मिलेगा।

● तेजस्वी निरंतर रोजाना पांच-पांच सभाएं कर रहे हैं, विपक्ष के धुआंधार चुनाव प्रचार को आप कैसे देखते हैं ?

धुआंधार सभाएं तो सभी पार्टियां करती हैं। लेकिन, लोगों को पता है कि यह चुनाव केंद्र का है और वहां पर किसको वोट देना है। लोग किसको चाहते हैं, यह बड़ा सवाल है। कांग्रेस का चुनाव तो रायबरेली तक सीमित रह गया है। कांग्रेस नेतृत्व ने बिहार में चुनाव का बहिष्कार ही कर दिया है।

● मुकेश सहनी के महागठबंधन का हिस्सा बनने पर विपक्ष को फायदा होता दिख रहा है, क्या? खासकर उत्तर बिहार में?

मुकेश सहनी पर कोई टिप्पणी नहीं करनी है।

● इस बार केन्द्र में एनडीए की सरकार बनती है तो क्या जदयू उसमें शामिल होगा?

इस पर निर्णय हमारे नेता नीतीश कुमार लेंगे।

● आधा चुनाव बीत गया। जदयू का प्रदर्शन कैसा हो रहा है? 16 में कितनी सीटें आएंगी? इसका आधार क्या है?

अभी तक के संपन्न चुनाव बताते हैं कि जदयू के एक भी सीट हारने की कोई वजह ही नहीं है। इस बार हमलोग किशनगंज भी जीत रहे हैं। सामने में जो लड़ रहे हैं, वो जनता को यह नहीं बता पा रहे हैं कि उन्हें क्यों वोट मिलना चाहिए। बिहार की जनता नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की जोड़ी को पसंद कर रही है।

● 2025 विधानसभा चुनाव किसके नेतृत्व में लड़ेंगे? नीतीश कुमार या नरेंद्र मोदी?

2025 का चुनाव स्वाभाविक रूप से नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी दोनों के नाम पर लड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री देश के स्तर पर एनडीए के नेता हैं। राज्य में नीतीश कुमार ही चेहरा हैं। बिहार में उनका ही नेतृत्व होगा।