बिहार: 70 फीसदी पंचायतों में वित्तीय लेन-देन पर लगी रोक, जानें पंचायती राज विभाग ने क्यों लिया यह फैसला

बिहार की 70 फीसदी पंचायतों में वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। पंचायती राज विभाग ने इस बाबत सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा है। विभाग का कहना है कि गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई की जााएगी।

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Sneha Baluni हिन्दुस्तान ब्यूरो , पटना
Last Modified: Sun, 22 May 2022 11:57 AM

बिहार की 70 फीसदी पंचायतों में वार्ड क्रियान्वयन समिति के वित्तीय लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। पंचायत चुनाव के बावजूद वार्ड क्रियान्वयन समिति गठित नहीं होने के कारण पंचायती राज विभाग ने यह निर्णय लिया है। विभाग के निदेशक रणजीत कुमार सिंह की ओर से इस बाबत सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।

पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि पंचायत चुनाव परिणाम आने के बाद नवगठित वार्ड क्रियान्वयन प्रबंधन समिति को ही महत्वपूर्ण संचिका कागजात, रोकड़पंजी, वित्तीय लेन-देन आदि का काम करना है। चुनाव होने के पूर्व से बनी वार्ड क्रियान्वयन समिति को यह काम करने का अधिकार नहीं है। पंचायत चुनाव से पहले बनी वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा किसी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को अवैध माना जाएगा।

अगर राज्य की किसी भी पंचायत में ऐसे मामले की जानकारी मिलती है, तो कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि जिला पंचायत राज पदाधिकारी एवं जिलों से प्राप्त आकड़ों के अनुसार अद्यतन नवगठित मात्र 30 प्रतिशत वार्डो का ही लेखा-जोखा एवं अन्य अभिलेखों का हस्तातंरण किया गया है। विभाग ने इस स्थिति को चिंताजनक माना है। कहा गया है कि सभी वार्डों में समिति गठित नहीं होने से विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन एवं रखरखाव में बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इस स्थिति को देखते हुए ही तय किया गया है कि नवगठित वार्ड क्रियान्वयन समिति को ही वित्तीय लेन-देन का अधिकार दिया जाए। जिलाधिकारियों से कहा गया है कि वे सुनिश्चित कराएं कि नवगठित वार्ड क्रियान्वयन प्रबंधन समिति के माध्यम से ही वित्तीय लेन-देन व अन्य महत्वपूर्ण कार्य संपादित हो। विभाग ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कराने को कहा है ताकि पुरानी समितियों के द्वारा किए जा रहे कार्य पर अविलंब रोक लगाई जा सके।

वार्ड क्रियान्वयन समिति में मूल रूप से वार्ड सदस्य निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। समिति के अध्यक्ष वार्ड सदस्य ही होते हैं। हरेक समिति में एक वार्ड सचिव होता है। समिति में छह सदस्य होते हैं जिनमें महिलाओं की सहभागिता अनिवार्य है। समिति के सदस्यों का चयन आपसी सहमति के आधार पर वार्ड सदस्य करते हैं।

यह है काम

वार्ड क्रियान्वयन समिति के जिम्मे सरकार के दो निश्चय योजना नल-जल और गली-नाली पक्कीकरण योजना का क्रियान्वयन करना है। साथ ही इस योजना में हुए काम के रखरखाव का जिम्मा भी इसी समिति के पास है। नल-जल योजना में अनुरक्षण नीति का भी प्रावधान है। वार्ड सदस्य इसके अनुरक्षक होते हैं। उनको जिम्मेवारी होती है कि वे सुबह-शाम तय समय पर पानी चलवाना सुनिश्चित करें।

समिति को मिलने वाली राशि

नल-जल व गली-नली पक्कीकरण योजना के क्रियान्वयन के लिए हर वार्ड को औसतन 15 लाख दिए गए हैं। अनुरक्षण नीति के कारण हर वार्ड समिति को नल-जल योजना में रखरखाव के लिए दो हजार मासिक दिया जाता है। समिति के अध्यक्ष यानी वार्ड सदस्य को सरकार की ओर से दो हजार रुपए मासिक दिया जाता है। वहीं नल-जल योजना में हर घर से 30-30 रुपए मासिक की वसूली लाभुकों से करनी है। अनुरक्षक होने के नाते इस राशि का आधा पैसा वार्ड सदस्य को मिलता है।

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