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5 जुलाई, 2020|11:43|IST

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पटना हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, आरक्षित कोटे पर बहाल सामान्य अभ्यर्थी की बहाली अमान्य

पटना हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। आरक्षित कोटे पर बहाल सामान्य अभ्यर्थी को नौकरी से हटाने के सेंट्रल एक्साइज विभाग के आदेश को सही करार दिया है। न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय तथा न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। 

दरअसल, 17 अक्टूबर, 1987 को कर्मचारी चयन आयोग ने एक विज्ञापन प्रकाशित किया था। भागलपुर जिले के अनादिपुर निवासी मनोज कुमार ने अपना आवेदन भरा था। परीक्षा पास करने के बाद उनकी बहाली कस्टम व सेंट्रल एक्साइज विभाग में हुई। पद पर बहाल होने के समय एससी-एसटी का जाति प्रमाणपत्र नहीं जमा कर अपने आप को सामान्य श्रेणी का अभ्यर्थी घोषित किया। इसके बाद विभाग ने जांच कर इन्हें नौकरी से हटाने का आदेश जारी कर दिया। विभाग के आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) पटना बेंच में चुनौती दी। कैट ने आवेदक के पक्ष में फैसला देकर फिर से जांच का आदेश दिया। विभाग ने जांच कर उन्हें फिर से हटा दिया, जिसे चुनौती दी गई। कोर्ट ने आवेदक को पुनः सेवा में वापस लेकर पूर्व के वेतन के साथ आगे का वेतन देने का आदेश दिया। 

इस फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की, लेकिन विलम्ब से अपील दायर करने के कारण खारिज कर दी गई। बाद में केंद्र सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया एसडी संजय के कानूनी सलाह पर हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई। जिसे कोर्ट ने मंजूर करते हुए अर्जी पर फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति शिवाजी पांडेय तथा न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण की खंडपीठ ने मामले पर विस्तार से सुनवाई की। 

आवेदक के वकील का कहना था कि आवेदक ने कभी आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी के रूप में आवेदन नहीं किया था। आवेदन के साथ परीक्षा शुल्क के रूप में 28 रुपये का आईपीओ दिया था। वहीं केंद्र सरकार के वकील एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने कोर्ट को बताया कि आवेदक आरक्षित वर्ग के रूप में आवेदन दिया था। आवेदन पत्र के साथ भागलपुर के जिला कल्याण पदाधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र लगाया था। यहां तक कि परीक्षा शुल्क नहीं दिया था। उन्होंने आवेदक के आवेदन को कोर्ट के समक्ष पेश भी किया। 

कर्मचारी चयन आयोग की ओर से जवाबी हलफनामा दायर कर कोर्ट को बताया गया कि सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी के लिए कट ऑफ 236 अंक था और आवेदक को 153 अंक मिले थे। उनका चयन एससी एसटी श्रेणी में हुआ था। आयोग ने बहाली के लिए भेजे अनुशंसा में आवेदक का नाम आरक्षित वर्ग में भेजा था। आयोग का कहना था कि आवेदक का नाम आरक्षित वर्ग में सबसे ऊपर था। यदि यह सामान्य श्रेणी के होते तो इनका चयन ही नहीं होता। 

आवेदक की अर्जी खारिज 
कोर्ट ने माना कि आवेदक ने आवेदन में अपने पिता की जगह अपने अभिभावक का नाम जगदानंद कुमार लिखा था, जबकि इनके पिता का नाम नित्यानंद कुमार है। कोर्ट ने आवेदक की ओर से पेश हर दलील को नामंजूर करते हुए अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने आवेदक को गलत तथ्यों के आधार पर नौकरी पाने और नौकरी से हटाने के विभाग के आदेश को सही करार दिया। 

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  • Web Title:Patna High Court historic verdict order of Central Excise Department to remove general candidate who has been reinstated on reserved quota has been declared correct