Patna Dr Usha Kiran Khan get UP prestigious Bharat Bharti honored - बड्ड नीक लागल, यूपी वाला बिहार के लोक के पुरस्कार देलकई: डॉ. उषा किरण खां DA Image

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बड्ड नीक लागल, यूपी वाला बिहार के लोक के पुरस्कार देलकई: डॉ. उषा किरण खां

dr usha kiran khan

पुरस्कार भेटतई त नीके न लगतई...ओहो यूपी वाला बिहार वाला के देतई त...की करब सेलिब्रेट करब..अपन लोकक संग पार्टी करब...(बहुत अच्छा लगा। खासकर जब यूपी वाले ने बिहार वाले को यह पुरस्कार दिया। इसे हम सेलिब्रेट करेंगे। अपने लोगों के साथ पार्टी करेंगे)...हिन्दी और मैथिली की ख्यातिप्राप्त साहित्यकार डा. उषा किरण खां ने उत्तरप्रदेश के प्रतिष्ठित भारत-भारती पुरस्कार देने की घोषणा पर कुछ इसी तरह की अपनी प्रतिक्रिया दीं। इस पुरस्कार के तहत उन्हें पांच लाख की नकद राशि भी प्रदान की जाएगी। 

बता दें कि इसके पूर्व डा. उषा किरण खां को उनके साहित्य सृजन के लिए पद्मश्री से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने हिन्दी के साथ मैथिली में भी दर्जनों उपन्यास व कहानी लिखी हैं। मैथिली लेखन के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का भी पुरस्कार मिल चुका है। 

डा. खां ने हिन्दुस्तान के साथ अपनी इस खुशी को साझा करते हुए कहा कि पुरस्कार की राशि से वे साहित्य सृजन करेंगी। हिन्दी में तो प्रकाशक मिल जाते हैं पर मैथिली की किताबें छापने को कम लोग मिलते हैं। हिन्दी की कमाई से मैथिली में भी किताबें लिखूंगी। उनकी एक रचना हसीना मंजिल पहले मैथिली में छपी तो कुछ चर्चा नहीं हुई। इसमें भारत-पाक के विभाजन के साथ बांग्लादेश के बनने को लेकर बातें थीं। दस साल बाद जब यह किताब हिन्दी में छपी तो इसकी समीक्षा हुई और यह सुर्खियों में आयी। 

मैथिली में भामति पुस्तक के लिए साहित्य अकादमी से पुरस्कृत हो चुकीं डा. खां का मानना है कि साहित्य में विचारधारा का दबाव नहीं होना चाहिए। किसी भी विचारधारा में बंधकर कुछ लिखना संभव नहीं होता है। हमें भी कई बार ऐसा दबाब झेलना पड़ा है पर मैंने इनकार किया। साहित्य व समाज के लिए विचारधारा का दबाव ठीक नहीं है। 

यह भी जानें
- साहित्यकार उषा किरण खां को मिला यूपी का प्रतिष्ठित भारत-भारती पुरस्कार 
- कहा-सेलिब्रेट करूंगी अपने लोगों के संग पार्टी करेंगी 
- हिन्दी की कमाई से मैथिली में साहित्य सृजन करेंगी 
- इस पुरस्कार के तहत उन्हें पांच लाख की नकद राशि भी प्रदान की जाएगी 
- मैथिली लेखन के लिए उन्हें साहित्य अकादमी का भी पुरस्कार मिल चुका है 

1976 में छपी थी उनकी रचना
डा. खां ने महज दस वर्ष की उम्र में ही हिन्दी में पहली कविता लिखी थी। अपने भाई के जन्मदिन पर यह कविता लिखी गई थी। पर 1976 में उनकी रचना छपी। उनके लेखन पर शरतचंद्र व बाबा नागार्जुन की लेखनी का काफी प्रभाव पड़ा। पहली कहानी मैथिली में लिखी। उनकी कहानियों में बिहार के ऐसे क्षेत्र की महिलाओं की समस्याओं को सामने लाया गया, जो उनसे पहले नहीं लिखी गयी थी। इन कहानियों को मशहूर साहित्यकार व भाषाविद् स्व. धर्मवीर भारती ने भी जमकर सराहा था।

स्वामी रामभद्राचार्य को साहित्य भूषण सम्मान
उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान की ओर दो लाख धनराशि वाला साहित्य भूषण सम्मान जगतगुरु रामानन्दाचार्य (स्वामी रामभद्राचार्य), नई दिल्ली के डॉ. पूरन चन्द टण्डन, अजमेर के डॉ. बद्री प्रसाद पंचोली, बरेली के डॉ. भगवान शरण भारद्वाज आदि को दिया जाएगा। कला भूषण सम्मान गाजियाबाद के मनोज कुमार सिंह, विद्या भूषण सम्मान नोएडा के डॉ. जगमोहन सिंह राजपूत, विधि भूषण सम्मान दिल्ली के ब्रजकिशोर शर्मा और सौहार्द सम्मान नई दिल्ली के डॉ. चन्द्रशेखर को दिया जाएगा। पचहत्तर हजार धनराशि वाले नामित पुरस्कार में तुलसी पुरस्कार से बुलंदशहर के देवेन्द्र 'देव' मिर्जापुरी, को नवाजा गया है।

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