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27 फरवरी, 2020|9:03|IST

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पद्म पुरस्कार: आठ विभूतियों ने बढ़ाया बिहार का मान, जानिए उनके बारे में सबकुछ

george fernandes and vashishtha narayan singh padma awards 2020

बिहार और बिहार से संबंध रखने वाले विभिन्न क्षेत्र की आठ विभूतियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया है। राजनीतिज्ञ जॉर्ज फर्नांडिस को जहां मरणोपरांत पद्म विभूषण सम्मान मिला है वहीं अन्य सात को पद्मश्री के लिए चुना गया है। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र की नामचीन हस्तियां हैं। सुजय कुमार गुहा जहां विज्ञान के क्षेत्र में बिहार का झंडा बुलंद कर रहे हैं वहीं शांति जैन, श्याम सुंदर शर्मा कला, विमल कुमार जैन, रामजी सिंह सामाजिक क्षेत्र, जबकि शांति राय चिकित्सा के क्षेत्र में बिहार का नाम रोशन कर रही हैं। इनके अलावा प्रसिद्ध विज्ञानी आइंस्टीन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह को भी मरणोपरांत पद्म अलंकरण मिला है।

डॉ. वशिष्ठ ने आइंस्टीन के सिद्धांत को दी थी चुनौती 
महान वैज्ञानिक आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह को मरणोपरांत भारत सरकार पद्मश्री सम्मान से देने की घोषणा हुई है। भोजपुर जिला के जगदीशपुर निवासी स्व. सिंह ने नेतरहाट से मैट्रिक किया था। पटना साइंस कॉलेज में उन्होंने इंटर में टॉप किया। पढ़ने में इतने तेज थे कि पटना विवि प्रशासन ने उनके लिए नियम में बदलाव किया। स्नातक फाइनल परीक्षा में उन्होंने टॉप किया। इसके बाद पीजी में दाखिला लिया। हालांकि बाद में विदेश चले गए थे। वर्ष 1969 में  कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बन गये। कुछ समय नासा में भी काम किया। ‌उनके गाइड जॉन केली ने अपनी बेटी के साथ विवाह प्रस्ताव दिया, जिसे डॉ. सिंह ने अस्वीकृत करते हुए कहा था कि मुझे अपने देश भारत जाना है। देश की सेवा करनी है। अपने देश के लिए जीना और मरना। 1971 में डॉ. वशिष्ठ नारायण सिंह वापस भारत लौट आये। शादी के बाद  उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। बाद में 1974 में मानसिक रोग से ग्रसित होने के बाद रांची स्थित मानसिक आरोग्यशाला में उन्हें भर्ती कराया गया। बिहार सरकार ने उनका इलाज कराया। 74 वर्ष की उम्र में 14 नवंबर 2019 को उनका निधन हो गया। 

आठ बार बिहार से लोकसभा पहुंचे थे जॉर्ज
कर्नाटक के मंगलौर में तीन जून, 1930 को जन्मे जॉर्ज फर्नांडिस का बिहार से गहरा नाता रहा है। बिहार से वे आठ बार चुनाव जीत कर लोकसभा में पहुंचे थे। इनमें पांच बार मुजफ्फरपुर तो तीन बार नालंदा लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे। मुजफ्फरपुर से सबसे पहले 1977 में जब वह चुनाव जीते तब जेल में थे। बिहार से एक बार वे राज्यसभा भी गए। अटलबिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने वर्ष 1998 से 2004 तक रक्षा मंत्री का पद संभाला। इसी बीच 1999 कारगिल युद्ध हुआ, जिसमें भारत ने पकिस्तान को शिकस्त दी। 1989 से 90 तक वह रेल मंत्री रहे। इसके अलावा कई अन्य मंत्रालय भी उन्होंने संभाले। वर्ष 1994 में उन्होंने समता पार्टी का गठन किया। एनडीए के लंबे समय तक संयोजक भी रहे। जॉर्ज फर्नांडिस ऑल इंडिया रेलवे फेडरेशन के अध्यक्ष भी रहे। उनके अध्यक्ष रहते ही रेलवे में सबसे लंबी हड़ताल हुई थी। वे 18 साल की उम्र से ही सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन की गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे थे। 
 
यह सम्मान बिहार के कलाकारों का सम्मान है : प्रो श्याम शर्मा
प्रो श्याम शर्मा मूलत: उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन गांव के रहनेवाले हैं। इनका  जन्म 1941 में हुआ था। ये पिछले कई दशक से बिहार में रह रहे हैं। इनका मूल नाम श्याम सुंदर शर्मा है। ये कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना के प्राचार्य भी रह चुके हैं। 1998 में इन्हें राष्ट्रीय ललित कला अकादमी का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, तो वर्ष 2012 में बिहार सरकार ने इन्हें अबुल कलाम शिक्षा सम्मान भी दिया था। कई अंतरराष्ट्रीय छापाकला प्रदर्शनियों में इनकी पेंटिंग पुरस्कृत हो चुकी है। नीदरलैंड, फिनलैंड, सर्बिया, अमेरिका सहित कई देशों में कला-यात्रा कर चुके हैं। सफेद सांप (कविता संग्रह), स्याह, देखा-देखी बात (नाटक के संस्मरण), गांधी और सूक्तियां, काष्ठ छापाकला, चित्र परंपरा और बिहार, पटना कलम सहित दर्जनों पुस्तकें लिख चुके हैं।

पद्मश्री सम्मान मिलने पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि यह सम्मान बिहार के कलाकारों का सम्मान है। वर्षों की कला साधना का सम्मान है। कला के प्रति नियमित सृजन का फल है, जो पुरस्कार बिहार के एक छापा कलाकार को मिला है। 

बिहार की कला को मिला सम्मान है : डॉ शांति जैन
पद्मश्री सम्मान से नवाजी गईं डॉ. शांति जैन का जन्म चार जुलाई 1946 को आरा में हुआ था। एचडी जैन कॉलेज आरा में संस्कृत की विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। वह पिछले कई दशक से पटना में रह रही हैं। डॉ. शांति जैन को वर्ष 2009 में संगीत नाटक अकादमी का राष्ट्रीय सम्मान मिला था, तो मध्यप्रदेश सरकार ने 2008 में राष्ट्रीय देवी अहिल्या सम्मान दिया था।  वह मानव संसाधन विकास, साहित्य सम्मेलन, हिंदी प्रगति समिति, अल्पसंख्यक आयोग, भाषा साहित्य परिषद् सहित कई संस्थानों की सदस्य रह चुकी हैं। हिंदी साहित्य के साथ-साथ लोक साहित्य में विशिष्ट कार्य करने के लिए चर्चित हैं। कई दर्जन किताबें लिख चुकी हैं।

बिहार गौरव गान लिखनेवाली डॉ. शांति जैन को लोक साहित्य पर विशेष कार्य करने के लिए पद्म पुरस्कार मिला है। सम्मान की घोषणा के बाद कहा कि सम्मान मिलने की खुशी है, लेकिन यह थोड़ी देर से मिला। सम्मान मिलने के बाद लोगों का ध्यान जाता है, यह अच्छी बात है। वास्तव में यह बिहार का सम्मान है। बिहार की कला का सम्मान है। सम्मान हमारे अंदर उत्साह भरता है। ऊर्जा मिलती है। 


सम्मान मिलने के बाद जिम्मेवारी भी बढ़ गई है : डॉ.शांति राय
बिहार की प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ.शांति राय ने पद्मश्री मिलने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस सम्मान के लिए सरकार को बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं। साथ ही इस सम्मान को विनम्रतापूर्वक स्वीकार भी करूंगी। सम्मान मिलने के बाद जिम्मेवारी भी बढ़ गई है। जमीनी स्तर पर आगे भी और बेहतर तरीके से काम करूंगी। 

डॉ.शांति राय 1962 में पीएमसीएच से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी। उसके बाद पीएमसीएच में ही स्त्री एवं प्रसूति विभाग में विभागाध्यक्ष के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। इसके अलावा सामाजिक क्षेत्र में भी स्वासथ्य को लेकर खासकर महिलाओं को जागरूक करने का प्रयास हमेशा करती रहीं। इससे पहले डॉ.शंति राय को कई बार लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड भी मिल चुका है।

विमल जैन ने तीस हजार दिव्यांगों को दिया सहारा
समाज सेवा के क्षेत्र में विमल जैन की ख्याति है। खासकर भारत विकास विकलांग न्यास के महासचिव के तौर पर उन्होंने दिव्यांगों के पुनर्वास के क्षेत्र में काफी काम किया है। उन्होंने तीस हजार से अधिक दिव्यांगों को कृत्रिम अंग दिलाने में अहम भूमिका निभायी है। पोलियो से ग्रसित आठ हजार लोगों की सर्जरी करवायी है। वे दधीचि देहदान समिति बिहार के महासचिव भी हैं। इसके अलावा दर्जनों सामाजिक संस्थाओं से वे जुड़कर समाज सेवा में सक्रिय हैं। 

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के संस्थापकों में एक हैं। प्रो.सुजय गुहा
पद्मश्री से सम्मानित होने वाले प्रो.सुजय कुमार गुहा का जन्म पटना में 1940 में हुआ था। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक और एमटेक किया था। बाद में इलीनोइस विवि से भी मास्टर की डिग्री हासिल की। सेंट लुइस यूनिवर्सिटी से मेडिकल फिजियोलॉजी में पीएचडी की। फिर उन्होंने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग सेंटर की स्थापना की। दिल्ली विवि से एमबीबीएस की डिग्री भी हासिल की। वे देश में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के संस्थापकों में से एक हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के लिए रिप्रोडक्टिव मेडिसीन और तकनीक विकसित करने में अहम योगदान दिया। वे 2003 में आईआईटी ख़ड़गपुर में चेयर प्रोफेसर बने। 

हिन्दी और अंग्रेजी में 60 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं रामजी सिंह ने
पद्म श्री सम्मान से नवाजे गए प्रो. रामजी सिंह का जन्म 1927 में मुंगेर जिले के जमालपुर थाना के इंदुख गांव में हुआ है। वह तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में फिलॉस्फी के प्रोफेसर रहे हैं। बाद में वह राजस्थान स्थित जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति बने। वह देश के बड़े गांधीवादी माने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी और अंग्रेजी में करीब 60 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। वह जैनिज्म में पीएचडी के अलावा गांधी विचार और हिन्दुइज्म में डीलिट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने गांधी विचार में शिक्षा प्राप्त करने वाला एशिया में पहला केन्द्र भागलपुर में गांधी विचार विभाग स्थापित किया। उन्होंने 1977 के आमचुनाव में भागवत झा आजाद को एक लाख 86 हजार मतों से हराकर भागलपुर के सांसद बने थे।

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  • Web Title:Padma Awards 2020 Eight Personalities From Bihar Got Padma Awards This Year Know Everything About Them