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बिहार में हर महीने 6.60 करोड़ का पोषाहार, फिर भी 27 हजार बच्चे कुपोषित

नीति आयोग को जिला प्रोग्राम कार्यालय से कुपोषित बच्चों के संबंध में भेजी गई रिपोर्ट आंखें खोल देने वाली है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में  2.96  लाख बच्चे नामांकित हैं। इनमें से पांच वर्ष तक के कुल 27 हजार बच्चे कुपोषित हैं। यह आंकड़ा तो केवल आंगनबाड़ी केंद्र का है, केंद्र के बाहर कुपोषित बच्चों की संख्या का सर्वे होना बाकी है। यह स्थिति तब है जब दशकों से आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के कुपोषण को दूर करने के अभियान में लगा है।

बाल कल्याण निदेशालय के आंकड़े बताते हैं कि मुजफ्फरपुर में आंगनबाड़ी केंद्रों को हर माह 6.60 करोड़ रुपये बच्चों के पोषाहार को भुगतान किया जाता है। इतनी राशि से बच्चों का कुपोषण दूर हो रहा है या नहीं, यह बताने वाला कोई नहीं है।  केंद्रों पर खर्च होने वाली इस राशि की उपयोगिता जांचने का जिम्मा तीन स्तर पर है। प्राथमिक स्तर पर महिला पर्यवेक्षिका तैनात हैं। इन्हें अपने सेक्टर के सभी केंद्रों का निरीक्षण करना होता है। दूसरे स्तर पर  केंद्रों के निरीक्षण का जिम्मा सीडीपीओ को है।

तीसरे स्तर पर इसकी नियमित जांच जिला प्रोग्राम पदाधिकारी को है। सभी को जांच का प्रतिवेदन ऑनलाइन   भेजना होता है। लेकिन सरकार की वेबसाइट बताती है कि जिले में दस फीसदी केंद्र का भी निरीक्षण महिला पर्यवेक्षिकाओं ने नहीं किया है। 

हैरानी की बात है कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक सीडीपीओ या जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने एक भी केंद्र का निरीक्षण नहीं किया है। ऐसे में बच्चों का न सही, आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े जिम्मेवारों का कुपोषण जरूर दूर हो रहा है।   बच्चों की सेहत को आंगनबाड़ी पर यूं है पोषाहार का इंतजाम
साप्ताहिक पोषाहार की सूची

दिन        नाश्ता        गर्म पका भोजन   
सोमवार        चूड़ा-गुड़        खिचड़ी
मंगलवार        अंकुरित चना-गुड़    चावल या पोहा पुलाव
बुधवार        सुधा दूध        खिचड़ी
गुरुवार        चूड़ा-गुड़        सूजी का हलवा
शुक्रवार        चूड़ा-गुड़ व अंडा    रसिया
शनिवार        चूड़ा-गुड़        खिचड़ी 

एक दिन और        चूड़ा-गुड़     खिचड़ी/चावल पुलाव/पोहा पुलाव

वेबसाइट पर निरीक्षण प्रतिवेदन अपडेट नहीं हुआ हो सकता है। सीडीपीओ लगातार निरीक्षण कर रही हैं। मैं भी केंद्रों पर जाकर पड़ताल करती हूं। बच्चों को आंवटन के अनुरूप पोषाहार दिया जा रहा है। कुपोषित बच्चों के बारे में नीति आयोग को रिपोर्ट भेजी गई है।
 -ललिता कुमारी, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी 

आंगनबाड़ी केंद्रों की जो पोषाहार तालिका है, उसके मुताबिक नाश्ता व भोजन दिये जाने के बाद बच्चे कुपोषित नहीं हो सकते। ध्यान देने की बात है कि इस आहार के अलावा बच्चे घर में भी खाते ही होंगे। ऐसे में कुपोषण की गुजाइंश न के बराबर होनी चाहिए। 
-डॉ. सत्यानंद चौधरी, शिशु रोग विशेषज्ञ 

परियोजना    लाभुक बच्चे    कुपोषित  
मुशहरी सदर    22422    3761
मुशहरी ग्रामीण     19314    889
सकरा    19758    9402
कुढ़नी    28712    1382
बोचहां    13838    626
मीनापुर    19166    520
ढोली    6734    345
गायघाट    15170    1027
औराई    18870    752
कटरा    14948    1350
पारू    21608    171
सरैया    19758    531
बरुराज    23976    1060
कांटी    16502    667
बंदरा    9102    228
मड़वन    10730    211
साहेबगंज    15836    247

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  • Web Title:Nutrition of 6 60 crore every month in Bihar yet 27 thousand children are malnourished