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हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव: क्यूआर कोड से जान सकेंगे अब पेड़ों की पूरी जन्मकुंडली

अब पेड़ों की सुरक्षा क्यूआर कोड से की जाएगी। इतना ही नहीं, एप के माध्यम से पेड़ों की पूरी जन्मकुंडली जानी जा सकेगी। दिल्ली, इंदौर समेत विकसित नगर निगमों ने इसकी शुरुआत कर दी है। लेकिन, बिहार में राजगीर जंगल के पेड़ों से योजना की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद वाल्मीकिनगर समेत अन्य स्थानों के पेड़ों की सुरक्षा इस योजना के माध्यम से की जाएगी।

क्यूआर कोड व एप के माध्यम से पेड़ों का इतिहास-भूगोल मोबाइल की मदद से जान सकेंगे।  इसे एक विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए मोबाइल एप पर वृक्षों की पूरी जानकारी उपलब्ध करायी जाएगी। संभव है कि अगली तिमाही में पेड़ गणना कार्यक्रम शुरू किया जाए। सबसे पहले क्षेत्र में लगाए गए सभी पेड़ों की गिनती होगी। इस दौरान पेड़ की स्थिति (लोकेशन), उसके तने की मोटाई, उसका चंदोवा या कैनोपी कितनी फैली है, वह किस प्रजाति का है, उसकी उम्र कितनी है, फल-फूल कब आते हैं जैसी सारी जानकारियां एकत्रित की जाएंगी।  बाद में इन जानकारियों को डिजिटलाइज्ड कर मोबाइल एप पर उपलब्ध करायी जानी है। 

पेड़ की गणना व बेहतर सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड लगाने की योजना बनायी गयी है। इससे किसी भी पेड़ की सुरक्षा काफी आसान हो जाएगी। एप के माध्यम से कोई भी एड्रांयड धारक उस पेड़ की पूरी जानकारी ले सकेगा। क्यूआर स्कैन करते ही वृक्ष की आयु व तमाम जानकारियां मिल जाएंगी। -नेशामणि के, जिला वन पदाधिकारी, नालंदा 

यह होगा फायदा 
रोड निर्माण के लिए बाधक पेड़ों की स्थिति पहले से ही उपलब्ध होगी। पेड़ों की सही संख्या होने से अधिक नुकसान होने की दशा में कार्य योजना में बदलाव भी संभव हो जाएगा। सघन हरियाली वाले क्षेत्रों में गार्डन वेस्ट की प्लानिंग में भी मदद मिलेगी। कम हरियाली वाले क्षेत्रों का पता लगने पर अधिक प्लांटेशन करना आसान होगा। 

क्यूआर कोड क्या है 
क्यूआर कोड का फुल फॉर्म ‘क्विक रेस्पॉन्स’ कोड होता है। क्योंकि, इसे क्विकली रिड करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह ऐसा कोड है जिसे मशीन द्वारा ही पढ़ा जा सकता है। ये काले और सफ़ेद रंग में होता है। इसे टू-डी बारकोड भी कहते हैं। मोबाइल कैमरा की सहायता से इसे आसानी से स्कैन कर सकते हैं। इस कोड में 7,089 नंबर अथवा वीडियो और अन्य बड़ी फाइल भी स्टोर की जा सकती है। 30 फीसदी तक खराब होने के बाद भी कोड स्कैन हो सकता है। 

पेड़ काटने या गिराने की मिलेगी तत्काल सूचना 
सभी पेड़ों की जीपीएस मैपिंग की जाएगी। इसके कारण किसी पेड़ को काटने अथवा गिराने की जानकारी तुरंत मिल जाएगी। मानसून के समय तेज हवा और बारिश के चलते गिरे पेड़ों को सड़कों पर से हटाने में भी मदद मिलेगी। पेड़ पर लगेे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही एप के जरिए पेड़ की सारी जानकारी मिल जाएगी।  

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  • Web Title:Now the trees will be protected from the QR code in Bihar