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हिंदी न्यूज़ बिहारबिहार: विधायक अनंत सिंह को नहीं मिली राहत, पटना हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी 

बिहार: विधायक अनंत सिंह को नहीं मिली राहत, पटना हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी 

पटना। विधि संवाददाता Dinesh Rathour
Thu, 28 Oct 2021 07:30 PM
बिहार: विधायक अनंत सिंह को नहीं मिली राहत, पटना हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत अर्जी 

एके 47, 26 गोलियां और दो हैंडग्रेनेड बरामदगी मामले में मोकामा के निर्दलीय विधायक अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने विधायक की नियमित जमानत अर्जी खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अंजनी कुमार शरण की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद जमानत अर्जी खारिज की। गौरतलब है कि बाढ़ के एसएचओ को मिली सूचना पर विधायक के पैतृक घर पर छापेमारी हुई, लेकिन कोई भी ग्रामीण जब्ती का गवाह नहीं बना। बाद में सरकार के आदेश पर बीडीओ को मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया और बीडीओ ने जब्ती सूची पर बतौर गवाह हस्ताक्षर किया।

विधायक के वकील ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति पीके झा ने पिछले वर्ष जमानत देने से इनकार करते हुए नौ माह में ट्रायल प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था। साथ ही एसएसपी पटना को सभी गवाहों को गवाही के लिए कोर्ट में पेश करने का दायित्व सौंपा था। कोर्ट की ओर से तय समय सीमा के भीतर ट्रायल प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर जमानत देने की गुहार कोर्ट से लगाई गई। विधायक के वकील अजय ठाकुर ने कोर्ट को बताया कि विधायक के घर के बाहर से हथियार की बरामदगी की गई। यही नहीं, नौ माह के भीतर ट्रायल प्रक्रिया समाप्त करने के अदालती आदेश का भी पालन नहीं किया गया। विधायक के वकील ने बीमारी के आधार पर भी बेल देने का अनुरोध किया।

वहीं, सरकार की ओर से नियमित जमानत अर्जी का विरोध करते हुए एपीपी अजय मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि जब्ती सूची पर गवाह बनने के लिए कोई ग्रामीण सामने नहीं आया। विधायक ट्रायल प्रक्रिया में सहयोग नहीं करते। जेल अधिकारियों की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि कोई भी बात ऊंची आवाज में सुनते हैं और धीरे-धीरे बोलते हैं। यहां तक कि कोर्ट में प्रश्न किये जाने पर हाथों से इशारा कर जवाब देते हैं। बीमारी का बहाना कर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत बयान दर्ज नहीं करा रहे हैं। जबतक 313 के तहत बयान दर्ज नहीं हो जाता तब तक ट्रायल की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। पुलिस ने पांच माह के भीतर सभी गवाहों की गवाही करा दी है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील को सुनने के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी।
 

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