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हिंदी न्यूज़ बिहारसासाराम: ओमीक्रोन के खतरे के बीच जिले में तैयारी नदारद, चरम पर लापरवाही

सासाराम: ओमीक्रोन के खतरे के बीच जिले में तैयारी नदारद, चरम पर लापरवाही

लाइव हिन्दुस्तान,सासारामSudhir Kumar
Tue, 30 Nov 2021 12:44 PM
सासाराम: ओमीक्रोन के खतरे के बीच जिले में तैयारी नदारद, चरम पर लापरवाही

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कोरोना वायरस के नए वैरियंट के खतरे बीच जिला में लापरवाही चरम पर है। हर स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है। सरकारी दफ्तरों से लेकर प्राइवेट संस्थानों में भी कोरोना गाइडलाइन की अनदेखी की जा रही है। मास्क का प्रयोग लोग भूल गए हैं।

बाजार, बैंक, अस्पताल के अलावा कई सार्वजनिक जगहों पर कोरोना गाइड लाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। कोरोना के नए वैरियंट ओमीक्रोन ने शासन की चिंता बढ़ा दी है। लेकिन, कोरोना से निपटने के लिए जिला में स्वास्थ्य व्यवस्था नदारद है।कोरोना के खिलाफ जंग में स्वास्थ्य विभाग मुस्तैदी से लगा है। कोरोना टीकाकरण अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। जिला में करीब 75 फीसदी लोगों को टीका लगाया जा चुका है। शत-प्रतिशत टीकाकरण के लिए विभाग घर-घर अभियान चला रहा है। लेकिन, कोरोना की रफ्तार थमने के साथ ही लोग कोरोना के गाइड लाइन का पालन करना भूल गए हैं। सरकारी दफ्तरों में भी बिना मास्क के लोग काम कर रहे हैं।

कहते हैं अधिकारी

प्रभारी सीएस डॉ. केएन तिवारी ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। कोरोना जांच भी ज्यादा से ज्यादा की जा रही है।

16 सैंपल की हुई हो चुकी जांच

कोरोना संक्रमण की पहचान के लिए शुरू की गई कोविड जांच में अबतक करीब 16.15 लाख सैंपल की जांच की जा चुकी है। जांच में चौदह हजार से ज्यादा लोगों रिपोर्ट पॉजेटिव पायी गई थी। हालांकि, रिकॉवरी रेट 97.21 फीसदी होने से करीब 13851 लोग स्वस्थ्य हो गए हैं। करीब 397 लोगों की कोरोना से मौत भी हुई है। फिलवक्त जिला में केवल एक एक्टिव केस है।

जिले में प्रवासियों की जांच घटी

प्रवासियों की कोरोना जांच का दायरा हाल के दिनों में सिमटता जा रहा है। फिलहाल रेलवे स्टेशन पर करीब दो सौ से भी कम प्रवासियों की जांच हो रही है। कोरोना के नए वैरियंट के खतरे को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी में विभाग जुट गया है।

ऑक्सीजन की कमी से हुई थी कई मौतें

कोरोना की दूसरे लहर में सबसे ज्यादा मौतें ऑक्सीजन की कमी से हुई थीं। परिजन अपनों की जान बचाने के लिए सेलिेंडर की व्यवस्था में करते थे। इससे ऑक्सीजन की कालाबाजारी शुरू हो गई थी। मुंहमांगी कीमत देकर लोग ऑक्सीजन के सिलेंडर खरीदते थे। बावजूद इसके ऑक्सीजन के आभाव में कई लोग ने दम तोड़ दिए थे। ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए सरकारी अस्पतालों में जनरेटर प्लांट लगाया गया है। लेकिन, काम में सुस्ती के चलते जनरेटर प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति वार्ड तक शुरू नहीं हो सकी है।


 

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