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बिहार में राजनीतिक मौसम बदल रहा है? 100 दिन में 10 संकेतों से नीतीश-लालू की खटपट बन गई खाई

बिहार में राजनीतिक मौसम और सत्ता समीकरण बदलने की अटकलों के बीच बीजेपी, जेडीयू और आरजेडी में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में हैं।

बिहार में राजनीतिक मौसम बदल रहा है? 100 दिन में 10 संकेतों से नीतीश-लालू की खटपट बन गई खाई
Ritesh Vermaलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीThu, 25 Jan 2024 07:37 PM
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बिहार में राजनीतिक मौसम बदलने की आहट के बीच सत्ता समीकरण में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। पटना से दिल्ली तक बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, प्रभारी विनोद तावड़े समेत बिहार के कई सीनियर नेताओं को दिल्ली बुलाया है जिनकी शाम में गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात होगी। पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सीनियर नेताओं और मंत्रियों की बैठक हुई है। वहीं पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर लालू यादव और तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के टॉप नेताओं की मीटिंग बुला ली है।

याद दिला दें कि पूर्व सीएम और हम नेता जीतनराम मांझी दावा करते रहे हैं कि खरमास के बाद खेला होगा। केंद्रीय मंत्री और रालोजपा अध्यक्ष पशुपति पारस ने भी कहा था कि जनवरी के अंत तक जो होगा वो बिहार के लिए अच्छा होगा।

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ये बातें बहुत से लोग कह रहे थे लेकिन 16 अक्टूबर के बाद से आज तक 100 दिनों में लालू यादव और नीतीश कुमार ने कम से कम 10 ऐसे हिंट दिए जिससे यह झलकता रहा कि महागठबंधन सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। 16 अक्टूबर को नीतीश लालू से मिलने राबड़ी आवास गए थे और उसके बाद सीधे 15 जनवरी को 90 दिन बाद दही-चूड़ा भोज खाने गए। 

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1. शिक्षक भर्ती नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में बैकड्रॉप पर तेजस्वी यादव का फोटो नहीं 

सवा लाख नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने के लिए 2 नवंबर को आयोजित सरकारी कार्यक्रम में मंच पर जो बैकड्रॉप लगा था उसमें सिर्फ नीतीश कुमार का फोटो था, तेजस्वी यादव का नहीं। तब से शिक्षकों की भर्ती को लेकर जेडीयू और आरजेडी के बीच क्रेडिट वार छिड़ गया। इस कार्यक्रम से 13 दिन पहले नीतीश ने तेजस्वी के कंधे पर हाथ रखकर कहा था कि यही बच्चा हमारा सब कुछ है।

2. सीपीआई की रैली में नीतीश का कांग्रेस पर हमला, लालू-तेजस्वी अगले दिन सीएम आवास गए

इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे पर देरी से नाराज नीतीश कुमार ने 2 नवंबर को पटना में सीपीआई की रैली में कांग्रेस पर सीधा हमला बोल दिया था। नीतीश ने कहा था कि हम सब कांग्रेस को बढ़ाने में लगे हैं लेकिन लगता है कि उसकी दिलचस्पी इसमें नहीं है। इसके अगले दिन लालू और तेजस्वी सीएम आवास गए थे जहां कांग्रेस से बात करने का काम नीतीश ने आरजेडी को सौंपा था। लेकिन कांग्रेस की तरफ से सीट बंटवारे पर कोई हरकत 19 दिसंबर तक नहीं हुई जब गठबंधन की चौथी बैठक दिल्ली में बुलाई गई।

3. दिसंबर में इंडिया गठबंधन की मीटिंग में लालू और नीतीश का अलग-अलग दिल्ली जाना-आना

तीन महीने से ज्यादा अंतराल पर जब इंडिया गठबंधन की चौथी बैठक 19 दिसंबर को दिल्ली में बुलाई गई तो मुंबई और बेंगलुरु की दो बैठकों की तरह लालू और नीतीश एक साथ नहीं गए। दोनों अलग गए। दिल्ली में रुके। फिर अलग-अलग पटना लौटे।

4. ललन सिंह का जेडीयू अध्यक्ष पद से इस्तीफा, नीतीश कुमार का पार्टी की कमान संभालना

जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठकों के दौरान ललन सिंह का जेडीयू अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना भी एक बड़ा संकेत था। बीजेपी के नेता आरोप लगा रहे थे कि तेजस्वी यादव को सीएम बनाने के लिए ललन सिंह आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की मदद कर रहे थे। ऐसे में नीतीश ने पार्टी का कंट्रोल पूरी तरह अपने हाथ में ले लिया। यह इसलिए भी जरूरी थी कि अगर जेडीयू को आगे चलकर गठबंधन को लेकर कोई बड़ा फैसला लेना हो तो बतौर पार्टी अध्यक्ष वो ऐसा कर सकें।

5. पटना में रहकर 90 दिन लालू यादव से मिलने राबड़ी आवास नहीं गए नीतीश कुमार

नीतीश कुमार और लालू यादव अक्टूबर मध्य तक लगातार एक-दूसरे के आवास पर आ और जा रहे थे। 16 अक्टूबर को नीतीश राबड़ी आवास आखिरी बार गए। उसके बाद वो सीधे 90 दिन बाद 15 जनवरी को दही चूड़ा का भोज खाने गए, वहां भी दस मिनट ही रुके। बीच में 3 नवंबर को एक दिन लालू सीएम आवास गए थे जब एक दिन पहले सीपीआई की रैली में नीतीश ने कांग्रेस पर हमला बोल दिया था।

6. लालू यादव का नीतीश को दही का टीका नहीं लगाना

आरजेडी के दही-चूड़ा भोज में दस मिनट के लिए पहुंचे नीतीश कुमार को इस बार लालू यादव ने दही का टीका नहीं लगाया। जबकि इससे पहले 2016 और 2017 में लालू ने नीतीश को दही का टीका लगाया था। हालांकि 2017 में टीका लगाने के छह महीने बाद जुलाई में नीतीश वापस बीजेपी के साथ चले गए थे।

7. नीतीश द्वारा चंद्रशेखर समेत आरजेडी मंत्रियों का विभाग बदलना

नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह धार्मिक तौर पर विवादित बयान देने वाले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर समेत तीन मंत्रियों का विभाग बदल दिया। तीनों मंत्री आरजेडी के थे। आलोक मेहता को नया शिक्षा मंत्री बनाया गया। इससे पहले लालू यादव और तेजस्वी सीएम आवास गए थे। माना गया कि नीतीश ने लालू को आरजेडी के मंत्रियों के मंत्रालय में फेरबदल के लिए तैयार रहने कह दिया था।

8. कर्पूरी ठाकुर पर अलग-अलग कार्यक्रम

कर्पूरी ठाकुर की समाजवादी राजनीति से ही निकले नीतीश कुमार और लालू यादव की पार्टी ने गठबंधन के बावजूद कर्पूरी जन्मशती पर अलग-अलग कार्यक्रम किया। सामान्य हालात में नीतीश सीपीआई की रैली की तरह आरजेडी के कार्यक्रम में जा सकते थे और लालू जेडीयू के समारोह में शामिल हो सकते थे। कर्पूरी की विरासत की राजनीति पर अलग-अलग कार्यक्रम से दोनों ने दावेदारी पेश की।  

9. कर्पूरी ठाकुर जन्मशती रैली में परिवारवाद पर नीतीश का हमला 

जेडीयू के कर्पूरी ठाकुर जन्मशती समारोह में नीतीश कुमार ने कर्पूरी का हवाला देते हुए कहा कि ठाकुर ने कभी अपने परिवार को राजनीति में आगे नहीं बढ़ाया। सीएम ने कहा कि वो भी कर्पूरी से प्रेरणा लेकर ही अपने परिवार को राजनीति में नहीं बढ़ाए हैं। आजकल तो सब लोग परिवार को बढ़ाने में लगा रहता है। इस बयान को लालू यादव और तेजस्वी यादव से जोड़कर देखा गया।

10. लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का इशारों में नीतीश के खिलाफ ट्वीट

25 जनवरी की सुबह लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक के बाद एक तीन ट्वीट किए। रोहिणी ने बिना किसी का नाम लिए नीतीश पर हमला बोला। उनकी बात का मतलब निकला कि नीतीश फिर पलटने वाले हैं। बात नीतीश तक पहुंची तो उन्होंने गुस्सा जाहिर किया। फिर रोहिणी ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

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सूत्रों का कहना है कि नीतीश लोकसभा चुनाव से पहले जेडीयू के लिए उपलब्ध विकल्पों को तौल रहे हैं। एक तरफ आरजेडी है और दूसरी तरफ बीजेपी। बीजेपी से जुड़े सूत्र कह रहे हैं कि वो जेडीयू को एनडीए में लेने के लिए तैयार हैं लेकिन नीतीश को मुख्यमंत्री पद छोड़कर बीजेपी के किसी नेता को सीएम स्वीकार करना होगा। नीतीश इसके लिए तैयार नहीं होंगे। आरजेडी की तरफ से भी नीतीश को मनाने का काम चल रहा है। नीतीश और लालू के करीबी अली अशरफ फातमी सीएम आवास गए थे। चर्चा ये भी है कि सम्मानजनक विकल्प ना मिलने की सूरत में नीतीश विधानसभा भंग भी कर सकते हैं।

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