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हिंदी न्यूज़ बिहारयूपी की तर्ज पर बिहार में भी गन्‍ना मूल्‍य बढ़ाएगी नीतीश सरकार, जानिए प्रति क्विंटल कितना हो सकता है रेट

यूपी की तर्ज पर बिहार में भी गन्‍ना मूल्‍य बढ़ाएगी नीतीश सरकार, जानिए प्रति क्विंटल कितना हो सकता है रेट

मुकेश बालयोगी,पटना Ajay Singh
Thu, 21 Oct 2021 07:09 AM
यूपी की तर्ज पर बिहार में भी गन्‍ना मूल्‍य बढ़ाएगी नीतीश सरकार, जानिए प्रति क्विंटल कितना हो सकता है रेट

सब ठीक रहा तो प्रदेश के किसानों को उत्तम गुणवत्ता के गन्ने की कीमत 350 रुपए क्विंटल की दर से मिल सकती है। अभी फिलहाल 315 रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों को चीनी मिल भुगतान कर रहे हैं। इसी तरह सामान्य गन्ने की कीमत 340 रुपए प्रति क्विंटल तक हो सकती है। राज्य में पिछली बार यह कीमत 295 रुपए तय की गई थी। चीनी मिलों के गेट पर और बाहरी केंद्रों पर गन्ने खरीदने में भी भुगतान का अंतर होगा। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हाल में बढ़ाई गई इन नई दरों की तर्ज पर ही बिहार सरकार भी गन्ना का मूल्य निर्धारित करने की तैयारी कर रही है।

बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश सरकार से गन्ने की नई कीमत का पूरा ब्योरा मांगा गया है। गन्ना उद्योग विभाग की तैयारी पर अगर सहमति बनी तो लाखों किसानों को तोहफा मिल सकता है। किसानों की ओर से लगातार गन्ने का मूल्य बढ़ाने की मांग की जा रही है। राज्य सरकार को बिहार शुगर मिल एसोसिएशन के साथ भी बैठक कर सहमति बनानी होगी।

यह होगा फायदा

किसानों को गन्ने की उचित कीमत मिल सकेगी। इससे उनके जीवनस्तर में इजाफा होगा। उनकी क्रय शक्ति बढ़ने से राज्य की अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी।इस साल फरवरी में 2020-21 के गन्ना पेराई सत्र के लिए राज्य सरकार ने गन्ने के मूल्य में प्रति क्विंटल पांच रुपए की वृद्धि की थी। इसके अलावा सरकार ने प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस देने का भी फैसला लिया था। बिहार शुगर मिल एसोसिएशन की सहमति से यह फैसला लिया गया था। अब सरकार अगले सत्र के लिए गन्ने की कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही सरकार

राज्य सरकार की ओर से गन्ना की कीमत बढ़ाने में हाईकोर्ट के एक फैसले की बाधा है। इसके तहत राज्य सरकार को एफआरपी यानी फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस के आधार पर गन्ने की कीमत तय करनी है। जबकि राज्य सरकार एसएपी यानी स्टेट एडवाइस्ड प्राइस के आधार पर गन्ने की कीमत तय करना चाहती है। शुगर मिल मालिक एफआरपी के आधार पर गन्ने की कीमत दिए जाने के पक्ष में हैं। जबकि किसानों को ज्यादा मूल्य एसएपी के आधार पर मिलेगा। इसलिए बिहार सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी कर रही है।

क्या है एफआरपी

केंद्रीय कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की ओर से गन्ने के साथ ही दूसरे कृषि उत्पादों के लिए मानक मूल्य यानी एफआरपी तय की जाती है। जिसमें किसानों की लागत और उनके श्रमबल का ध्यान रखा जाता है।

क्या है एसएपी

स्टेट एडवाइस्ड प्राइस केंद्रीय कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की ओर से तय एफआरपी में अतिरिक्त मूल्य जो़ड़कर तय की जाती है। यह राज्य सरकार की ओर से तात्कालिक और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

 

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