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आरजेडी 28, कांग्रेस और लेफ्ट 6-6; नीतीश के निकलने के बाद महागठबंधन में नया सीट शेयरिंग फॉर्मूला : सूत्र

नीतीश कुमार के एनडीए में वापसी के बाद महागठंबधन में नया सीट शेयरिंग फॉर्मूला तैयार हो रहा है। इसमें आरजेडी सर्वाधिक 28, कांग्रेस एवं लेफ्ट पार्टियां 10 से 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार सकती हैं।

आरजेडी 28, कांग्रेस और लेफ्ट 6-6; नीतीश के निकलने के बाद महागठबंधन में नया सीट शेयरिंग फॉर्मूला : सूत्र
Jayesh Jetawatअनिर्बन गुहा रॉय, एचटी,पटनाSat, 17 Feb 2024 11:22 PM
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बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आरजेडी और कांग्रेस से अलग होने के बाद महागठबंधन में सीट शेयरिंग का नया फॉर्मूला बनने जा रहा है। जेडीयू के अलग होने से आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को अब ज्यादा सीटें लड़ने को मिलेंगी। सूत्रों के मुताबिक लालू यादव की पार्टी आरजेडी राज्य की 28 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। वहीं, कांग्रेस को 6 एवं इतनी ही सीटें लेफ्ट पार्टियों को देने के मूड में है। इनमें से सीपीआई माले को 3 से 4 और सीपीएम एवं सीपीआई को भी एक-एक सीट मिल सकती है। 

सीपीआई माले के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी ने दो दिन पहले आरजेडी के प्रदेश नेतृत्व को अपना संशोधित प्रस्ताव भेजा है। इसमें पहले की तुलना में अधिक संख्या में सीटें मांगी गई हैं। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि सीपीआई माले ने अब कितनी सीटों पर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा है। जब जेडीयू महागठबंधन में थी तब माले ने आरजेडी से आरा, पाटलिपुत्र और सीवान समेत बिहार की पांच लोकसभा सीटों पर दावा पेश किया था। 

सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार की जेडीयू के एनडीए में जाने के बाद सीपीआई माले बिहार की 9 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। इसमें से कटिहार लोकसभा सीट भी शामिल है, जिसपर कांग्रेस की नजर है। लेफ्ट पार्टी कटिहार पर अपना मजबूत दावा पेश कर रही है। यहां से सीपीआई माले अपने वरिष्ठ नेता एवं विधायक महबूब आलम को उतारना चाहती है।

माले के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी पार्टी के कटिहार लोकसभा सीट जीतने की प्रबव संभावना है। हमने इस साल राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए अपना एक सीट का दावा भी छोड़ दिया। इसके बदले में हम चाहते हैं कि महागठबंधन कटिहार सीट हमें देकर हमारी मांग का सम्मान किया जाए।

जेडीयू के बाहर होने के बाद महागठबंधन में लोकसभा चुनाव के सीट बंटवारे की नई चुनौती खड़ी हो गई है। आरजेडी नेताओं ने कहा कि बिहार की 40 में से करीब दर्जन भर सीटों पर पुनर्समायोजन हो सकता है। क्योंकि पहले जेडीयू की 17 सीटों की मांगों को ध्यान में रखते हुए फॉर्मूला तैयार किया जा रहा था। नीतीश की पार्टी जब महागठबंधन में थी तब 17:17:5:1 के फॉर्मूले पर बात चल रही थी। इसके तहत आरजेडी और जेडीयू को 17-17, कांग्रेस को पांच और सीपीआई माले को एक सीट दिए जाने की चर्चा थी। 

आरजेडी के अंदरुनी सूत्रों ने बताया है कि लालू और तेजस्वी यादव बिहार में नए सीट शेयरिंग फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। इसके तहत आरजेडी 28 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि कांग्रेस को 5 से 6 सीटें दी जा सकती हैं। वहीं, सीपीआई माले को तीन, जबकसि सीपीआई और सीपीएम को एक-एक सीट दिए जाने का प्लान है। पिछले फॉर्मूले में सीपीआई और सीपीएम को एक भी सीट नहीं दी जा रही थी।

आरजेडी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि नीतीश कुमार के अलग होने के बाद उनकी पार्टी कम से कम 28 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। कांग्रेस और लेफ्ट के सहयोगियों के लिए 10 से 11 सीटें छोड़ी जा सकती हैं। अगर कोई अन्य दल गठबंधन में शामिल होते हैं तो उनके लिए एक सीट आरक्षित की जाएगी। 

बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी को सीट बंटवारे में 20 सीटें मिली थीं, उसने अपने कोटे से सीपीआई माले के लिए एक सीट छोड़ी थी। वहीं कांग्रेस ने 9, जीतनराम मांझी की HAM ने तीन, मुकेश सहनी की वीआईपी ने तीन और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने पांच सीटों पर चुनाव लड़ा था। मांझी और कुशवाहा अब एनडीए का हिस्सा हो गए हैं, जबकि सहनी ने गठबंधन को लेकर अभी पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि, पिछले चुनाव में महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा, एनडीए ने 40 में से 39 सीटों पर जीत दर्ज की। महागठबंधन से सिर्फ कांग्रेस ही एक सीट जीत पाई थी।

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