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Hindi News बिहारआखिरी चरण में 6 सीटें हारा NDA, क्या काराकाट में राजपूत गोलबंदी से एंटी-पोलराइज हुए पिछड़े?

आखिरी चरण में 6 सीटें हारा NDA, क्या काराकाट में राजपूत गोलबंदी से एंटी-पोलराइज हुए पिछड़े?

बिहार में जिन 10 लोकसभा सीटों पर बीजेपी-जेडीयू के एनडीए को हार मिली, उनमें से 6 सीटों पर आखिरी चरण में मतदान हुआ था। इन पर राजपूत और पिछड़ा वोट के फैक्टर ने महागठबंधन के पक्ष में काम किया।

आखिरी चरण में 6 सीटें हारा NDA, क्या काराकाट में राजपूत गोलबंदी से एंटी-पोलराइज हुए पिछड़े?
rjd leader tejashwi yadav
Jayesh Jetawatलाइव हिन्दुस्तान,पटनाThu, 06 Jun 2024 08:30 PM
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बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 के आखिरी चरण में एनडीए को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। आखिरी चरण की 8 में से 6 सीटों पर बीजेपी और जेडीयू उम्मीदवारों की हार हुई और महागठबंधन से आरजेडी, कांग्रेस और सीपीआई माले ने अपना परचम लहराया। आखिरी चरण में जहानाबाद, पाटलिपुत्र, काराकाट, सासाराम, बक्सर, पटना साहिब और नालंदा में 1 जून को वोटिंग हुई थी। काराकाट में बीजेपी के बागी निर्दलीय पवन सिंह के उतरने से राजपूत वोटों की गोलबंदी हुई, जिसका खामियाजा एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा को भुगतना पड़ा और त्रिकोणीय मुकाबले में सीपीआई माले के राजाराम सिंह जीत गए। अब सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या पवन सिंह फैक्टर का असर काराकाट के अलावा आसपास की अन्य लोकसभा सीटों पर भी पड़ा, जिनपर राजपूतों की गोलबंदी से पिछड़े वोट एनडीए से छिटककर महागठबंधन के पक्ष में चले गए।

लोकसभा चुनाव 2024 में महागठबंधन ने बिहार में कुल 9 सीटों पर जीत दर्ज की। लालू प्रसाद एवं तेजस्वी यादव की आरजेडी के खाते में औरंगाबाद, जहानाबाद, बक्सर और पाटलिपुत्र गई। कांग्रेस ने सासाराम, कटिहार और किशनगंज पर जीत दर्ज की। वहीं, सीपीआई माले ने काराकाट और आरा में परचम लहराया। महागठबंधन ने जिन 9 सीटों पर जीत दर्ज की उनमें से 6 सीटें आखिरी चरण की हैं। चुनावी जानकार इसका अलग-अलग विश्लेषण करने में लगे हैं। आखिरी चरण के मतदान से पहले पवन सिंह फैक्टर के अलावा छपरा कांड और पटना स्टूडेंट मर्डर ने भी असर डाला।

छपरा में पांचवें चरण के मतदान के दौरान बीजेपी और आरजेडी के समर्थकों में भिड़ंत्त हुई थी। इसमें आरजेडी के एक कार्यकर्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। जानकारों की मानें तो इससे भी पिछड़ा वर्ग के एकजुट होकर महागठबंधन की ओर खिसकने की संभावना रही। वहीं, पटना यूनिवर्सिटी में एक छात्र की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले ने भी काफी सियासी तूल पकड़ा। मृतक और आरोपी दोनों ओबीसी वर्ग से थे। माना जा रहा है कि इसका असर भी आखिरी चरण की वोटिंग पर पड़ा और महागठबंधन के पक्ष में पिछड़ा वर्ग की गोलबंदी हुई। 

मगध और शाहाबाद क्षेत्र में एनडीए को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा। इसकी वजह जातिगत समीकरण और स्थानीय मुद्दे भी बताए जा रहे हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन ने इस क्षेत्र में एनडीए को कई सीटों पर मात दी थी। इस बार भी आरजेडी, कांग्रेस और सीपीआई माले का गठजोड़ इस क्षेत्र में काम कर गया। आरा से मोदी के मंत्री आरके सिंह चुनाव हार गए। काराकाट में पवन सिंह को हार झेलनी पड़ी। पाटलिपुत्र से बीजेपी के दिग्गज रामकृपाल यादव भी हारे। 

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बिहार का 'चित्तौड़गढ़' कही जाने वाली औरंगाबाद लोकसभा सीट पर शुरुआती चरण में वोटिंग हुई थी। दक्षिण बिहार की इस सीट पर भी आरजेडी ने पहली बार जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया। लालू यादव का कुशवाहा फैक्टर औरंगाबाद में काम कर गया। चुनावी इतिहास में पहली बार गैर-राजपूत उम्मीदवार अभय कुशवाहा इस सीट से जीते।