800 साल बाद जीवंत हुआ नालंदा विश्वविद्यालय, पीएम मोदी ने नए कैंपस का लोकार्पण किया, जानें खासियतें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस का लोकार्पण किया। 800 साल बाद बिहार फिर से पूरी दुनिया के ज्ञान के केंद्र के रूप में पहचान बनाएगा।

पूरी दुनिया में शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा नालंदा विश्वविद्यालय करीब 800 सालों के बाद फिर से जीवंत हो उठा है। 17 देशों के सहयोग से भारत सरकार ने राजगीर के पास नालंदा विश्वविद्यालय का नया कैंपस बनाया, जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को लोकार्पण किया। इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और 17 देशों के राजदूत समेत अन्य कई मेहमान मौजूद रहे। नालंदा यूनिवर्सिटी का नया कैंपस कई मायनों में खास है, इसमें परंपरा को बनाए रखते हुए छात्र-छात्राओं को अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं।
पीएम मोदी ने अपने भाषण में नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस के निर्माण में सहयोग करने वाले सभी देशों का शुक्रियादा किया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि नालंदा सिर्फ भारत का पुनर्जागरण नहीं है, इससे कई देशों की विरासत जुड़ी हुई है। नालंदा यूनिवर्सिटी के पुनर्निर्माण में साथी देशों की भागीदारी भी रही है।
दरअसल, 2007 में हुए पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के दौरान प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने पर चर्चा उठी थी। इसके बाद भारत की तत्कालीन यूपीए सरकार ने 2010 में नालंदा विश्वविद्यालय अधिनियम पारित कराया। 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 19 सितंबर 2014 को नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस की नींव रखी। लगभग 9 साल के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार 19 जून 2024 को इस कैंपस का लोकार्पण किया।
नालंदा यूनिवर्सिटी के नए कैंपस की खासियत
यह परिसर ऐतिहासिक नगरी राजगीर की पंच पहाड़ियों में से एक वैभारगिरि की तलहटी में बनाया गया है। करीब 455 एकड़ में फैले नए कैंपस में 1750 करोड़ रुपये की लागत से नए भवनों और अन्य सुविधाओं का निर्माण किया गया। अभी इस कैंपस का काम चल रहा है। नालंदा यूनिवर्सिटी के कैंपस में 24 इमारतें हैं।
प्राकृतिक छटाओं और पानी से गिरा है नया कैंपस
प्रकृति की गोद में बसा नालंदा विश्वविद्यालय के नए कैंपस का नजारा बहुत मनमोहक है। इस परिसर के एक चौथाई हिस्से में पानी है। विभिन्न भवनों के आसपास जलाशय बनाए गए हैं। जो बिहार की पारंपरिक आहर पईन जल संयन प्रणाली पर आधारित हैं। यानी कि इस कैंपस में आधुनिकता के साथ परंपरा का भी संगम देखने को मिलता है।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


