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2 दिसंबर, 2020|5:19|IST

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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस : बृजेश ठाकुर की जुर्माना स्थगित करने की मांग का सीबीआई ने किया विरोध

Brijesh thakur

मुजफ्फरपुर आश्रय गृह में लड़कियों से यौन उत्पीड़न करने की जुर्म में सजा काट रहे बृजेश ठाकुर की उस मांग का सीबीआई ने मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में विरोध किया है, जिसमें उसने जुर्माना लगाने के निचली अदालत के आदेश को स्थगित करने की मांग की है। निचली अदालत ने ठाकुर को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए 32 लाख रुपए जुर्माना भी भरने का आदेश दिया है।

जस्टिस विपीन सांघी और रजनीश भटनागर की पीठ के समक्ष सीबीआई ने कहा कि ठाकुर पर जुर्माना लगाने में किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं बरता गया है। सीबीआई ने कहा कि दोषी को यौन उत्पीड़न, षडयंत्र और अपहरण के कई गंभीर मामलों के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

सीबीआई ने अपने जवाब में कहा कि जुर्माना उचित और न्याय हित में है तथा ठाकुर इस जुर्माने का भुगतान करने के लिए बाध्य है। सीबीआई का जवाब अदालत के रिकॉर्ड पर नहीं आने आ पया। इस पर पीठ ने सीबीआई के वकील को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जवाबी हलफनामा उसके समक्ष रखा जाए। इसके साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।

हाईकोर्ट बृजेश ठाकुर और मामले में दूसरे दोषी तथा बाल कल्याण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप वर्मा की अपील पर सुनवाई कर रहा है। निचली अदालत ने दोनों दोषियों को ताउम्र जेल में ही रखने की सजा सुनाई है। इस मामले में निचली अदालत का रिकार्ड 86,000 पन्नों का है। इस लिए हाईकोर्ट ने वर्मा की ओर पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर और ठाकुर की ओर से पेश वकील प्रमोद कुमार दुबे को संबंधित दस्तावेजों का संकलन कर उन्हें पेश करने का भी निर्देश दिया है। 

मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषी ब्रजेश ठाकुर ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। न्यायालय में दाखिल अपील में ठाकुर ने निचली अदालत द्वारा 20 जनवरी, 2020 को दोषी ठहराए जाने और 11 फरवरी को उम्रकैद की सजा दिए के फैसले को रद्द करने की मांग की है।

साकेत स्थित विशेष अदालत ने बालिका गृह में कई नाबालिग लड़कियों से यौन शोषण के आरोप में ठाकुर सहित 19 लोगों को दोषी ठराया था। अदालत ने प्रमुख दोषी ब्रजेश ठाकुर को ताउम्र (अंतिम सांस तक जेल में बिताने) की सजा सुनाई थी। निचली अदालत ने ठाकुर को इस मामले में कैद के अलावा 32.20 लाख रुपए का जुर्माना भी जमा करने का आदेश दिया था। अपील में ठाकुर ने कहा कि विशेष न्यायाधीश ने मामले की जल्दबादी में सुनवाई की है और आरोप लगाया है कि संविधान के तहत मिले निष्पक्ष एवं स्वतंत्र सुनवाई के अधिकार से उसे वंचित रखा गया है। 

पुरुषत्व क्षमता का टेस्ट (पोटेंसी) नहीं कराने को बनाया आधार
ब्रजेश ठाकुर ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करने के लिए मामले में बिहार पुलिस या सीबीआई द्वारा उसके पुरुषत्व क्षमता की जांच नहीं कराए जाने को आधार बनाया है। अपील में कहा गया है कि दुष्कर्म के मामले में अभियोजन पक्ष को आरोपी का पुरुषत्व क्षमता को स्थापित करना अनिवार्य है वह दुष्कर्म करने के योग्य है या नहीं। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसमें कहा गया है कि निचली अदालत ने इन तथ्यों की अनदेखी कर दी। साथ ही कहा है कि निचली अदालत ने इन तथ्यों को दरकिनार कर दिया कि आरोपी की उम्र 50 साल से अधिक है और मधुमेह की बीमारी से ग्रसित है, ऐसे में उसका (ठाकुर) का पुरुषत्व क्षमता की जांच किए बगैर दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।

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  • Web Title:Muzaffarpur shelter home case : CBI opposes Brijesh Thakur demand for postponed of penalty