ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News बिहारटिकट बंटवारे में मुसलमानों की अनदेखी; BJP-RJD-JDU से खफा मुस्लिम संस्थाएं, लगाए ये आरोप

टिकट बंटवारे में मुसलमानों की अनदेखी; BJP-RJD-JDU से खफा मुस्लिम संस्थाएं, लगाए ये आरोप

लोकसभा चुनाव में सियासी दलों द्वारा टिकट बंटवारे में मुसलमानों की अनदेखी को लेकर मुस्लिम संस्थाओं ने बीजेपी, आरजेडी, जेडीयू से नाराजगी जताई है। और कहा कि मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझा गया है।

टिकट बंटवारे में मुसलमानों की अनदेखी; BJP-RJD-JDU से खफा मुस्लिम संस्थाएं, लगाए ये आरोप
Sandeepअनिरबन गुहा रॉय,पटनाSat, 13 Apr 2024 02:03 PM
ऐप पर पढ़ें

लोकसभा चुनाव 2024 के मद्देनजर भले ही सियासी दल मुस्लिम अल्पसंख्यकों के वोटों पर नजर बनाए रखे हो। लेकिन टिकट बंटवारे में मुस्लिम उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व कम मालूम पड़ रहा है। फिर चाहे वो आरजेडी हो, जेडीयू हो, कांग्रेस या भाजपा हो। यही वजह है कि मुस्लिम समुदाय बिहार के सियासी दलों से चिढ़ा हुआ मालूम पड़ रहा है।

तमाम उम्मीदवारों की प्रत्याशियों की लिस्ट पर एक नजर डालें तो, राजद ने अपनी 22 आधिकारिक उम्मीदवारों की सूची में से दो मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, आरजेडी 23 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि जेडीयू ने केवल एक सीट किशनगंज से मुजाहिद आलम को दी है। राजद के उम्मीदवार शाहनवाज आलम अररिया से प्रत्याशी हैं। और मो. अली अशरफ फातमी मधुबनी से कैंडिडेट हैं।  

कांग्रेस की ओर से नौ सीटों में से दो मुस्लिम उम्मीदवारों की घोषणा की गई है, जिसमें पूर्व सांसद तारिक अनवर और मोहम्मद जावेद हैं। भाजपा ने 17 सीटों में से किसी को भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं बनाया है। बीजेपी जदयू और एनडीए के अन्य सहयोगियों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।

वहीं बिहार में 11 सीटों पर चुनाव लड़ रही एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) कम से कम पांच मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी में है। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता आदिल हसन ने कहा, हम कम से कम 11 सीटों में से पांच मुस्लिम उम्मीदवार देने जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा पिछले साल किए गए नवीनतम जाति सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की 13 करोड़ आबादी में मुस्लिम 17.7% हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 2019 के संसदीय चुनावों में बिहार से कुल दो सांसद चुने गए, जिनके नाम मोहम्मद जावेद (किशनगंज से कांग्रेस) और चौधरी महबूद अली कैसर (लोक जनशक्ति पार्टी - खगड़िया) से थे। 2019 के चुनावों में राजद ने चार मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जबकि कांग्रेस ने तीन को मैदान में उतारा था। 2014 के संसदीय चुनावों में, बिहार से चार मुस्लिम सांसद चुने गए, जबकि 2009 के संसदीय चुनावों में, तीन मुस्लिम सांसद चुने गए।

बिहार में प्रमुख दलों द्वारा टिकट वितरण में मुस्लिम उम्मीदवारों के कम प्रतिनिधित्व पर नाराजगी व्यक्त करते हुए, इमारत-ए-शरिया, बिहार, झारखंड और ओडिशा के महासचिव मौलाना शिबली अल कासमी ने कहा कि राज्य सरकार ने जाति आधारित सर्वेक्षण कराया था। जिससे सभी वर्गों के लोगों के उत्थान में मदद मिलेगी। लेकिन मैं सिर्फ यह पूछना चाहता हूं, कि मुसलमानों के मामले में जाति आधारित सर्वेक्षण के मकसद का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों ने आगामी लोकसभा चुनावों में समुदाय से टिकट वितरण में प्रतिनिधित्व देने के मामले में मुस्लिम आबादी को नजरअंदाज कर दिया है।

जमीयत उलेमा, बिहार के सचिव अनवारुल होदा ने कहा कि टिकट वितरण में मुसलमानों का कम प्रतिनिधित्व यह दर्शाता है कि कैसे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों ने मुस्लिम समुदाय को एक बंधक वोट बैंक समझ लिया है। क्षेत्रीय या राष्ट्रीय पार्टियों ने टिकट वितरण में मुसलमानों को कम महत्व देना शुरू कर दिया है क्योंकि वे जानते हैं कि अल्पसंख्यकों के पास बहुत कम विकल्प हैं। पार्टियों का मानना ​​है कि मुसलमान सिर्फ वोट बैंक हैं और वे किसी भी परिस्थिति में कुछ खास पार्टियों को ही वोट देंगे। यह एक दुखद तस्वीर है और इसके लिए काफी हद तक मुस्लिम नेता जिम्मेदार हैं।

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता हसन ने भी आगामी चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों की कम संख्या पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा बिहार में क्षेत्रीय दल और राष्ट्रीय दल मुस्लिम अल्पसंख्यकों को केवल वोट बैंक के रूप में देखते हैं। सभी प्रमुख पार्टियां परिवार की राजनीति कर रही हैं। और शीर्ष नेताओं या राजनीतिक परिवारों के वंशजों के बेटे-बेटियों को टिकट देने में व्यस्त हैं।

एक अन्य मुस्लिम नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि भाजपा और धर्म आधारित राजनीति का उदय उन प्रमुख कारणों में से एक है। जिसके कारण क्षेत्रीय दल धर्मनिरपेक्षता का दावा करने के बावजूद बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों टिकट देने से कतराते हैं क्योंकि उन्हें डर है, कि इससे उनके बीच धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा ध्रुवीकरण की राजनीति एक कारण है कि प्रमुख दलों द्वारा कम मुस्लिम उम्मीदवारों को चुना जा रहा है।

हिन्दुस्तान का वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें